समझौते की भारी कीमत: क्यों जैक्सन लेबोरेट्रीज का लाइसेंस रद्द हुआ
ऑक्सीटोसिन मामले में केंद्र का बड़ा एक्शन: 'जैक्सन लेबोरेट्रीज' के दो राज्यों में मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द
राजस्थान में पांच माताओं की दुखद मौत के बाद, नियामक अधिकारियों ने जैक्सन लेबोरेट्रीज के मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द कर दिए हैं, जिससे दवा सुरक्षा प्रोटोकॉल में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं।
लेबर रूम की दीवारें सुरक्षित मानी जाती हैं, लेकिन कोटा के जेके लोन अस्पताल और गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में पांच परिवारों के लिए 5 मई से 17 मई के बीच का समय किसी बुरे सपने से कम नहीं था। सिजेरियन ऑपरेशन के बाद पांच महिलाओं की मौत हो गई, जिससे उनकी सर्जरी के दौरान दी गई दवाओं की सुरक्षा पर गहरे सवाल खड़े हो गए। इस पूरे मामले के केंद्र में जैक्सन लेबोरेट्रीज द्वारा निर्मित ऑक्सीटोसिन ब्रांड 'Tocin' है, जिस पर अब देश भर में बड़ी नियामक कार्रवाई की जा रही है।
गुणवत्ता में बड़ी चूक
इन मौतों के तार कथित तौर पर घटिया ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन से जुड़ने की रिपोर्ट के बाद, सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) ने राज्य ड्रग कंट्रोलर्स के साथ मिलकर पंजाब और हिमाचल प्रदेश में कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों की संयुक्त जांच शुरू की। जांच के नतीजे चौंकाने वाले थे। निरीक्षकों ने गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) प्रोटोकॉल के कई उल्लंघन पाए, जिसके बाद दोनों राज्यों में कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस तुरंत रद्द कर दिए गए।
इन इंजेक्शनों की पहुंच सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं थी। राज्य-स्तरीय जांच से पता चला है कि इन विशिष्ट इंजेक्शनों की सप्लाई चेन राजस्थान से बाहर नई दिल्ली, इंदौर और उत्तर प्रदेश के गोंडा तक फैली हुई थी। अधिकारियों ने अब इन क्षेत्रों को अलर्ट जारी कर वितरण रोकने और संदिग्ध दवाओं के संपर्क में आए मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
बड़ी तस्वीर
यह मामला महत्वपूर्ण क्यों है? इस तात्कालिक त्रासदी से परे, यह घटना हमारी फार्मास्युटिकल निगरानी में एक बड़ी कमी को उजागर करती है। ऑक्सीटोसिन एक जीवन रक्षक दवा है जिसका उपयोग प्रसवोत्तर रक्तस्राव (postpartum haemorrhage) को रोकने के लिए किया जाता है, जो भारत में मातृ मृत्यु का एक प्रमुख कारण है। जब मां की जान बचाने वाला उपकरण ही सवालों के घेरे में आ जाए, तो यह स्वास्थ्य प्रणाली और जनता के बीच के बुनियादी भरोसे को तोड़ देता है।
हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपनी मानक फार्माकोविजिलेंस प्रक्रिया के तहत अतिरिक्त जानकारी मांगी है, लेकिन भारतीय अधिकारियों का रुख स्पष्ट है: गुणवत्ता मानकों के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। सरकार अब राजस्थान प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जो इस मामले की अपनी गहन जांच कर रहा है। क्या ये मौतें सीधे दवा की प्रभावकारिता के कारण हुईं या चिकित्सा हस्तक्षेप में विफलता थी, यह एक विशेषज्ञ समिति तय करेगी, लेकिन निर्माता के खिलाफ की गई यह नियामक कार्रवाई उद्योग के लिए एक सख्त चेतावनी है।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, ध्यान सप्लाई चेन पर केंद्रित है—स्थानीय वितरकों द्वारा खरीदी गई 16,000 शीशियों से लेकर मरीज को इंजेक्शन लगाने तक। फिलहाल, लाइसेंस रद्द करना एक सुधारात्मक कदम है, लेकिन कोटा के उन परिवारों के लिए जवाबदेही का इंतजार अभी खत्म नहीं हुआ है।
कबीर शर्मा पॉलिटिकलपीडिया के लिए संस्कृति, तकनीक और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर लिखते हैं।