भारत में WhatsApp ने 'यूजरनेम' फीचर की लॉन्चिंग रोकी, सरकार की सुरक्षा चिंताओं के बाद लिया फैसला
WhatsApp को नोटिस का जवाब देने के लिए मिला अतिरिक्त समय, बातचीत पूरी होने तक भारत में फीचर लॉन्च न करने का दिया भरोसा

Meta को केंद्र सरकार के नोटिस का जवाब देने के लिए कुछ दिनों का अतिरिक्त समय मिल गया है। IT मंत्रालय इस फीचर के जरिए धोखाधड़ी, फिशिंग और फर्जीवाड़े के संभावित खतरों की बारीकी से जांच कर रहा है।
भारत में प्राइवेसी-फर्स्ट मैसेजिंग का परिदृश्य एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। करोड़ों लोगों के लिए दैनिक संचार का पर्याय बन चुके Meta के WhatsApp को अपने प्रस्तावित 'यूजरनेम' फीचर को लेकर नियामक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। मूल रूप से इस फीचर का उद्देश्य यूजर्स को फोन नंबर साझा किए बिना एक-दूसरे से जुड़ने की सुविधा देना था, लेकिन अब इसकी लॉन्चिंग रोक दी गई है। पिछले हफ्ते केंद्र सरकार द्वारा जारी एक सख्त नोटिस के बाद, टेक दिग्गज को अपना औपचारिक जवाब दाखिल करने के लिए तीन दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है। कंपनी ने पुष्टि की है कि जब तक सरकार के साथ चल रही बातचीत किसी समाधान तक नहीं पहुंच जाती, तब तक वह इस फीचर को भारत में सक्रिय नहीं करेगी।
सुरक्षा को लेकर खींचतान
सरकार का यह हस्तक्षेप इस गहरी चिंता से उपजा है कि गुमनामी (anonymity) का गलत इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है। अपने नोटिस में, IT मंत्रालय ने आगाह किया है कि यूजरनेम फीचर 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम, फिशिंग प्रयासों और फर्जीवाड़े की घटनाओं को बढ़ावा दे सकता है। मंत्रालय को डर है कि अकाउंट को फोन नंबर से अलग करने पर प्लेटफॉर्म की मौजूदा जवाबदेही तंत्र कमजोर हो सकता है, जिससे IT एक्ट के तहत सोशल मीडिया मध्यस्थों के लिए अनिवार्य 'ड्यू डिलिजेंस' (उचित सावधानी) के नियमों को लागू करना मुश्किल हो जाएगा।
पिछले बुधवार को जब यह नोटिस मिला, तो इसने Meta और मंत्रालय के बीच बातचीत का रास्ता खोल दिया। कंपनी का प्रतिनिधित्व करने वाली एक टीम ने शुक्रवार को सरकारी अधिकारियों से मुलाकात कर अपना पक्ष स्पष्ट किया। हालांकि प्लेटफॉर्म का कहना है कि इस फीचर को सुरक्षा की कई परतों के साथ डिजाइन किया गया है—जिसमें सार्वजनिक हस्तियों और सरकारी संस्थाओं के नाम सुरक्षित रखना शामिल है ताकि स्पूफिंग से बचा जा सके—लेकिन सरकार अभी भी आश्वस्त नहीं है। आधिकारिक चिंता का मुख्य बिंदु यह है कि क्या ये सुरक्षा उपाय आम यूजर को साइबर अपराधों से बचाने के लिए पर्याप्त हैं, खासकर ऐसे माहौल में जहां डिजिटल धोखाधड़ी पहले से ही बढ़ रही है।
यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर
यह गतिरोध केवल एक नए फीचर के बारे में नहीं है; यह सिलिकॉन वैली की 'यूजर प्राइवेसी' की मांग और नई दिल्ली की 'डिजिटल सुरक्षा' की प्राथमिकता के बीच बढ़ते टकराव को दर्शाता है। भारत सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि 'प्राइवेसी' को ढाल बनाकर प्लेटफॉर्म अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते। Meta के लिए चुनौती ऐसे उत्पाद पेश करना है जो IT मंत्रालय की सख्त और बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप हों। यदि WhatsApp भविष्य में इसे लॉन्च करने की अनुमति हासिल कर लेता है, तो यह संभवतः कड़ी निगरानी के ढांचे के तहत होगा, जो देश में भविष्य के संचार फीचर्स की जांच के लिए एक मिसाल कायम करेगा।
फिलहाल, स्थिति यथावत है। जो यूजर्स इस अपडेट का इंतजार कर रहे थे, उन्हें अभी और इंतजार करना होगा, क्योंकि प्लेटफॉर्म ने मंत्रालय की संतुष्टि तक इस टूल को ऑफलाइन रखने का वादा किया है। समय सीमा तीन दिन बढ़ जाने के बाद, अब होने वाली बातचीत बेहद महत्वपूर्ण होगी। यह देखना बाकी है कि क्या इससे फीचर का संशोधित संस्करण सामने आएगा या फिर इसके सुरक्षा ढांचे को पूरी तरह से फिर से तैयार किया जाएगा।
अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।