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चित्तौड़गढ़ में दुर्लभ मेहमान: रिहायशी बाथरूम में निकला शर्मीला 'कैट स्नेक'

बाथरूम में निकला बिल्ली जैसी आंखों वाला सांप, चित्तौड़ में दिखा दुर्लभ 'कैट स्नेक'

द्वारा प्रिया नायरप्रकाशित 17 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
चित्तौड़गढ़ में दुर्लभ मेहमान: रिहायशी बाथरूम में निकला शर्मीला 'कैट स्नेक'
चित्तौड़गढ़ में दुर्लभ मेहमान: रिहायशी बाथरूम में निकला शर्मीला 'कैट स्नेक'

बिल्ली जैसी आंखों वाले एक दुर्लभ और निशाचर सरीसृप को राजस्थान के एक घर से रेस्क्यू किया गया है, जो इस क्षेत्र में एक अनोखी घटना है।

चित्तौड़गढ़ के प्रताप नगर इलाके में मंगलवार की सुबह शर्मा परिवार के लिए अचानक एक अजीब मोड़ ले आई। उनके बाथरूम में एक दुर्लभ और पतला मेहमान छिपा बैठा था—एक 'कैट स्नेक' (Boiga), जो अपनी बिल्ली जैसी आंखों और शर्मीले, निशाचर स्वभाव के लिए जाना जाता है। आमतौर पर शहरी इलाकों में मिलने वाले सांपों के विपरीत, यह खोज इतनी दुर्लभ थी कि वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम तुरंत हरकत में आ गई।

मुबारक खान के नेतृत्व में 'चित्तौड़गढ़ वाइल्डलाइफ एंड एनवायरनमेंट कंजर्वेशन सोसाइटी' के सदस्यों को तुरंत सूचित किया गया। विश्वनाथ कॉलोनी स्थित घर पर पहुंचने के बाद, टीम ने पाया कि यह लगभग ढाई फीट लंबा एक युवा कैट स्नेक है। खान ने बड़ी कुशलता और पेशेवर तरीके से सांप को रेस्क्यू किया और उसे बिना किसी नुकसान पहुंचाए वापस उसके प्राकृतिक वन आवास में छोड़ दिया।

शहर में दुर्लभ नजारा

यह केवल एक सामान्य सांप का रेस्क्यू नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि शहर की सीमा के भीतर कैट स्नेक का दिखना एक असाधारण घटना है। कंजर्वेशन सोसाइटी के रिकॉर्ड के अनुसार, छह वर्षों में यह केवल दूसरी बार है जब इस प्रजाति को शहरी चित्तौड़गढ़ में देखा गया है। पिछली बार यह सांप उपला पाड़ा में मिला था, जो यह दर्शाता है कि ये सरीसृप कितने दुर्लभ हैं।

क्षेत्र में अक्सर सामने आने वाली तनावपूर्ण घटनाओं के विपरीत—जैसे हाल ही में मोटर स्टार्टर के पीछे मिले ब्लैक कोबरा का रेस्क्यू या उदयपुर के पास अक्सर दिखने वाले जहरीले रसेल वाइपर—कैट स्नेक इंसानों के लिए बहुत कम खतरा पैदा करता है।

कैट स्नेक का विज्ञान

हालांकि 'सांप' शब्द सुनते ही लोग डर जाते हैं, लेकिन वन्यजीव विशेषज्ञ प्रजातियों के बीच अंतर करने की सलाह देते हैं। कैट स्नेक बहुत कम जहरीला होता है और इसका जहर केवल छोटे शिकार को पकड़ने के लिए विकसित हुआ है, न कि इंसानों पर हमला करने के लिए। यह एक बेहद शर्मीला और रात में सक्रिय रहने वाला जीव है, जो इंसानों से दूर रहना ही पसंद करता है।

यह क्यों मायने रखता है: शहरी विस्तार और जैव विविधता

चित्तौड़गढ़ के रिहायशी इलाकों में विभिन्न प्रजातियों का बार-बार दिखना बदलते शहरी परिदृश्य का संकेत है। जैसे-जैसे मानव बस्तियां जंगल के किनारों तक फैल रही हैं, ऐसे आमना-सामना की घटनाएं बढ़ रही हैं। शहरीकरण के साथ वन्यजीवों का यह संघर्ष—जहां उन्हें कंक्रीट की बाधाओं के बीच रास्ता ढूंढना पड़ता है—जन जागरूकता की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

घबराने के बजाय, शर्मा परिवार द्वारा तुरंत संरक्षणवादियों से संपर्क करना बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है। इन दुर्लभ जीवों को बचाना बहुत जरूरी है; ये केवल अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि एक बड़े पारिस्थितिक तंत्र का हिस्सा हैं जो हमें याद दिलाते हैं कि हमारे शहर अभी भी एक जटिल और अक्सर अनदेखी प्राकृतिक दुनिया के साथ साझा स्थान हैं।

द्वारा प्रिया नायर
राजनीतिक संवाददाता

प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।