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विजाग स्टील प्लांट हादसा: पिघली धातु के विस्फोट में आठ की मौत, छह की हालत गंभीर

राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के प्लांट में विस्फोट के बाद 8 लोगों की मौत, 6 गंभीर

द्वारा विश्व डेस्कप्रकाशित 9 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
विजाग स्टील प्लांट हादसा: पिघली धातु के विस्फोट में आठ की मौत, छह की हालत गंभीर
विजाग स्टील प्लांट हादसा: पिघली धातु के विस्फोट में आठ की मौत, छह की हालत गंभीर

विशाखापत्तनम स्थित राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) की इकाई में हुए एक भीषण विस्फोट ने आठ लोगों की जान ले ली है, जिसके बाद औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

सोमवार शाम विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में सन्नाटा तब टूट गया जब शाम 4:40 बजे स्टील मेल्टिंग शॉप में पिघला हुआ स्टील ले जा रही एक 'लेडल' (कड़ाही) फट गई। विस्फोट के साथ ही 1,600 डिग्री सेल्सियस तक गर्म तरल धातु का सैलाब उमड़ पड़ा, जिससे भीषण आग लग गई और श्रमिक घने धुएं और झुलसा देने वाली गर्मी के बीच फंस गए। जब तक आपातकालीन दल मुख्य विस्फोट क्षेत्र तक पहुंच पाते, तब तक आठ श्रमिकों—जिनमें पांच नियमित कर्मचारी और तीन अनुबंध श्रमिक शामिल थे, जिनमें एक प्रबंधक स्तर का अधिकारी भी था—की मौत हो चुकी थी।

आग की तीव्रता और पिघली धातु के फैलाव के कारण बचाव कार्य घंटों तक बाधित रहा। 108 एम्बुलेंस सेवाओं के जिला प्रबंधक एम. सुरेश ने पुष्टि की कि घायलों को निकालने के लिए बचाव दलों को बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। छह जीवित बचे लोगों को शहर के प्रमुख अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जो 40% से 90% तक झुलस गए हैं। पीड़ितों की पहचान आर. मल्लिकार्जुन राव, पी. श्रीनिवास राव, ए. अप्पा राव, सत्यनारायण, जी. सुरीबाबू और पैदीराजू के रूप में हुई है।

आधिकारिक प्रतिक्रिया

जिला कलेक्टर एम. अभिषेक किशोर ने पीड़ितों के परिवारों की सहायता के लिए कलेक्ट्रेट में 24x7 कंट्रोल रूम स्थापित किया है। इस त्रासदी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से ₹2 लाख की अनुग्रह राशि की घोषणा की। इसके अलावा, अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस औद्योगिक आपदा से तबाह हुए परिवारों की मदद के लिए ₹25 लाख की आर्थिक सहायता और मृतकों के परिजनों को नौकरी देने जैसे मुआवजे के पैकेज की व्यवस्था की जा रही है।

यह महत्वपूर्ण क्यों है: औद्योगिक जोखिम का साया

राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) प्लांट की यह त्रासदी भारत के भारी औद्योगिक क्षेत्र में मौजूद उच्च जोखिम वाले वातावरण की एक भयावह याद दिलाती है। तत्काल दुख के अलावा, यह घटना उपकरणों के रखरखाव और उच्च-ताप वाले क्षेत्रों में सुरक्षा प्रोटोकॉल की सख्ती पर अनिवार्य सवाल खड़े करती है। जब पिघले हुए स्टील की बात आती है, तो गलती की कोई गुंजाइश नहीं होती; लेडल या क्रेन में कोई भी यांत्रिक खराबी कार्यस्थल को सेकंडों में मौत के जाल में बदल सकती है। जैसे-जैसे जांचकर्ता अपनी पड़ताल शुरू करेंगे, ध्यान इस बात पर केंद्रित होगा कि क्या प्लांट के पुराने बुनियादी ढांचे को उसकी क्षमता से अधिक काम में लिया जा रहा था, या निगरानी में हुई किसी चूक ने इस घातक जोखिम को तब तक नजरअंदाज किया जब तक कि बहुत देर नहीं हो गई। ऐसी दुर्घटनाएं हमारे औद्योगिक परिदृश्य का हिस्सा न बनें, यह सुनिश्चित करना नियामकों के लिए एक बड़ी चुनौती है।

द्वारा विश्व डेस्क
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