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मनरेगा से आगे: क्या VB-G RAM G ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल पाएगा?

एक्सप्लेनर: आज से पूरे देश में लागू हो रहा VB-G RAM G, जानिए कामगारों के लिए क्या-क्या बदल जाएगा

By Kabir SharmaPublished 1 July 2026· 3 min read
मनरेगा से आगे: क्या VB-G RAM G ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल पाएगा?
मनरेगा से आगे: क्या VB-G RAM G ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल पाएगा?

दो दशक पुराने मनरेगा की जगह अब 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन' ने ली है, जो 125 दिनों के रोजगार और डिजिटल पारदर्शिता का वादा करता है।

देश के ग्रामीण रोजगार परिदृश्य में आज एक बड़ा बदलाव हुआ है। 1 जुलाई से 'महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम' (MGNREGA) औपचारिक रूप से इतिहास का हिस्सा बन गया है और इसकी जगह 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन' यानी VB-G RAM G ने ले ली है। सरकार का दावा है कि यह नया कानून केवल मजदूरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे 'विकसित भारत 2047' के विजन से जोड़ते हुए कौशल विकास और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के निर्माण का जरिया बनाया जाएगा।

मजदूरी और रोजगार के नए मानक

इस नए कानून के तहत सबसे बड़ा बदलाव रोजगार के दिनों की संख्या में हुआ है। अब ग्रामीण परिवारों को साल में 100 की जगह 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। वेतन दरों में भी औसतन 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की गई है, जिससे अब न्यूनतम मजदूरी 327.4 रुपये प्रतिदिन तय हो गई है। मंत्रालय ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसी भी क्षेत्र में मजदूरी 300 रुपये से कम न हो। उत्तर प्रदेश, बिहार, असम और झारखंड जैसे राज्यों में मजदूरी में 15 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जाएगी, जबकि अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में यह वृद्धि करीब 24.5 प्रतिशत तक है।

तकनीक और पारदर्शिता का नया अध्याय

पुराने मनरेगा सिस्टम में फर्जी मस्टर रोल और हाजिरी को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। VB-G RAM G में इन खामियों को दूर करने के लिए फेस ऑथेंटिकेशन आधारित उपस्थिति और GPS ट्रैकिंग जैसे डिजिटल सुरक्षा उपाय जोड़े गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे बिचौलियों पर लगाम लगेगी और सरकारी फंड का सही उपयोग सुनिश्चित होगा। फिलहाल, पुराने जॉब कार्ड तब तक वैध रहेंगे जब तक नए कार्ड जारी नहीं हो जाते, जिससे मजदूरों के काम पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

ग्रामीण विकास का भविष्य: एक विश्लेषण

इस बदलाव के पीछे सरकार का मकसद महज रोजगार देना नहीं, बल्कि गांवों में संपत्ति निर्माण (Infrastructure) को उत्पादक बनाना है। जहां मनरेगा अक्सर केवल शारीरिक श्रम तक सीमित रहा, वहीं यह नया मॉडल कौशल प्रशिक्षण और जल संरक्षण जैसे कार्यों को प्राथमिकता दे रहा है। हालांकि, विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पर चिंता भी जताई है। उनका तर्क है कि डिजिटल निगरानी और केंद्रीकृत नियंत्रण से पंचायतों की भूमिका सीमित हो सकती है और मांग आधारित रोजगार व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि जमीन पर तकनीक और प्रशासनिक बदलावों का यह तालमेल किस हद तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बना पाता है।

जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे गांवों के लिए एक नए युग की शुरुआत बताया है। राज्यों को इस बदलाव के लिए 95,692.31 करोड़ रुपये की अंतरिम राशि आवंटित की गई है ताकि नई व्यवस्था सुचारू रूप से लागू हो सके। 2 जुलाई को आंध्र प्रदेश के तिरुपति से इसकी आधिकारिक शुरुआत के बाद, देश भर की ग्राम पंचायतें अब इस नई कार्यप्रणाली के तहत काम करेंगी।

By Kabir Sharma
Features Writer

Kabir Sharma writes on culture, technology and everyday life for PoliticalPedia.