तारातला हादसा और ‘बॉबी की काली’ का साया: कोलकाता नगर निगम पर गहराया संकट
कोलकाता नगर निगम से हिरासत में लिए गए बॉबी के ‘काली’, क्या फिरहाद को वाकई कुछ नहीं पता था?
पूर्व मेयर के करीबी सहयोगी कालीचरण की हिरासत ने एक राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है, जिससे कोलकाता में प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर असहज सवाल उठ रहे हैं।
तारातला में एक गोदाम के ढहने की घटना ने न केवल शहरी बुनियादी ढांचे की कमजोरी को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि कोलकाता नगर निगम (KMC) कथित तौर पर कैसे काम करता है। इस हादसे के बाद, कालीचरण—जिन्हें नौकरशाही के गलियारों में लंबे समय से पूर्व मेयर फिरहाद ‘बॉबी’ हकीम के OSD (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) के रूप में जाना जाता है—को हिरासत में ले लिया गया है। वर्षों से KMC के सत्ता के गलियारों में यह चर्चा थी कि कालीचरण की मंजूरी के बिना किसी भी बिल्डिंग प्लान को ‘ग्रीन सिग्नल’ नहीं मिल सकता था। अब, इस महत्वपूर्ण व्यक्ति की गिरफ्तारी ने सीधे पूर्व मेयर पर ही सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
विधानसभा सत्र के दौरान, सुवेंदु अधिकारी ने उन दस्तावेजों को पेश करके संकट को और बढ़ा दिया, जिन पर कथित तौर पर तारातला के उस कुख्यात गोदाम के प्लान को मंजूरी देने के लिए फिरहाद हकीम के हस्ताक्षर हैं। अधिकारी का यह कदम सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था: पूर्व मेयर को सीधे मंजूरी प्रक्रिया से जोड़कर और उनके सहयोगी के बेलगाम प्रभाव को उजागर करके, विपक्ष ने एक ढांचागत विफलता को एक बड़े राजनीतिक हमले में बदल दिया है।
इसका तत्काल असर यह हुआ है कि अधीर रंजन चौधरी ने इस आपदा पर 'श्वेत पत्र' (White Paper) जारी करने की मांग की है। उन्होंने अवैध निर्माण सिंडिकेट और नगर निगम के अधिकारियों के बीच सांठगांठ का खुला आरोप लगाया है। हालांकि जांच जारी है, लेकिन यह स्थिति सरकार के लिए बेहद नुकसानदेह है। सत्ता के गलियारों में अब मुख्य सवाल यह है कि क्या पूर्व मेयर वास्तव में अपने कार्यालय के इर्द-गिर्द पनपी ‘गेटकीपर’ संस्कृति से अनजान थे, या यह एक गहरी प्रणालीगत खराबी है जिसे राजनीतिक सुविधा के लिए नजरअंदाज किया गया?
बड़ी तस्वीर: यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है
यह केवल एक इमारत गिरने की कहानी नहीं है; यह नगर निगम के शासन का एक ऑडिट है। शहरी प्रशासन में, OSD की भूमिका अक्सर लिपिकीय कर्तव्यों से ऊपर उठकर अत्यधिक और अपारदर्शी प्रभाव वाले पद में बदल जाती है। जब ऐसी शक्ति बिना किसी निगरानी के केंद्रित हो जाती है, तो प्रशासनिक सुविधा और भ्रष्टाचार के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है।
इस घटना का राजनीतिक समय भी महत्वपूर्ण है। जैसे-जैसे राज्य भविष्य के औद्योगिक और आर्थिक बदलावों के लिए तैयार हो रहा है, नगर निगम मशीनरी की विश्वसनीयता कड़ी जांच के दायरे में है। यदि प्रशासन यह सुनिश्चित नहीं कर सकता कि बुनियादी बिल्डिंग कोड का पालन हो—और उन्हें लागू करने वाले जवाबदेह हों—तो ‘प्रगतिशील बंगाल’ का वादा अपनी ही बुनियादी सुविधाओं की गिरती हकीकत के साये में दबने का जोखिम उठाता है। सत्ताधारी दल के लिए चुनौती यह साबित करना है कि एक सहयोगी की गिरफ्तारी पारदर्शिता की दिशा में उठाया गया एक वास्तविक कदम है, न कि उच्च अधिकारियों को बचाने के लिए की गई एक रणनीतिक बलि।
जैसे-जैसे यह मामला आगे बढ़ रहा है, जनता यह सोच रही है कि इस कथित सांठगांठ की जड़ें कितनी गहरी हैं। बढ़ते राजनीतिक तापमान के साथ, तारातला घटना पर चर्चा मलबे से निकलकर राज्य की प्रशासनिक अखंडता के केंद्र तक पहुंच गई है। हालांकि कुणाल घोष जैसे चेहरे अक्सर अपने तीखे बयानों से मीडिया में छाए रहते हैं, लेकिन यह विशिष्ट संकट उन ढांचागत विफलताओं के गहन विश्लेषण की मांग करता है, जिसने KMC के भीतर ‘काली’ जैसे तंत्र को इतने लंबे समय तक फलने-फूलने दिया।
प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।