Politicalpedia
राज्य

KSRTC में मुफ्त यात्रा के वादे पर घमासान, महिलाओं का विरोध प्रदर्शन तेज

‘हमें सभी KSRTC बसों में मुफ्त यात्रा चाहिए..’ - महिला मोर्चा का आंदोलन | Madhyamam

द्वारा अनन्या अय्यरप्रकाशित 15 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
KSRTC में मुफ्त यात्रा के वादे पर महिलाओं का विरोध प्रदर्शन
KSRTC में मुफ्त यात्रा के वादे पर महिलाओं का विरोध प्रदर्शन

भाजपा का महिला मोर्चा पूरे केरल में अपना अभियान तेज कर रहा है, जिसमें सरकार से सभी KSRTC सेवाओं में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा का चुनावी वादा पूरा करने की मांग की गई है।

इस सप्ताह कोट्टायम KSRTC स्टैंड पर माहौल तब तनावपूर्ण हो गया जब महिला मोर्चा की सदस्यों ने बसों में सवार होकर चालक दल के सामने एक ही मांग रखी: सभी महिला यात्रियों के लिए मुफ्त टिकट। यह कोई अचानक हुआ विरोध नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि वी.डी. सतीसन के नेतृत्व वाला प्रशासन अपने एक प्रमुख चुनावी वादे से मुकर गया है—जिसमें सभी KSRTC बस श्रेणियों में मुफ्त यात्रा का लाभ देने की बात कही गई थी, न कि केवल 'ऑर्डिनरी' सेवाओं में, जो वर्तमान में इस योजना का हिस्सा हैं।

यह आंदोलन सार्वजनिक परिवहन नीतियों को लेकर मतदाताओं और सरकार के बीच बढ़ते अविश्वास को उजागर करता है। जहां अधिकारियों ने मुफ्त यात्रा के दायरे को केवल ऑर्डिनरी बसों तक सीमित रखा है, वहीं महिला मोर्चा का कहना है कि चुनाव प्रचार के दौरान ऐसा कोई अंतर नहीं बताया गया था। प्रदर्शन के दौरान एक स्थानीय इकाई की नेता ने कहा, "उन्होंने सभी सरकारी बसों में सभी महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा का वादा किया था," और जोर देकर कहा कि मौजूदा कार्यान्वयन राज्य भर की महिलाओं के वोटों के साथ विश्वासघात जैसा है।

विरोध का बढ़ता दायरा

कोट्टायम में इस सप्ताह का दृश्य उन प्रदर्शनों की श्रृंखला का नवीनतम हिस्सा है, जो सरकार के सत्ता में आने के तुरंत बाद शुरू हुए थे। 15 मई को ही प्रदर्शनकारियों ने तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, कोझिकोड और कासरगोड सहित प्रमुख केंद्रों पर इसी तरह का विरोध प्रदर्शन किया था। उस दिन, कार्यकर्ताओं ने कल्पेट्टा सुपरफास्ट जैसी लंबी दूरी की सेवाओं में सवार होकर तख्तियां दिखाईं, जिन पर लिखा था, "मुफ्त यात्रा में देरी के खिलाफ विरोध।"

प्रदर्शनकारी अपनी कार्रवाई को "सांकेतिक विरोध" बताने के प्रति सतर्क हैं। उनका कहना है कि उनका लक्ष्य साथी यात्रियों की दैनिक यात्रा में बाधा डालना नहीं, बल्कि वादा की गई सुविधा सुनिश्चित करना है। बसों में चढ़कर और सीधे चालक दल से बात करके, वे जमीनी स्तर के दबाव के जरिए राज्य स्तरीय नीतिगत चर्चा को मजबूर करने की कोशिश कर रहे हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है: बड़ी तस्वीर

यहाँ राजनीतिक दांव बस टिकट की कीमत से कहीं अधिक है। केरल में सार्वजनिक परिवहन हजारों कामकाजी महिलाओं के लिए जीवन रेखा है, और "मुफ्त यात्रा" योजनाएं एक शक्तिशाली चुनावी हथियार बन गई हैं। जब कोई सरकार सामाजिक कल्याण के वादों के आधार पर जनादेश जीतती है, तो उन वादों में किसी भी तरह की कमी विपक्ष को प्रशासन की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का मौका देती है।

सरकार अब वित्तीय संकट में फंसी हुई है। सुपरफास्ट, एक्सप्रेस और लग्जरी सेवाओं में मुफ्त यात्रा का विस्तार करने से पहले से ही संघर्ष कर रही KSRTC पर सब्सिडी का बोझ काफी बढ़ जाएगा। हालांकि, इन मांगों की अनदेखी करके, सत्तारूढ़ गठबंधन अपने मतदाता आधार के एक महत्वपूर्ण वर्ग को नाराज करने का जोखिम उठा रहा है। चूंकि महिला मोर्चा ने तब तक अपना अभियान जारी रखने की कसम खाई है जब तक कि वादा पूरा नहीं हो जाता, KSRTC अब वित्तीय वास्तविकता बनाम चुनावी वादों के बीच एक उच्च-स्तरीय खींचतान का केंद्र बन गया है।

द्वारा अनन्या अय्यर
वैश्विक मामले संवाददाता

अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।