तिलक, आर्या और कुशाग्र के दम पर दांबुला में इंडिया ए का विशाल स्कोर
तिलक, आर्या और कुशाग्र की अर्धशतकीय पारियों की बदौलत इंडिया ए ने अफगानिस्तान ए के खिलाफ बनाए 319/9 | हिंदुस्तान टाइम्स
इन तीनों बल्लेबाजों की शानदार अर्धशतकीय पारियों ने इंडिया ए को ट्राई-सीरीज के फाइनल में पहुंचाने के लिए एक मजबूत मंच तैयार किया।
दांबुला की पिच भले ही धीमी रही हो, लेकिन बुधवार को भारतीय शीर्ष क्रम ने रन गति को थमने नहीं दिया। ट्राई-सीरीज के एक महत्वपूर्ण मुकाबले में कप्तान तिलक वर्मा ने प्रियांश आर्या और कुमार कुशाग्र के साथ मिलकर बेहतरीन अर्धशतक जड़े और इंडिया ए को 319 रन के विशाल स्कोर तक पहुंचाया। यह प्रदर्शन टीम की गहराई को दर्शाता है, जिसने साबित किया कि वे आक्रामक शुरुआत के बाद मध्य ओवरों में संभलकर खेलने की क्षमता रखते हैं।
वैभव सूर्यवंशी और प्रियांश आर्या ने बिना समय गंवाए केवल आठ ओवरों में 75 रनों की ओपनिंग साझेदारी की। 15 वर्षीय प्रतिभाशाली खिलाड़ी सूर्यवंशी अपने ट्रेडमार्क कवर ड्राइव्स के साथ लय में दिखे, हालांकि फरीदून दावूदजई की गेंद पर उनका पुल शॉट खेलकर आउट होना इस स्तर पर सीखने की प्रक्रिया की एक कड़ी याद दिला गया। वहीं, आर्या शानदार फॉर्म में थे और उन्होंने महज 29 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया, जिसके बाद वे पॉइंट पर एक कैच आउट हो गए।
मध्य ओवरों का संघर्ष
पावरप्ले की आक्रामक शुरुआत के बाद दांबुला की पिच का असली रंग सामने आया। गेंद बल्ले पर सही से नहीं आ रही थी और रन गति, जो आठ के ऊपर थी, काफी गिर गई। मध्य ओवरों में तिलक वर्मा और ऋतुराज गायकवाड़ को काफी संघर्ष करना पड़ा, जहां बाउंड्री लगाना मुश्किल हो गया था। लेग साइड पर एक मामूली एज के बाद गायकवाड़ के आउट होने से ड्रेसिंग रूम पर दबाव बढ़ गया था।
ऐसे में तिलक और कुशाग्र ने जिम्मेदारी संभाली और 104 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी कर पारी को संवारा। हालांकि वे लगातार बाउंड्री नहीं लगा पा रहे थे, लेकिन स्ट्राइक रोटेट करने की उनकी क्षमता ने स्कोरबोर्ड को चालू रखा और टीम को बड़े पतन से बचा लिया। कुशाग्र की 60 गेंदों में अर्धशतकीय पारी और तिलक के धैर्यपूर्ण 67 गेंदों के प्रयास ने सुनिश्चित किया कि अफगानिस्तान ए के गेंदबाजों के दबाव बनाने के बावजूद भारत मुकाबले में बना रहे। अंत में विपराज निगम की छोटी लेकिन तेज पारी ने टीम को 300 रन के पार पहुंचाने में मदद की।
यह जीत क्यों मायने रखती है
यह जीत सिर्फ एक और जीत नहीं है; यह उस मजबूत प्रतिभा पाइपलाइन को दर्शाती है जो वर्तमान में राष्ट्रीय टीम को तैयार कर रही है। भारत के लिए, धीमी और सूखी पिच पर खुद को ढालना एक ऐसी कला है जिसकी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अक्सर परीक्षा होती है। ट्राई-सीरीज के फाइनल में जगह बनाकर टीम ने साबित कर दिया है कि वे परिस्थितियों के अनुसार आक्रामक बल्लेबाजी से लेकर संभलकर खेलने तक की रणनीति अपना सकते हैं। यह युवा खिलाड़ियों के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाला है, जो यह साबित करता है कि वे दबाव वाले मैचों में भी टीम को संभाल सकते हैं और विदेशी परिस्थितियों में भी स्कोर का बचाव कर सकते हैं।
कबीर शर्मा पॉलिटिकलपीडिया के लिए संस्कृति, तकनीक और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर लिखते हैं।