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मातम में डूबा शहर: लखनऊ की कमर्शियल बिल्डिंग में भीषण आग, 14 लोगों की मौत

लखनऊ में कमर्शियल इमारत में लगी भीषण आग से 14 लोगों की मौत; पीएम और सीएम ने मुआवजे का किया ऐलान

द्वारा कबीर शर्माप्रकाशित 22 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
मातम में डूबा शहर: लखनऊ की कमर्शियल बिल्डिंग में आग से 14 लोगों की मौत
मातम में डूबा शहर: लखनऊ की कमर्शियल बिल्डिंग में आग से 14 लोगों की मौत

पुरानिया इलाके में एक बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग के बाद बचाव अभियान में 14 लोगों की मौत की पुष्टि होने से पीड़ित परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

लखनऊ के अलीगंज इलाके में लोग जान बचाने के लिए खिड़कियों से कूदते नजर आए, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। सोमवार का दिन एक तीन मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग में हमेशा की तरह शुरू हुआ, जहां एक पेट शॉप और एक एनिमेशन सेंटर स्थित था, लेकिन देखते ही देखते यह जगह तबाही का मंजर बन गई। जैसे ही आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में लिया, दोपहर का समय सायरन की आवाजों और अंदर फंसे लोगों की चीखों से गूंज उठा।

कई घंटों तक त्रासदी का दायरा स्पष्ट नहीं था। शुरुआती रिपोर्टों में हताहतों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे थे। हालांकि, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय दमकल टीमों के संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भयावह सच्चाई सामने आई। यूपी के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पुष्टि की कि 14 लोगों की जान चली गई है, जिनमें से कई युवा छात्र थे जो आग से बचने के लिए वॉशरूम और इमारत के अन्य कोनों में छिप गए थे।

घटना के बाद राहत और बचाव कार्य

प्रधानमंत्री ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने पीएमएनआरएफ (PMNRF) से अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, साथ ही घायलों के लिए भी मदद का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि एक कमर्शियल जगह मौत का जाल कैसे बन गई। देर रात तक कूलिंग ऑपरेशन जारी रहा।

यह क्यों मायने रखता है: शहरी जोखिम का बढ़ता पैटर्न

लखनऊ की यह त्रासदी भारत के तेजी से बढ़ते शहरी कमर्शियल हब में फायर सेफ्टी की बदहाल स्थिति पर सवाल उठाती है। अक्सर रिहायशी या छोटे कमर्शियल इस्तेमाल के लिए बनी इमारतों को बिना किसी स्ट्रक्चरल अपग्रेड या फायर सेफ्टी सिस्टम के कोचिंग सेंटर, ऑफिस और दुकानों में बदल दिया जाता है। जब ऐसी जगहों पर बड़ी संख्या में लोग—जैसे एनिमेशन सेंटर में छात्र—मौजूद होते हैं, तो निकासी के स्पष्ट रास्तों या पर्याप्त वेंटिलेशन की कमी एक छोटे से शॉर्ट-सर्किट को भी बड़ी त्रासदी में बदल देती है। जब तक फायर सेफ्टी ऑडिट केवल कागजों तक सीमित रहेंगे और जमीनी स्तर पर सख्ती नहीं होगी, तब तक ऐसी इमारतें हमारे शहरों के लिए एक 'टाइम बम' बनी रहेंगी।

द्वारा कबीर शर्मा
फ़ीचर्स लेखक

कबीर शर्मा पॉलिटिकलपीडिया के लिए संस्कृति, तकनीक और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर लिखते हैं।