बीजिंग का 'मकड़जाल': ताइवान के पूर्वी तट पर बढ़ा समुद्री तनाव
ताइवान ने कहा, उसके पूर्वी इलाके में चीन के तटरक्षक बलों की गश्त 'उकसावे वाली कार्रवाई' है

ताइवानी अधिकारियों ने चीनी तटरक्षक बलों की हालिया घुसपैठ की निंदा करते हुए इसे द्वीप की संप्रभु समुद्री सीमाओं को कमजोर करने के उद्देश्य से चलाया गया 'कॉग्निटिव वॉरफेयर' (मानसिक युद्ध) करार दिया है।
ताइवान के पूर्व में स्थित प्रशांत महासागर का शांत इलाका अब क्रॉस-स्ट्रेट संघर्ष का नया केंद्र बन गया है। सोमवार, 8 जून 2026 को ताइवान के रक्षा मंत्री वेलिंगटन कू ने कड़े शब्दों में कहा कि इन प्रतिबंधित क्षेत्रों में चीनी जहाजों की मौजूदगी एक 'उकसावे वाली कार्रवाई' है और यह क्षेत्र पर 'मकड़जाल' बुनने की सोची-समझी कोशिश है। बीजिंग उन इलाकों में अपना अधिकार जताने की कोशिश कर रहा है जहाँ ऐतिहासिक रूप से उसका कोई दावा नहीं रहा है। यह बीजिंग की बदलती समुद्री रणनीति का संकेत है, जहाँ वह पूर्वी तट को एक सीमा नहीं, बल्कि अपने कब्जे वाले क्षेत्र के रूप में देख रहा है।
यह तनाव पिछले महीने शुरू हुई कूटनीतिक हलचल के बाद बढ़ा है। जापान और फिलीपींस द्वारा अपनी समुद्री सीमाओं को तय करने के लिए औपचारिक बातचीत शुरू करने की घोषणा के बाद चीन ने ये जहाज तैनात किए हैं। बीजिंग इस बातचीत को ताइवान के पास अपने प्रभाव क्षेत्र में दखल मानता है। चीन का आधिकारिक उद्देश्य इसे 'विशेष समुद्री यातायात कानून-प्रवर्तन अभियान' बता रहा है।
चूहे-बिल्ली का खेल
ताइवान का तटरक्षक बल भी चुप नहीं बैठा है। 6 और 7 जून के सप्ताहांत में ताइपे ने अपने जहाज तैनात किए और चीनी जहाजों को प्रतिबंधित जलक्षेत्र से बाहर खदेड़ दिया। 8 जून को चीनी सरकारी मीडिया द्वारा जारी फुटेज में तनावपूर्ण स्थिति दिखी, जिसमें एक चीनी अधिकारी ताइवानी समकक्षों को चेतावनी देते हुए सुना गया: "अपनी भाषा का ध्यान रखें - ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों पक्ष एक ही चीन का हिस्सा हैं।"
रणनीतिक चालों से परे, यह एक मनोवैज्ञानिक युद्ध है। ताइवान की ओशन अफेयर्स काउंसिल की प्रमुख कुआन बी-लिंग ने कहा कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। मई की शुरुआत से ही द्वीप को 'लगातार उकसावे' का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें प्राटास द्वीप के पास घुसपैठ से लेकर संवेदनशील क्षेत्रों में अनुसंधान जहाजों की तैनाती शामिल है। ताइपे के लिए, यह केवल भौतिक सीमाओं का सवाल नहीं है, बल्कि यह 'कॉग्निटिव वॉरफेयर' है जिसका उद्देश्य उन क्षेत्रों में चीनी उपस्थिति को सामान्य बनाना है जिन्हें ताइवान अपना मानता है।
बड़ी तस्वीर: यह क्यों मायने रखता है?
इन गश्तों का असर समुद्री घर्षण से कहीं अधिक है। नौसेना के बजाय तटरक्षक बलों का उपयोग करके, बीजिंग प्रभावी रूप से संघर्ष को 'ग्रे-ज़ोन' (अस्पष्ट स्थिति) में रख रहा है—यानी पूर्ण सैन्य संघर्ष को भड़काए बिना ताइवान के धैर्य और तैयारी की परीक्षा लेना। इससे चीन धीरे-धीरे यथास्थिति को बदल रहा है और ताइवान को निगरानी और प्रतिक्रिया में अपने महत्वपूर्ण संसाधन खर्च करने के लिए मजबूर कर रहा है।
क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से, यह रुख और सख्त होने का संकेत है। बीजिंग ताइवान के पड़ोसियों, विशेषकर फिलीपींस और जापान के बीच बढ़ते समन्वय से परेशान है। जैसे-जैसे ये देश अपने समुद्री कानूनी ढांचे को मजबूत कर रहे हैं, चीन अपनी प्रधानता जताकर इसका जवाब दे रहा है। संदेश स्पष्ट है: बीजिंग किसी भी ऐसे अंतरराष्ट्रीय प्रयास को चुनौती देने के लिए तैयार है जो ताइवान को एक अलग समुद्री इकाई के रूप में देखता है, चाहे इसके कूटनीतिक परिणाम कुछ भी हों।
जैसे-जैसे ताइवान की सेना और तटरक्षक बलों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने का काम तेज हो रहा है, क्षेत्र में तनाव बरकरार है। हालांकि सोमवार सुबह चार चीनी जहाज पीछे हट गए, लेकिन यह पैटर्न बताता है कि यह पीछे हटना नहीं, बल्कि प्रशांत क्षेत्र में प्रभाव की सीमाओं को फिर से परिभाषित करने के एक दीर्घकालिक अभियान का हिस्सा है।
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