दिल्ली आ रहे हैं वांग यी: ब्रिक्स सुरक्षा बैठक से भारत-चीन संबंधों में जमी बर्फ पिघलने के आसार
चीन के विदेश मंत्री वांग यी अगले हफ्ते ब्रिक्स सुरक्षा बैठक के लिए भारत आएंगे

चीनी विदेश मंत्री की यह आगामी यात्रा सितंबर में होने वाले महत्वपूर्ण ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले कूटनीतिक संबंधों को सुधारने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
साउथ ब्लॉक के गलियारों में अगले हफ्ते एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिलेगी, क्योंकि चीन के शीर्ष राजनयिक और विदेश मामलों के केंद्रीय आयोग के कार्यालय के निदेशक वांग यी नई दिल्ली पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं। 22-23 जून के लिए निर्धारित उनकी यह यात्रा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के निमंत्रण पर ब्रिक्स की एक उच्च-स्तरीय सुरक्षा बैठक के लिए हो रही है। लगभग एक साल में वांग की यह पहली भारत यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने के एक सधे हुए प्रयास का संकेत देती है।
इस यात्रा का समय महज एक संयोग नहीं है। हालांकि वांग ने पिछले महीने भारत द्वारा आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा नहीं लिया था—जिसका कारण कथित तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा के साथ कार्यक्रम का टकराव था—लेकिन अब उनकी उपस्थिति यह दर्शाती है कि चीन इस मंच को कितनी रणनीतिक अहमियत देता है। चूंकि भारत वर्तमान में इस समूह की अध्यक्षता कर रहा है, इसलिए यह बैठक सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए एक महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगी, जिसमें शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन के शामिल होने की उम्मीद है।
एक सधी हुई कूटनीतिक चाल
बीजिंग से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बैठक का एजेंडा काफी व्यापक है। उम्मीद है कि वांग अपने समकक्षों के साथ अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य पर चर्चा करेंगे, जिसमें पारंपरिक खतरों के साथ-साथ उन 'गैर-पारंपरिक' सुरक्षा चुनौतियों पर भी बात होगी जो वैश्विक विमर्श में तेजी से हावी हो रही हैं। प्रवक्ता लिन जियान ने इस यात्रा को 'ग्लोबल साउथ' के भीतर राजनीतिक समन्वय को मजबूत करने की एक बड़ी मुहिम का हिस्सा बताया है और ब्रिक्स ढांचे को बहुपक्षीय सहयोग के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में पेश किया है।
पर्दे के पीछे, कूटनीतिक स्तर पर उम्मीदों को नियंत्रित करने का काम चल रहा है। हालांकि यात्रा कार्यक्रम से जुड़े सूत्रों ने पुष्टि की है कि वांग बैठक से इतर अजीत डोभाल और अन्य मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय चर्चा करेंगे, लेकिन इस बात के कोई संकेत नहीं हैं कि दोनों पक्ष सीमा वार्ता के लिए 'विशेष प्रतिनिधि' तंत्र को सक्रिय करेंगे। फिलहाल ध्यान लंबे समय से चले आ रहे संरचनात्मक विवादों के त्वरित समाधान के बजाय स्थिरता बनाए रखने और कार्यात्मक सहयोग पर केंद्रित है।
यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर
इस यात्रा का महत्व इसके समय में निहित है। तेजी से बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक माहौल के बीच—जिसे बीजिंग 'परिवर्तनशील और अस्थिर' दुनिया कहता है—नई दिल्ली और बीजिंग दोनों ही एक नाजुक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। भारत के लिए चुनौती एक प्रभावी ब्रिक्स मंच का नेतृत्व करना है जो अपने राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाए और साथ ही अपने उत्तरी पड़ोसी के साथ संबंधों की जटिलताओं को भी संभाले।
चीन के लिए, यह यात्रा इस बात की याद दिलाती है कि व्यापक क्षेत्रीय तनाव के बावजूद बातचीत की आवश्यकता सर्वोपरि है। नई दिल्ली आकर वांग यह संकेत दे रहे हैं कि बीजिंग संचार के रास्ते खुले रखने का इच्छुक है, खासकर ऐसे समय में जब 'ग्लोबल साउथ' वैश्विक शासन में अपनी अधिक न्यायसंगत आवाज के लिए ब्रिक्स समूह की ओर देख रहा है। यह यात्रा दो एशियाई दिग्गजों के बीच के मूलभूत मतभेदों को भले ही हल न करे, लेकिन यह सुनिश्चित करने के लिए एक आवश्यक कदम है कि वर्तमान दौर की अस्थिरता पूरी तरह से कूटनीतिक गतिरोध में न बदल जाए।
अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।