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वह खौफनाक 'शादी' जो कभी नहीं हुई: सिया गोयल के डिजिटल सबूतों की इनसाइड स्टोरी

'वह शादी जो कभी नहीं होगी': सिया गोयल का दोस्त को भेजा गया 'स्नैपचैट मैसेज' हुआ वायरल

द्वारा प्रिया नायरप्रकाशित 4 जुलाई 2026· 2 मिनट पढ़ें
वह खौफनाक 'शादी' जो कभी नहीं हुई: सिया गोयल के डिजिटल सबूतों की इनसाइड स्टोरी
वह खौफनाक 'शादी' जो कभी नहीं हुई: सिया गोयल के डिजिटल सबूतों की इनसाइड स्टोरी

एक वायरल स्नैपचैट मैसेज ने पुणे के एक रियल एस्टेट कारोबारी की कथित हत्या की साजिश की परतें खोल दी हैं, क्योंकि जांचकर्ता अब डिजिटल सबूतों के जाल को सुलझाने में जुटे हैं।

25 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की मौत की जांच ने तब एक डरावना मोड़ ले लिया, जब एक स्नैपचैट स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। 20 वर्षीय सिया गोयल द्वारा एक दोस्त को भेजे गए इस मैसेज में 'वेडिंग टिकट बुकिंग' के लिए आधार कार्ड की आगे और पीछे की फोटो मांगी गई थी। इसके साथ लिखा गया वह खौफनाक नोट—'ऐसी शादी के लिए जो कभी होने ही नहीं वाली थी'—लोहागढ़ किले में हुई दुखद घटना के बाद अब लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है।

केतन अग्रवाल, जिनकी इस नवंबर में गोयल से शादी होने वाली थी, को कथित तौर पर 18 जून को एक चट्टान से धक्का देकर मार डाला गया। इस घटना के बाद पुणे पुलिस ने गोयल और उसके कथित प्रेमी, 22 वर्षीय चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया। स्थानीय अदालत द्वारा पुलिस रिमांड बढ़ाने की अभियोजन पक्ष की याचिका खारिज किए जाने के बाद, दोनों फिलहाल 16 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में हैं।

डिजिटल सुरागों को डिकोड करना

अदालत की कार्यवाही के दौरान, सहायक लोक अभियोजक राजश्री विरकुड ने आरोपियों से बरामद डिजिटल सबूतों के महत्व पर जोर दिया। जांचकर्ताओं ने उस जगह का पंचनामा पहले ही कर लिया है जहां संदिग्धों ने कथित तौर पर अपराध का पूर्वाभ्यास किया था, साथ ही उस स्थान की भी पहचान कर ली है जहां गोयल ने अग्रवाल का पासपोर्ट फेंका था।

अभियोजन पक्ष का मानना है कि बरामद मोबाइल डेटा इस केस की चाबी है। विरकुड के अनुसार, फोन में कोड भाषा, उपनाम और इमोजी का इस्तेमाल किया गया है, जिसे समझने के लिए आरोपियों से पूछताछ जरूरी है। गोयल के दूसरे फोन को गहन जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा गया है, ताकि शादी की तैयारियों की आड़ में रची गई इस कथित साजिश की टाइमलाइन को समझा जा सके।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है

यह केस आपराधिक जांच में 'डिजिटल फुटप्रिंट्स' पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों की बढ़ती निर्भरता को दर्शाता है। ऐसे दौर में जब सोची-समझी साजिशें भी मेटाडेटा का निशान छोड़ जाती हैं, सोशल मीडिया संचार और हिंसक अपराधों का आपस में जुड़ना आम होता जा रहा है। 'शादी' वाला यह मैसेज, चाहे वह लापरवाही में कही गई बात हो या गुमराह करने की एक सोची-समझी चाल, यह याद दिलाता है कि कैसे निजी डिजिटल बातचीत आज की भारतीय अदालतों में सबूतों का मुख्य आधार बनती जा रही है।

जांचकर्ताओं के लिए चुनौती स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर इस्तेमाल होने वाली व्यंग्यात्मक और कोड भाषा के पीछे के असली इरादे को साबित करना है। जैसे-जैसे कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, आरोपियों और पीड़ित के बीच के रिश्तों की जांच और तेज होगी, जिससे यह मामला एक अचानक हुई त्रासदी से बदलकर एक पूर्व-नियोजित विश्वासघात की कहानी में तब्दील हो रहा है।

द्वारा प्रिया नायर
राजनीतिक संवाददाता

प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।