धर्मन तक का उतार-चढ़ाव भरा सफर: रजनीकांत-कमल हासन के कोलैबोरेशन के पीछे की कहानी
धर्मन: रजनीकांत ने बताया कि क्यों कमल हासन के साथ उनकी फिल्म में 3 बार निर्देशक बदले गए और अंत में अश्वथ मारिमुथु को क्यों चुना गया | हिंदुस्तान टाइम्स
तीन निर्देशकों के बदलाव और कई उतार-चढ़ावों के बाद, रजनीकांत अभिनीत फिल्म 'धर्मन' को आखिरकार अश्वथ मारिमुथु के रूप में अपना निर्देशक मिल गया है।
चेन्नई फिल्म उद्योग के दबाव भरे गलियारों में, बहुत कम प्रोजेक्ट्स ऐसे होते हैं जिन पर इतना अधिक भार हो—या जिनकी शुरुआत इतनी बार अटकी हो—जितनी कि भारतीय सिनेमा के दो सबसे बड़े दिग्गजों के इस नए कोलैबोरेशन पर है। कमल हासन की 'राज कमल फिल्म्स इंटरनेशनल' द्वारा निर्मित आगामी फिल्म धर्मन के लिए आखिरकार अश्वथ मारिमुथु को फाइनल कर लिया गया है। हालांकि, रजनीकांत के लिए इस मुकाम तक पहुंचना उन रचनात्मक बाधाओं को स्वीकार करने जैसा था, जिन्होंने महीनों तक इस प्रोजेक्ट को रोक कर रखा था।
सुपरस्टार ने हाल ही में उन निर्देशकों के बारे में चुप्पी तोड़ी है जो मारिमुथु के आने से पहले इस प्रोजेक्ट से जुड़े थे। प्रोडक्शन टीम ने शुरुआत में केएस रविकुमार पर विचार किया था, लेकिन वह साझेदारी सफल नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने सुंदर सी का रुख किया, जो अंततः अपनी अन्य प्रोडक्शन प्रतिबद्धताओं के कारण अलग हो गए। तीसरा विकल्प, सिबी चक्रवर्ती, शायद सबसे कठिन था जिसे छोड़ना पड़ा। रजनीकांत ने खुलासा किया कि सिबी ने एक परमाणु वैज्ञानिक के बारे में एक दिलचस्प और हाई-कांसेप्ट कहानी सुनाई थी, जिसे रूस और अफगानिस्तान में शूट करने की योजना थी। हालांकि सुपरस्टार ने स्क्रिप्ट की गुणवत्ता की सराहना की, लेकिन विषय की संवेदनशीलता और इसमें लगने वाला लंबा समय इसे वर्तमान शेड्यूल के लिए एक अव्यावहारिक दांव बनाता था।
"डेडली डॉक्टर" के लिए एक नया विजन
ओह माय कडावुले और ड्रैगन के लिए मशहूर अश्वथ मारिमुथु अब इस प्रोजेक्ट की कमान संभाल रहे हैं। यह बदलाव आपसी सम्मान का प्रतीक है; मारिमुथु ने बताया कि कैसे रजनीकांत के एक छोटे से वॉयस नोट ने—जिसमें स्पष्ट निर्देश था कि "हमें हर हाल में जीतना है"—उनके सहयोग की नींव रखी। यह एक महत्वपूर्ण विवरण है जो दर्शाता है कि दशकों तक इंडस्ट्री में रहने के बावजूद, यह जोड़ी बॉक्स ऑफिस की प्रतिस्पर्धा को लेकर कितनी गंभीर है।
धर्मन फिल्म के फर्स्ट-लुक पोस्टर ने पहले ही इंटरनेट पर धूम मचा दी है, जो स्टार-केंद्रित फिल्मों के सामान्य सौंदर्य से काफी अलग है। रजनीकांत को एक "डेडली डॉक्टर" की भूमिका में देखा जा सकता है, जो सर्जिकल स्क्रब पहने हुए हैं और उनके हाथ में खून से सना स्कैलपेल है। सिमरन और राशि खन्ना के इस फिल्म में जुड़ने से यह स्पष्ट है कि प्रोजेक्ट एक डार्क और इंटेंस नैरेटिव की ओर बढ़ रहा है।
यह क्यों मायने रखता है: बदलाव की शक्ति
इस प्रोजेक्ट का सफर आधुनिक तमिल सिनेमा की कार्यप्रणाली को परिभाषित करने वाले व्यावहारिकता का एक बेहतरीन उदाहरण है। ऐसे दौर में जब स्टार-स्टडेड फिल्मों की प्रशंसकों और ट्रेड एनालिस्ट्स द्वारा बारीकी से जांच की जाती है, सिबी द्वारा प्रस्तावित परमाणु थ्रिलर जैसी हाई-कांसेप्ट स्क्रिप्ट को छोड़कर एक अधिक व्यावहारिक रचनात्मक दिशा चुनना बहुत कुछ कहता है। यह दर्शाता है कि रजनीकांत और कमल हासन जैसे दिग्गज भी प्रोडक्शन चक्र की वास्तविकता और "स्टार मशीन" को सुचारू रूप से चलाने की आवश्यकता से बंधे हैं।
इंडस्ट्री के लिए, धर्मन की कहानी यह याद दिलाती है कि सबसे महत्वाकांक्षी फिल्में अक्सर वही होती हैं जो प्री-प्रोडक्शन के सबसे कठिन दौर से गुजरती हैं। आखिरकार एक ऐसे निर्देशक को चुनकर जो उनके विजन के अनुरूप है, टीम ने उन प्रशासनिक देरी से पार पा लिया है जिसने पहले हिंदुस्तान टाइम्स और अन्य मीडिया आउटलेट्स की सुर्खियां बटोरी थीं। क्या यह "डेडली डॉक्टर" वाली कहानी दर्शकों को पसंद आएगी, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन सेट तक पहुंचने का सफर किसी पटकथा से कम नाटकीय नहीं रहा है।
प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।