मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना: 37वीं किस्त में देरी से बढ़ी महिलाओं की चिंता, क्या है सरकार का रुख?
लाडली बहनों को कब मिलेगी 37वीं किस्त? 1.25 करोड़ महिलाओं की निगाहें सरकार के ऐलान पर
जून महीने की आर्थिक सहायता मिलने का इंतजार कर रही 1.25 करोड़ महिलाओं की नजरें अब सरकारी घोषणाओं पर टिकी हैं।
भोपाल की गलियों से लेकर सुदूर ग्रामीण इलाकों तक, मध्य प्रदेश की 'मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना' ने आर्थिक चर्चाओं के केंद्र में जगह बना ली है। हर महीने की शुरुआत में जिस तरह बैंक खातों में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के जरिए राशि पहुंचती है, उसने लाखों परिवारों के लिए घरेलू बजट को संभालना आसान कर दिया है। हालांकि, इस बार जून की 37वीं किस्त को लेकर एक अनिश्चितता का माहौल है। आम तौर पर समय पर होने वाला भुगतान इस बार अब तक नहीं हुआ है, जिससे लाभार्थियों की उत्सुकता बढ़ गई है।
प्रशासनिक गलियारों से मिल रही जानकारी के अनुसार, भुगतान में यह देरी किसी बड़े बदलाव का संकेत नहीं, बल्कि सरकारी व्यस्तताओं का परिणाम हो सकती है। आधिकारिक सूत्रों का मानना है कि जून के मध्य तक राशि खातों में पहुंच सकती है। अभी तक सरकार ने कोई निश्चित तारीख जारी नहीं की है, इसलिए लाभार्थियों को आधिकारिक घोषणा का इंतजार करने की सलाह दी जाती है।
पारदर्शिता और आर्थिक प्रभाव
पिछले दो वर्षों का डेटा देखें तो यह योजना केवल एक चुनावी वादा नहीं, बल्कि एक बड़ी आर्थिक कवायद बन चुकी है। जनवरी 2024 से मई 2026 के बीच, सरकार ने 47 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में भेजी है। राशि का 1000 रुपये से बढ़कर 1500 रुपये तक का सफर यह दर्शाता है कि सरकार इस योजना को महिला सशक्तिकरण के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में देख रही है। बिचौलियों की अनुपस्थिति और सीधे खाते में पैसा पहुंचना इस योजना की सबसे बड़ी ताकत है।
नई उम्मीदों पर लगा ब्रेक
योजना की बढ़ती लोकप्रियता के बीच एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो अब तक इसका लाभ नहीं उठा पा रहा है। वर्ष 2023 के बाद से नए पंजीयन की प्रक्रिया पूरी तरह ठप है। कई सामाजिक संगठन लगातार नए आवेदन खोलने की मांग उठा रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से अभी तक कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिले हैं। इसके अलावा, जिन महिलाओं को किस्त मिल रही है, उनके लिए भी एक चेतावनी है—e-kyc की औपचारिकता पूरी न होने पर भविष्य में भुगतान अटक सकता है। स्थानीय प्रशासन लगातार यह स्पष्ट कर रहा है कि योजना का लाभ निर्बाध रूप से पाने के लिए आधार और केवाईसी का अपडेट होना अनिवार्य है।
द बिग पिक्चर: आर्थिक अनुशासन और चुनावी गणित
आर्थिक नजरिए से देखें तो यह योजना राज्य के सकल घरेलू उत्पाद और उपभोग पैटर्न को प्रभावित करने वाली एक बड़ी इकाई है। जब 1.25 करोड़ महिलाओं के हाथ में सीधे नकदी आती है, तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उपभोग की मांग को बढ़ाती है। हालांकि, इतने बड़े स्तर पर प्रत्यक्ष लाभ अंतरण का बोझ राजकोषीय प्रबंधन के लिए चुनौती भी पेश करता है। आने वाले समय में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस वित्तीय निरंतरता को बनाए रखने और नई पात्र महिलाओं को जोड़ने के बीच संतुलन बैठाने की होगी।
Rohan Gupta covers the economy, markets and companies for PoliticalPedia.