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बगावत की सुगबुगाहट: क्या TMC की चार महिला सांसद BJP में शामिल होने की तैयारी में हैं?

राजनीति: TMC की चार महिला सांसदों की भूपेंद्र यादव से कथित मुलाकात के बाद पार्टी में दलबदल की अटकलें तेज

द्वारा अनन्या अय्यरप्रकाशित 11 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
बगावत की सुगबुगाहट: क्या TMC की चार महिला सांसद BJP में शामिल होने की तैयारी में हैं?
बगावत की सुगबुगाहट: क्या TMC की चार महिला सांसद BJP में शामिल होने की तैयारी में हैं?

दिल्ली में हुई एक गुप्त मुलाकात की खबरों ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) में दलबदल की अटकलों को हवा दे दी है, जिससे पार्टी में सियासी हलचल तेज हो गई है।

दिल्ली के सत्ता के गलियारों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बदलते समीकरणों की चर्चा जोरों पर है। सप्ताह के मध्य में, राष्ट्रीय राजधानी में यह खबर फैली कि TMC की चार प्रमुख महिला सांसद—सायनी घोष, मिताली बाग, माला रॉय और प्रतिमा मंडल—ने कथित तौर पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की है। इस मुलाकात में पश्चिम बंगाल के BJP नेता सुवेंदु अधिकारी की मौजूदगी की खबरों ने उस पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जो पहले से ही अपने घर को संभालने में जुटी है।

इसका असर तुरंत देखने को मिला, हालांकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। जहां राजनीतिक गलियारों में दलबदल की चर्चाएं गर्म हैं, वहीं प्रतिमा मंडल के खंडन ने इस कहानी पर विराम लगाने की कोशिश की है। 4 जून से कोलकाता में मौजूद प्रतिमा मंडल ने स्पष्ट रूप से दिल्ली जाने या किसी भी ऐसी बैठक में शामिल होने से इनकार किया है। उनका यह खंडन दिखाता है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में अफवाहें कितनी तेजी से फैलती हैं, जहां वफादारी बदलने की चर्चाएं अक्सर तथ्यों से आगे निकल जाती हैं।

असंतोष का दौर

यह कथित मुलाकात कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि TMC के भीतर चल रही व्यापक और व्यवस्थित बेचैनी का संकेत है। पिछले कुछ हफ्तों में, पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के दूर होने और इस्तीफे की खबरों ने इसे हिलाकर रख दिया है। सुखेन्दु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और काकोली घोष दस्तीदार जैसे नाम लगातार चर्चाओं में हैं, क्योंकि पार्टी एक स्पष्ट दरार से जूझ रही है। भले ही कीर्ति आजाद, कल्याण बनर्जी और अभिषेक बनर्जी जैसे नेता ममता बनर्जी के प्रति अपनी अटूट निष्ठा बनाए हुए हैं, लेकिन इन 'दलबदल की अफवाहों' की आवृत्ति यह बताती है कि पार्टी की आंतरिक मशीनरी भारी दबाव में है।

इस राजनीतिक माहौल की तीव्रता का अंदाजा पुराने चुनावी नारों के फिर से सामने आने से लगाया जा सकता है। सोशल मीडिया पर सायनी घोष के पुराने चुनावी गानों के क्लिप्स वायरल हो रहे हैं, जो यह याद दिलाते हैं कि पश्चिम बंगाल की अस्थिर राजनीति में राजनीतिक किस्मत और निष्ठाएं कितनी तेजी से बदल सकती हैं।

यह क्यों मायने रखता है

यह उथल-पुथल सिर्फ पाला बदलने वाले नेताओं की सूची नहीं है; यह TMC की संगठनात्मक स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। जब सांसद BJP के वरिष्ठ मंत्रियों के साथ देखे जाते हैं, तो यह एक 'परसेप्शन ट्रैप' (धारणा का जाल) पैदा करता है। भले ही ये मुलाकातें प्रशासनिक या संयोगवश हों, लेकिन ये विरोधियों को पार्टी की कमजोरी और कार्यकर्ताओं को अनिश्चितता का संकेत देती हैं। BJP के लिए इस नैरेटिव को हवा देना TMC के आधार को कमजोर करने का काम करता है, जबकि TMC के लिए इन खबरों को न रोक पाना आंतरिक संचार और वफादारी प्रबंधन में विफलता को दर्शाता है। जैसे-जैसे दबाव बढ़ रहा है, पार्टी के लिए एकजुट चेहरा बनाए रखना उसकी सबसे बड़ी चुनावी चुनौती बन गया है।

ये मुलाकातें वास्तव में कोई 'बगावत' हैं या चुनाव से पहले की सामान्य हलचल, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन यह स्पष्ट है कि कोलकाता में पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व अब विपक्ष का मुकाबला करने से ज्यादा अपने ही सदस्यों को संभालने में समय बिताने के लिए मजबूर है।

द्वारा अनन्या अय्यर
वैश्विक मामले संवाददाता

अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।