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बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था की नाकामी: एंबुलेंस जाम में फंसी तो गोद में उठाकर अस्पताल भागे परिजन

ब‍िहार: एंबुलेंस से उतारकर मरीज को गोद में ले गए पर‍िजन, जाम में मरीज की हालत बिगड़ी

By PoliticalPedia Editorial DeskPublished 7 June 2026· 2 min read

समस्तीपुर में घंटों से जारी भीषण ट्रैफिक जाम के कारण एक मरीज की जान पर बन आई, मजबूरन परिजनों को एंबुलेंस छोड़कर मरीज को गोद में उठाकर पैदल दौड़ना पड़ा।

बिहार के समस्तीपुर जिले से एक विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है, जो राज्य की लचर स्वास्थ्य और यातायात व्यवस्था की कलाई खोलती है। एक गंभीर रूप से बीमार मरीज को अस्पताल ले जा रही एंबुलेंस शहर के मुख्य मार्ग पर भीषण ट्रैफिक जाम में फंस गई। जब एंबुलेंस का सायरन और घंटों का इंतजार भी जाम नहीं खुलवा सका, तो परिजनों के सब्र का बांध टूट गया।

जान बचाने की जद्दोजहद

मरीज की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए, परिजन एंबुलेंस से बाहर निकलने को मजबूर हो गए। उन्होंने स्ट्रेचर का इंतजार करने के बजाय मरीज को अपनी गोद में उठाया और अस्पताल की ओर पैदल ही दौड़ पड़े। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मरीज की हालत लगातार गिर रही थी और एंबुलेंस के अंदर उसे प्राथमिक उपचार या ऑक्सीजन की निरंतरता बनाए रखने में भी बाधा आ रही थी।

यह घटना दर्शाती है कि कैसे 'गोल्डन आवर'—वह महत्वपूर्ण समय जिसमें उपचार मिलने से जान बच सकती है—व्यवस्थागत खामियों की बलि चढ़ जाता है। समस्तीपुर के इस मार्ग पर अक्सर लगने वाले जाम के कारण एंबुलेंस का फंसना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार मामला सीधे तौर पर मानवीय जीवन से जुड़ा था।

डिजिटल युग में जमीनी हकीकत

आज के डिजिटल दौर में जब हम 'हेल्थ' और 'लाइफस्टाइल' से जुड़ी खबरें 'वेबस्टोरीज' और ndtv जैसे मंचों पर पढ़ते हैं, तब ऐसी घटनाएं एक बड़ा सवाल खड़ा करती हैं। क्या हमारी बुनियादी सुविधाएं कागजों पर मौजूद sports के बड़े विज्ञापनों और lifestyle के दावों के साथ तालमेल बिठा पा रही हैं? हालांकि ndtvimg के माध्यम से हम दुनिया भर की खबरें अपने घरों तक पाते हैं, लेकिन अपने ही शहर की सड़कों पर एंबुलेंस की यह लाचारी प्रशासन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

प्रशासन की जवाबदेही का सवाल

इस घटना के बाद अब स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। home-khabar अनुभाग में अक्सर ऐसी खबरें प्रमुखता से ली जाती हैं, लेकिन जब तक जमीनी स्तर पर ट्रैफिक प्रबंधन और एंबुलेंस के लिए 'ग्रीन कॉरिडोर' जैसी व्यवस्थाएं नहीं बनेंगी, तब तक मरीज इसी तरह अपनी जान जोखिम में डालते रहेंगे। pfrom के अनुसार, इस पूरे मामले में अभी तक किसी भी अधिकारी ने सड़क पर एंबुलेंस को प्राथमिकता न मिलने के कारणों पर कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या प्रशासन इस पर कोई सख्त कदम उठाता है या फिर यह घटना भी महज एक अन्य 'ब्रेकिंग न्यूज' बनकर फाइलों में दब जाएगी। आम आदमी का स्वास्थ्य अब सिर्फ डॉक्टरों की कुशलता पर ही नहीं, बल्कि ट्रैफिक पुलिस और सड़क तंत्र की जवाबदेही पर भी टिका है।

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