टेक ड्रीम का अंत: क्यों एक पूरी पीढ़ी कॉर्पोरेट सीढ़ी पर फिर से विचार कर रही है
मेटा की एक पूर्व कर्मचारी का मानना है कि AI उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से करियर को बदल रहा है
जैसे-जैसे बिग टेक कंपनियां ऑटोमेशन की ओर बढ़ रही हैं, युवा पेशेवर सिलिकॉन वैली के दिग्गजों की प्रतिष्ठा को छोड़कर एक ऐसे भविष्य की तलाश कर रहे हैं, जो 'रेट रेस' (चूहा दौड़) जैसा न लगे।
24 वर्षीय मोयान चेन के लिए, मंगलवार की रात का अनुष्ठान एक डरावनी उलटी गिनती बन गया था। मेटा में डेटा साइंटिस्ट के तौर पर काम करते हुए, उन्होंने ऑफिस में अपने आखिरी हफ्ते अपने सहयोगियों को गायब होते देखा और उस ईमेल का इंतजार किया जो उनकी खुद की विदाई की पुष्टि करता। जब मई में उन पर गाज गिरी, तो उन्हें वह सदमा नहीं लगा जिसकी उम्मीद थी। इसके बजाय, जैसा कि उन्होंने बिजनेस इनसाइडर को बताया, उन्हें एक अजीब सी, ठंडी राहत महसूस हुई। 'अनिश्चितता' के वे महीने—बेचैन बुधवार की सुबह और अज्ञात का डर—आखिरकार खत्म हो गए थे।
एंट्री-लेवल भूमिकाओं पर AI का साया
चेन का अनुभव केवल छंटनी की एक व्यक्तिगत कहानी नहीं है; यह जॉब मार्केट में आ रहे बड़े बदलाव का संकेत है। उन्हें यकीन है कि उनकी नौकरी उन्हीं उपकरणों की भेंट चढ़ गई, जिन्हें बनाने की दौड़ में उनका उद्योग लगा हुआ है। हालांकि एनवीडिया के जेनसेन हुआंग जैसे अधिकारी सुझाव देते हैं कि हमें 'नौकरियों और उपकरणों' को एक नहीं समझना चाहिए, लेकिन जूनियर स्टाफ के लिए जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। ओपनएआई (OpenAI) की कोडिंग कार्यों के ऑटोमेशन को लेकर दी गई चेतावनियों से लेकर आईएलओ (ILO) की उन रिपोर्टों तक, जिनमें कहा गया है कि वैश्विक नौकरियों का 30% हिस्सा जेनरेटिव एआई के प्रभाव में है, 'व्हाइट-कॉलर बायपास' युवा पेशेवरों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।
स्थिरता का वह वादा, जो कभी टेक दिग्गज में करियर की पहचान हुआ करता था, अब टूट रहा है। उस पीढ़ी के लिए जिसने मेटा या ऐसी अन्य कंपनियों में इंटर्नशिप को सफलता का अंतिम पड़ाव माना, अब यह धारणा फीकी पड़ गई है। चेन के कई पूर्व सहयोगी अब सक्रिय रूप से अपना रास्ता बदल रहे हैं। वे ऐसे क्षेत्रों की तलाश कर रहे हैं जो एआई-संचालित वर्कफ़्लो को अपनाने में धीमे हैं, इस उम्मीद में कि उन्हें एक ऐसी जगह मिल सके जहां मानवीय निर्णय आज भी एल्गोरिदम के आउटपुट से अधिक महत्वपूर्ण हैं।
यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर
टेक सेक्टर में आई सुस्ती केवल भर्ती में अस्थायी गिरावट नहीं है। यह 'कॉर्पोरेट लैडर' (कॉर्पोरेट सीढ़ी) मॉडल का मौलिक पुनर्मूल्यांकन है। वर्षों तक, उद्योग इस धारणा पर फला-फूला कि अनंत विकास एक लगातार बढ़ते कार्यबल को बनाए रखेगा। अब, जब मेटा जैसी कंपनियां बार-बार छंटनी कर रही हैं—जिसमें से कुछ नई तकनीक से मिलने वाली दक्षता का हवाला देती हैं—तो नियोक्ता और कर्मचारी के बीच का मनोवैज्ञानिक अनुबंध टूट गया है।
इसके व्यापक निहितार्थ चिंताजनक हैं। यदि एंट्री-लेवल भूमिकाएं ऑटोमेशन की पहली शिकार बनी रहीं, तो हम एक 'प्रशिक्षण अंतराल' (ट्रेनिंग गैप) का सामना करेंगे। यदि सीढ़ी के शुरुआती पायदान ही ऑटोमेट हो जाएंगे, तो वरिष्ठ नेतृत्व की अगली पीढ़ी अपना बुनियादी अनुभव कहां से हासिल करेगी? जैसे-जैसे जेमी डिमन जैसे नेता भर्ती में फ्रीज का संकेत दे रहे हैं और विशेषज्ञ 'जॉब्स सर्वनाश' बनाम एक सामान्य बदलाव पर बहस कर रहे हैं, यह स्पष्ट है कि स्थिर करियर का रास्ता अब सीधा नहीं रहा। युवा पेशेवर अब यह नहीं पूछ रहे हैं कि सीढ़ी कैसे चढ़ें; वे यह पूछने लगे हैं कि क्या यह सीढ़ी चढ़ने लायक भी है।
प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।