जून में दुर्लभ ठंड: दिल्ली-NCR में और बारिश के आसार, IMD ने जारी किया येलो अलर्ट
दिल्ली मौसम आज, 13 जून 2026: क्या नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम और ग्रेटर नोएडा में बारिश होगी? IMD ने जारी किया अलर्ट

रात भर हुई बारिश के बाद तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसके चलते राजधानी में गरज के साथ छींटे पड़ने और तेज हवाएं चलने का अलर्ट जारी है।
जून के महीने में राजधानी की पहचान रही भीषण गर्मी इस हफ्ते गायब सी हो गई है। शुक्रवार की सुबह जब लोग जागे, तो उन्हें मौसम में अनपेक्षित ठंडक और हवाओं का अहसास हुआ, जो शुरुआती गर्मियों की तपिश से बिल्कुल अलग था। सफदरजंग स्थित मुख्य मौसम केंद्र ने न्यूनतम तापमान 22.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया, जो सामान्य से 5.2 डिग्री कम है और महज 24 घंटे पहले के तापमान से 7.2 डिग्री की बड़ी गिरावट है।
तापमान में यह गिरावट उत्तर-पश्चिमी भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण आई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 13 जून के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में येलो अलर्ट जारी किया है, जिसमें 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और गरज के साथ बारिश की चेतावनी दी गई है। नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम और ग्रेटर नोएडा के निवासियों के लिए पूर्वानुमान स्पष्ट है: दोपहर और शाम के दौरान रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।
ठंड की चपेट में शहर
तापमान में यह गिरावट पूरे क्षेत्र में समान रूप से महसूस की गई। जहां सफदरजंग में अधिकतम तापमान 34.6 डिग्री सेल्सियस रहा, वहीं अन्य इलाकों में ठंडक और अधिक थी। रिज (Ridge) में न्यूनतम तापमान 20.9 डिग्री और पालम में 21.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस समय के सामान्य मानकों से काफी नीचे है। पूरे NCR में इस अचानक आई ठंडक ने मानसून के आने से पहले होने वाली उमस से एक सुखद राहत दी है।
IMD के ताजा अपडेट के अनुसार, यह अस्थिर मौसम केवल एक दिन की बात नहीं है। दक्षिण और पूर्वी भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के साथ, उत्तर भारत में भी गरज के साथ बारिश की गतिविधियां जारी रहने की स्थिति बनी हुई है। निवासियों को शनिवार तक आसमान में बादल छाए रहने के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि मौसम विभाग लगातार इस विक्षोभ की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: जून के बदलते मिजाज
यह असामान्य ठंडक इस बात की याद दिलाती है कि मानसून-पूर्व का चरण कितना अस्थिर हो गया है। हालांकि 'ठंडा जून' आम लोगों के लिए राहत लेकर आया है, लेकिन तापमान में यह उतार-चढ़ाव पश्चिमी विक्षोभ और मानसून की हवाओं के बीच जटिल तालमेल को दर्शाता है।
गर्मी से मिली फौरी राहत के अलावा, यह मौसम उत्तर भारत के संक्रमण काल की बढ़ती अनिश्चितता को भी उजागर करता है। वर्तमान पूर्वानुमान भले ही NCR पर केंद्रित हो, लेकिन मौसम में बड़े बदलाव कई राज्यों को एक साथ प्रभावित कर रहे हैं। तेज हवाओं और बेमौसम बारिश का चलन—जो अब IMD बुलेटिनों में एक आम बात हो गई है—यह संकेत देता है कि गर्मी के अंत और मानसून के आगमन के बीच का समय सिमट रहा है, जिसके परिणामस्वरूप अब धीरे-धीरे मौसम बदलने के बजाय अचानक तीव्र मौसमी घटनाएं देखने को मिल रही हैं।
अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।