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शिवम दुबे का शानदार सफर: क्रिकेट छोड़ने से लेकर दो बार के T20 चैंपियन बनने तक की कहानी

शिवम दुबे की कहानी: ओवरवेट होने के कारण छोड़ा था क्रिकेट, फिर ऐसी की वापसी और बन गए दो बार के विश्व चैंपियन

द्वारा कबीर शर्माप्रकाशित 26 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
शिवम दुबे का शानदार सफर: क्रिकेट छोड़ने से लेकर दो बार के T20 चैंपियन बनने तक की कहानी
शिवम दुबे का शानदार सफर: क्रिकेट छोड़ने से लेकर दो बार के T20 चैंपियन बनने तक की कहानी

दृढ़ संकल्प और बदलाव की यह कहानी मुंबई में जन्मे उस ऑलराउंडर की है, जिसने 110 किलो के किशोर से वैश्विक क्रिकेट स्टार बनने तक का सफर तय किया। यह उनकी अटूट लगन का प्रमाण है।

14 साल की उम्र में शिवम दुबे के लिए पेशेवर क्रिकेटर बनने का सपना धुंधला होता दिख रहा था। आर्थिक तंगी के कारण पेशेवर कोचिंग उनके परिवार के लिए एक विलासिता थी, जिसे वे मुश्किल से ही उठा पा रहे थे। साथ ही, 110 किलो वजन के कारण उन्होंने खेल से दूरी बनाने का कठिन फैसला लिया। ज्यादातर युवा खिलाड़ियों के लिए यह अंत होता, लेकिन शिवम के लिए यह भारतीय क्रिकेट की सबसे प्रेरणादायक वापसी की शुरुआत थी।

वापसी का लंबा रास्ता

26 जून 1993 को जन्मे शिवम दुबे का परिवार उत्तर प्रदेश के भदोही से ताल्लुक रखता है। मुंबई में उनका शुरुआती जीवन पूरी तरह से क्रिकेट के इर्द-गिर्द रहा। उनके पिता राजेश, जो खुद एक पूर्व पहलवान थे, ने अपने बेटे के जुनून को पूरा करने के लिए घर के पीछे एक निजी पिच तक बनवाई थी। हालांकि, किशोरावस्था में उन्हें शारीरिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। मैदान से पांच साल की दूरी के बाद, 19 साल की उम्र में एक परिपक्व शिवम ने नए संकल्प के साथ नेट्स पर वापसी की। घोर अनुशासन के दम पर उन्होंने अपना वजन घटाकर 75 किलो किया और मुंबई क्रिकेट में अपनी पहचान बनानी शुरू की।

लचीलेपन से संवरा करियर

शिवम दुबे का सफर लगातार मील के पत्थरों से भरा रहा: 2016 में मुंबई के लिए T20 डेब्यू, जिसके बाद फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में उन्होंने एक सीम-बॉलिंग ऑलराउंडर के रूप में अपनी उपयोगिता साबित की। 2018 के IPL ऑक्शन ने उन्हें राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया, लेकिन 2022 से चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के साथ उनके जुड़ाव ने उनके करियर को नई दिशा दी। टीम मैनेजमेंट के समर्थन से वे एक 'स्पिन-बैशर' के रूप में उभरे, जिसने उन्हें भारतीय टीम का एक अनिवार्य हिस्सा बना दिया।

यह क्यों मायने रखता है

शिवम की सफलता आधुनिक खेलों में धैर्य के महत्व का एक बेहतरीन उदाहरण है। ऐसे दौर में जब खिलाड़ियों को कुछ खराब सीजन के बाद ही नकार दिया जाता है, उनका सफर दिखाता है कि शीर्ष प्रदर्शन हमेशा सीधा नहीं होता। मध्य ओवरों में पारी को संभालने और गेंद से महत्वपूर्ण विकेट निकालने की उनकी क्षमता ने उन्हें कठिन परिस्थितियों का विशेषज्ञ बना दिया। 2024 और 2026 T20 वर्ल्ड कप जीत में उनका योगदान—जहाँ उन्होंने निर्णायक और महत्वपूर्ण पारियां खेलीं—यह साबित करता है कि 'ऑलराउंडर' का टैग सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि ट्रॉफी जीतने के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता है।

वैश्विक पहचान

आज, एक निराश किशोर से दो बार के विश्व चैंपियन बनने तक के शिवम के सफर की चर्चा इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर खूब होती है। 2019 में बांग्लादेश के खिलाफ उनका अंतरराष्ट्रीय डेब्यू एक शुरुआत थी, लेकिन रोहित शर्मा के नेतृत्व में मिली निरंतरता और टीम की रणनीतिक बदलावों ने उनकी विरासत को पुख्ता किया। T20 इंटरनेशनल में 991 रन और 31 विकेट के साथ, उन्होंने साबित कर दिया है कि करियर की सबसे बड़ी बाधाएं ही अक्सर सबसे मजबूत खिलाड़ियों को गढ़ती हैं।

द्वारा कबीर शर्मा
फ़ीचर्स लेखक

कबीर शर्मा पॉलिटिकलपीडिया के लिए संस्कृति, तकनीक और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर लिखते हैं।