भवानी भवन मैराथन: अभिषेक बनर्जी से CID की घंटों लंबी पूछताछ के अंदर की कहानी
करीब साढ़े 8 घंटे बाद CID दफ्तर से बाहर निकले अभिषेक बनर्जी
पश्चिम बंगाल विधानसभा हस्ताक्षर विवाद की जांच के बीच, तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी आज सीआईडी मुख्यालय में 8.5 घंटे तक चली लंबी पूछताछ के बाद बाहर निकले।
रविवार देर शाम भवानी भवन के दरवाजे खुले, जो अभिषेक बनर्जी के लिए साढ़े आठ घंटे के थका देने वाले सत्र का अंत था। डायमंड हार्बर के सांसद, जो अपने निर्धारित समय से काफी पहले सीआईडी कार्यालय पहुंच गए थे, रात 8:20 बजे के बाद एक काली एसयूवी में वहां से निकले। कानूनी जांच के इस अहम दिन पर उन्होंने मीडिया से कोई बात नहीं की, बल्कि गाड़ी की खिड़की से हाथ हिलाकर भीड़ का अभिवादन किया।
यह पेशी पश्चिम बंगाल विधानसभा हस्ताक्षर विवाद की चल रही जांच का नवीनतम घटनाक्रम है। सीआईडी का ध्यान इस मामले पर पूरी तरह केंद्रित है, और जांच में पहली बार ऐसा हुआ कि जांचकर्ताओं ने दो प्रमुख हस्तियों को आमने-सामने बैठाया। कुणाल घोष, जो दोपहर में कार्यालय पहुंचे थे, ने अपनी साढ़े तीन घंटे की पूछताछ के बाद पुष्टि की कि उन्हें और बनर्जी को जांचकर्ताओं ने आमने-सामने बैठाकर सवाल किए।
कड़ी सुरक्षा का दिन
रविवार होने के बावजूद, सीआईडी मुख्यालय का माहौल बिल्कुल भी शांत नहीं था। राज्य प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे, जिसमें स्थानीय पुलिस, केंद्रीय बल और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने इमारत के चारों ओर सुरक्षा घेरा बना रखा था। जांचकर्ताओं के लिए, उच्च पदस्थ अधिकारियों की मौजूदगी इस समन की गंभीरता को दर्शाती थी।
बनर्जी की आज की उपस्थिति पिछले गुरुवार को हुई साढ़े पांच घंटे की मैराथन पूछताछ के बाद हुई है। हालांकि जांच प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन यह कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देशों के दायरे में है। अदालत ने दो सप्ताह की महत्वपूर्ण राहत दी है और स्पष्ट आदेश दिया है कि इस अवधि के दौरान टीएमसी नेता के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
दिल्ली से लौटने के तुरंत बाद बार-बार समन जारी होना यह दर्शाता है कि सीआईडी कथित अनियमितताओं को लेकर एक विस्तृत समयरेखा तैयार करने में जुटी है। हालांकि राजनीतिक चर्चा अक्सर आनंदपुर पत्रिका या अन्य स्थानीय अखबारों की सुर्खियों तक सीमित रहती है, लेकिन प्रक्रियात्मक वास्तविकता एक जटिल कानूनी लड़ाई पर टिकी है।
पर्यवेक्षकों के लिए, भवानी भवन में बार-बार बुलाए जाने का यह पैटर्न संकेत देता है कि जांच अभी खत्म होने से बहुत दूर है। हस्ताक्षर विवाद की जांच केवल प्रशासनिक जांच की परीक्षा नहीं है; यह राज्य की जांच एजेंसियों और टीएमसी नेतृत्व के बीच टकराव का मुख्य बिंदु बन गई है। कानूनी सुरक्षा मिलने के बाद, आने वाले हफ्तों में इस मामले के और भी अध्याय जुड़ेंगे, क्योंकि जांचकर्ता और कानूनी टीमें विवाद के अगले चरण की तैयारी कर रही हैं।
कबीर शर्मा पॉलिटिकलपीडिया के लिए संस्कृति, तकनीक और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर लिखते हैं।