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पटना का कोचिंग वॉर: जमानत के बाद रौशन आनंद ने खान सर पर लगाए गंभीर आरोप

'खान सर का नार्को टेस्ट हो.. मुझे जेल भेजने के लिए करोड़ों खर्च किए', ज्ञान बिंदु के रौशन आनंद के 10 बड़े दावे

द्वारा प्रिया नायरप्रकाशित 15 जून 2026· 3 मिनट पढ़ें
पटना कोचिंग वॉर: जमानत के बाद रौशन आनंद ने खान सर पर लगाए विस्फोटक आरोप
पटना कोचिंग वॉर: जमानत के बाद रौशन आनंद ने खान सर पर लगाए विस्फोटक आरोप

दो प्रमुख शिक्षकों के बीच की कड़वी प्रतिद्वंद्विता अब एक परिवार के सदस्य की मौत और बड़ी साजिश के आरोपों के बाद आपराधिक जांच में बदल गई है।

पटना का कोचिंग हब, जिसे अक्सर सरकारी नौकरियों का प्रवेश द्वार माना जाता है, फिलहाल सत्ता और कथित आपराधिक गतिविधियों के एक गंभीर दौर से गुजर रहा है। ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी के निदेशक रौशन आनंद जमानत मिलने के बाद फिर से सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं, और उन्होंने चुप्पी तोड़ते हुए अपने साथी शिक्षक फैसल खान, जिन्हें खान सर के नाम से जाना जाता है, पर विस्फोटक आरोप लगाए हैं। आनंद का दावा है कि यह महज पेशेवर प्रतिद्वंद्विता से कहीं अधिक गहरी साजिश है।

बढ़ता विवाद

दोनों के बीच का विवाद, जो पहले कोचिंग परिसरों में तोड़फोड़ और गोलीबारी की खबरों के कारण सुर्खियों में आया था, अब एक डरावना मोड़ ले चुका है। इस तनाव के केंद्र में नेपाल में आनंद के भाई प्रिंस यादव की मौत है। आनंद का आरोप है कि यह कोई स्वाभाविक घटना नहीं थी, बल्कि उनके जेल में रहने के दौरान की गई एक सोची-समझी हत्या थी। हाल ही में एक प्रेस वार्ता के दौरान आनंद ने दावा किया, "वे सिर्फ मुझे जेल में नहीं डालना चाहते थे, वे सब कुछ बर्बाद करना चाहते थे।" उन्होंने खान सर और एक स्थानीय मकान मालिक आर.एस. प्रसाद पर इस घटना की साजिश रचने का आरोप लगाया।

आनंद के मूल दावे बेहद गंभीर हैं। उन्होंने सीबीआई जांच और खान सर के नार्को टेस्ट की मांग की है। उनका कहना है कि उनके प्रतिद्वंद्वी का प्रभाव इतना अधिक है कि उसने स्थानीय जांच को प्रभावित किया है। आनंद के अनुसार, पुलिस ने भारी राजनीतिक दबाव में काम किया और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए मानक प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया, जबकि कथित तौर पर खान सर को संरक्षण दिया गया।

राजनीतिक संरक्षण के आरोप

प्राथमिक स्रोत द्वारा पेश किया गया विवरण कोचिंग बिरादरी और स्थानीय कानून प्रवर्तन के बीच भरोसे की कमी को दर्शाता है। आनंद का आरोप है कि पुलिस को उनके प्रतिद्वंद्वी ने 'खरीद' लिया है। उन्होंने इस बात की ओर इशारा किया कि गंभीर आरोपों के बावजूद खान सर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें सलाखों के पीछे रखने और उनके विवाद के मुख्य बिंदुओं को मोड़ने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, जिसमें मकान मालिक के बेटे के जिम से जुड़ा संदिग्ध वित्तीय लेनदेन भी शामिल है।

इन दावों ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच हलचल मचा दी है, जहां दोनों हस्तियों के लाखों छात्र प्रशंसक हैं। जहां खान सर ने अपना नाम साफ करने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है, वहीं यह विवाद अब शिक्षा या बाजार हिस्सेदारी की लड़ाई नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई बन गया है।

यह क्यों मायने रखता है

यह सार्वजनिक विवाद कोचिंग उद्योग में शिक्षा, पैसा और बाहुबल के खतरनाक गठजोड़ को दर्शाता है। बिहार में 'कोचिंग माफिया' शब्द का इस्तेमाल अक्सर बोलचाल में किया जाता है, लेकिन यह मामला राजनीतिक संरक्षण और आपराधिक धमकी के कथित गठजोड़ को स्पष्ट रूप से सामने लाता है। जब शिक्षा जगत के नेता हत्या और नार्को टेस्ट जैसे आरोप लगाने लगते हैं, तो यह उस अनियमित क्षेत्र की अस्थिरता को उजागर करता है, जिस पर लाखों छात्रों का भविष्य टिका है। इसके निहितार्थ दो व्यक्तियों से कहीं आगे हैं; यह एक प्रणालीगत विफलता को दर्शाता है जहां व्यक्तिगत प्रतिशोध को सरकारी मशीनरी के माध्यम से अंजाम दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय संस्थानों में जनता का भरोसा कम हो रहा है।

द्वारा प्रिया नायर
राजनीतिक संवाददाता

प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।