90 मिनट की फोन कॉल: यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए ट्रंप का बड़ा दांव
पुतिन और जेलेंस्की के साथ 90 मिनट की बातचीत में ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध खत्म करने में मदद की पेशकश की
जैसे-जैसे कूटनीतिक हलचल तेज हो रही है, डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को रूस-यूक्रेन संघर्ष के केंद्र में ला खड़ा किया है। इससे जहां एक ओर युद्धविराम की उम्मीदें जगी हैं, वहीं मोर्चे के भविष्य को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की गति शायद ही कभी सीधी रेखा में चलती है, लेकिन बीते सप्ताहांत इसमें नाटकीय बदलाव देखने को मिला। अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर, डोनाल्ड ट्रंप ने व्लादिमीर पुतिन के साथ लगभग 90 मिनट तक फोन पर बात की, जिसके बाद उन्होंने वोलोडिमिर जेलेंस्की के साथ भी अलग से चर्चा की। पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इन चर्चाओं ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति को एक 'स्वयंभू शांतिदूत' के रूप में स्थापित कर दिया है, जो वर्षों से वैश्विक भू-राजनीति में बनी खाई को पाटने की कोशिश कर रहे हैं।
मोर्चे पर विरोधाभासी दावे
इन बातचीत से यह स्पष्ट हो गया कि दोनों पक्ष अभी भी एक-दूसरे से कितनी दूर हैं। कॉल के दौरान, पुतिन ने ट्रंप को रूसी सेना की 'आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने' की स्थिति के बारे में जानकारी दी और यहां तक दावा किया कि उनकी सेना ने रणनीतिक शहर कोस्तियांतिनिव्का (Kostiantynivka) पर कब्जा कर लिया है। हालांकि, कीव ने इसे एक और 'रूसी झूठ' करार दिया है। यूक्रेनी सेना के प्रवक्ता एंड्री कोवाल्योव ने पुष्टि की कि शहर अभी भी पूरी तरह से यूक्रेनी नियंत्रण में है। यह इस सच्चाई को रेखांकित करता है कि जब नेता बातचीत कर रहे हैं, तब भी 1,200 किलोमीटर लंबी अग्रिम पंक्ति एक क्रूर और अनिश्चित युद्ध क्षेत्र बनी हुई है।
ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह लड़ाई को तेजी से खत्म करने के लिए दबाव डालने को तैयार हैं। क्रेमलिन के सहयोगी यूरी उशाकोव ने बताया कि चर्चा 'व्यावसायिक और काफी रचनात्मक' रही। मॉस्को ने राजनीतिक-कूटनीतिक समाधानों में शामिल होने की इच्छा जताई है, बशर्ते उनके 'मौलिक दृष्टिकोण'—जिसमें डोनबास पर नियंत्रण भी शामिल है—को ध्यान में रखा जाए। वहीं, जेलेंस्की ने ट्रंप के साथ अपनी बातचीत को 'बहुत अच्छा' बताया, लेकिन वे सतर्क बने हुए हैं और यह स्पष्टता चाहते हैं कि किसी भी संभावित युद्धविराम का यूक्रेन की संप्रभुता पर क्या असर पड़ेगा।
दूत और व्यापक परिदृश्य
कूटनीति सिर्फ एक फोन कॉल पर खत्म नहीं होती। ट्रंप ने मध्यस्थता की जिम्मेदारी संभालने के लिए स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को दूत के रूप में भेजा है, और मॉस्को की संभावित यात्रा की तैयारियां भी चल रही हैं। इन वार्ताओं का दायरा पूर्वी यूरोप से आगे बढ़ रहा है; रिपोर्टों के अनुसार, ईरान संकट पर भी चर्चा हुई है, जिसमें पुतिन ने उम्मीद जताई कि अमेरिका के नेतृत्व वाले कूटनीतिक प्रयासों से व्यापक अंतरराष्ट्रीय स्थिरता आ सकती है।
यह महत्वपूर्ण क्यों है
गतिविधियों का यह दौर इस बात का संकेत है कि संघर्ष के प्रबंधन में एक बड़ा बदलाव आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए मुख्य सवाल यह है कि क्या ट्रंप के नेतृत्व वाली यह मध्यस्थता शांति का एक वास्तविक रास्ता है या पश्चिमी समर्थित गठबंधन में एक व्यवधान। मॉस्को और कीव के बीच खुद को एक सीधी कड़ी के रूप में पेश करके, ट्रंप यह दांव लगा रहे हैं कि व्यक्तिगत कूटनीति वह हासिल कर सकती है जो महीनों के पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय दबाव से नहीं हो पाया। हालांकि, युद्धक्षेत्र की वास्तविकता—जहां कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है—और 'तेजी से अंत' के दावों के बीच का अंतर बताता है कि सबसे कठिन काम अभी बाकी है। जेलेंस्की के लिए चुनौती अमेरिकी समर्थन की आवश्यकता और ऐसे किसी समझौते के जोखिमों के बीच संतुलन बनाने की है, जो यूक्रेन की दीर्घकालिक सुरक्षा से समझौता कर सकता है।
कबीर शर्मा पॉलिटिकलपीडिया के लिए संस्कृति, तकनीक और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर लिखते हैं।