जब वर्ल्ड कप का हीरो बाहर हो जाए: संजू सैमसन को टीम से बाहर करने का अजीब मामला
मैच विनर को जगह क्यों नहीं? यह फैसला हैरान करने वाला है: अजिंक्य रहाणे
अजिंक्य रहाणे उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने आगामी जिम्बाब्वे दौरे के लिए टी20 मैच-विनर को टीम से बाहर करने के टीम मैनेजमेंट के फैसले पर सवाल उठाए हैं।
भारतीय टीम के जिम्बाब्वे दौरे के लिए हाल ही में हुई टीम की घोषणा ने केवल खिलाड़ियों के रोटेशन पर ही नहीं, बल्कि कई अन्य सवालों को भी जन्म दिया है। हरारे में होने वाली तीन मैचों की टी20 सीरीज के लिए चुने गए 15 खिलाड़ियों में संजू सैमसन का नाम न होना चर्चा का विषय बना हुआ है। भारत को 2026 ICC टी20 वर्ल्ड कप जिताने में अहम भूमिका निभाने वाले इस विकेटकीपर-बल्लेबाज को बाहर किए जाने से प्रशंसक और पूर्व खिलाड़ी हैरान हैं और इस रणनीतिक बदलाव के पीछे का तर्क जानना चाहते हैं।
पारदर्शिता की मांग
अपने शांत स्वभाव के लिए जाने जाने वाले अजिंक्य रहाणे ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए इस फैसले पर हैरानी जताई है। रहाणे की आलोचना सिर्फ टीम चयन को लेकर नहीं, बल्कि पारदर्शिता की कमी को लेकर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि चयनकर्ताओं ने खिलाड़ी के साथ स्पष्ट बातचीत की होगी। रहाणे का मानना है कि हाल ही में वर्ल्ड कप जिताने वाले 'हीरो' को बाहर करना समझ से परे है। उनके लिए यह मुद्दा सीधे तौर पर संवाद का है—वे चाहते हैं कि चयन समिति और खिलाड़ियों के बीच एक बेहतर तालमेल हो ताकि खिलाड़ी टीम की दीर्घकालिक योजनाओं में अपनी स्थिति को समझ सकें।
बदली हुई टीम
23, 25 और 26 जुलाई को होने वाली इस सीरीज के लिए चुनी गई टीम इंग्लैंड सीरीज में खेल रही टीम से काफी अलग है। छह बड़े बदलावों के साथ चयनकर्ताओं ने एक नई टीम तैयार की है। सैमसन के अलावा अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा, वाशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई और प्रसिद्ध कृष्णा जैसे नाम भी टीम में नहीं हैं। इनकी जगह रिंकू सिंह, हर्ष दुबे, अशोक शर्मा, यश ठाकुर, मयंक यादव और प्रभसिमरन सिंह को कप्तान श्रेयस अय्यर के नेतृत्व में मौका दिया गया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
यह पूरा मामला भारतीय क्रिकेट के उस पुराने संघर्ष को दर्शाता है, जहां नई प्रतिभाओं को मौका देने और स्थापित मैच-विनर्स की लय को बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो जाता है। हालांकि युवा खिलाड़ियों को शामिल करना टीम निर्माण की एक प्राथमिक रणनीति है, लेकिन यह अक्सर चयन नीतियों की निरंतरता पर सवाल खड़े करता है। जब कोई खिलाड़ी सबसे बड़े मंच पर प्रदर्शन करता है और तुरंत उसे दरकिनार कर दिया जाता है, तो इससे अनिश्चितता का माहौल बनता है। चयनकर्ता स्पष्ट रूप से टीम की गहराई को परखना चाहते हैं, लेकिन ऐसा करने में वे उन मुख्य खिलाड़ियों को खोने का जोखिम उठा रहे हैं जिन्होंने दबाव में खुद को साबित किया है। यह एक सोची-समझी विश्राम नीति है या किसी अलग कौशल सेट को प्राथमिकता देने का संकेत, यह आने वाला समय ही बताएगा।
प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।