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54 करोड़ का जुआ: ऋषभ पंत को लेकर संजीव गोयनका का सपना कैसे चकनाचूर हुआ

Watch: धोनी-रोहित वाला सपना टूटा, संजीव गोयनका का पुराना वीडियो हुआ वायरल 54 करोड़ डूबे

द्वारा अनन्या अय्यरप्रकाशित 26 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
54 करोड़ का जुआ: ऋषभ पंत को लेकर संजीव गोयनका का सपना कैसे चकनाचूर हुआ
54 करोड़ का जुआ: ऋषभ पंत को लेकर संजीव गोयनका का सपना कैसे चकनाचूर हुआ

LSG मालिक की वह महत्वाकांक्षी भविष्यवाणी कि ऋषभ पंत को धोनी और रोहित जैसे दिग्गजों के साथ देखा जाएगा, अब पूरी तरह बिखर गई है क्योंकि यह स्टार विकेटकीपर वापस दिल्ली लौट गया है।

इंडियन प्रीमियर लीग की हाई-प्रोफाइल दुनिया अक्सर खेल की महत्वाकांक्षा और वित्तीय लापरवाही के बीच की रेखा को धुंधला कर देती है। जैसे-जैसे IPL 2027 के लिए मंच तैयार हो रहा है, ऋषभ पंत की दिल्ली कैपिटल्स में वापसी की चर्चा ने लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के साथ उनके संक्षिप्त और महंगे कार्यकाल पर नई बहस छेड़ दी है। केवल दो सीजन के बाद पंत के बाहर होने से, संजीव गोयनका का एक वीडियो वायरल हो गया है, जो यह याद दिलाता है कि फ्रैंचाइज़ी की दुनिया में टीम बनाने की रणनीतियाँ कितनी जल्दी विफल हो सकती हैं।

एक विरासत जो कभी शुरू ही नहीं हो पाई

साल 2025 की मेगा नीलामी में LSG ने पंत को 27 करोड़ रुपये की भारी-भरकम कीमत पर खरीदकर जिसे मास्टरस्ट्रोक माना था, वह उल्टा पड़ गया। उस समय, मालिक संजीव गोयनका काफी उत्साहित थे और एक दशक लंबे दबदबे की कल्पना कर रहे थे। एक प्राइमरी सोर्स ओरिजिनल आर्टिकल, जो अब ऑनलाइन चर्चा में है, उसमें गोयनका ने आत्मविश्वास के साथ कहा था कि भले ही रोहित शर्मा और एमएस धोनी खेल के दिग्गज हैं, लेकिन दस साल के भीतर दुनिया पंत का नाम भी उन्हीं के साथ सम्मान से लेगी।

हालाँकि, यह सपना हकीकत की कसौटी पर खरा नहीं उतरा। LSG के लिए खेले गए 28 मैचों में पंत केवल 581 रन ही बना सके और उनके कार्यकाल के दौरान टीम एक बार भी प्लेऑफ में जगह नहीं बना पाई। गणित साफ है: LSG ने दो सीजन में 54 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन बदले में न तो कोई ट्रॉफी मिली और न ही टीम को कोई स्थिरता।

ट्रेड का असर

इस विफलता का असर अब टीमों के रोस्टर पर दिख रहा है। दिल्ली कैपिटल्स ने अपने पूर्व कप्तान को वापस लाने के लिए स्पिनर कुलदीप यादव को लखनऊ भेजने का ट्रेड किया है। खिलाड़ियों के इस बदलाव पर नजर रखने वाले प्रशंसकों के लिए, यह फ्रैंचाइज़ी द्वारा नुकसान कम करने का एक क्लासिक मामला है। भले ही सोशल मीडिया यूजर्स जैसे कुणाल, गोयनका के पुराने दावों वाली वॉच-वर्दी क्लिप्स शेयर कर रहे हों, लेकिन आधुनिक क्रिकेट की सच्चाई स्पष्ट है: खराब बैलेंस शीट के सामने भावनाएं अक्सर टिक नहीं पातीं।

यह क्यों मायने रखता है

यह घटना IPL में एक बार-बार होने वाले पैटर्न को उजागर करती है: नीलामी में बड़ी बोली को सफलता की गारंटी मान लेना खतरनाक है। जब मालिक किसी खिलाड़ी को 'अगला बड़ा सितारा' बताकर भारी खर्च को सही ठहराते हैं, तो वे अक्सर खिलाड़ी के लिए एक ऐसा दबाव बना देते हैं जिसे संभालना मुश्किल होता है। LSG में पंत का कार्यकाल सिर्फ उनके फॉर्म के बारे में नहीं था; यह उस प्रोजेक्ट का चेहरा होने का बोझ था जिसने विरासत का वादा किया था लेकिन परिणाम औसत रहे। जैसे-जैसे फ्रैंचाइज़ी 2027 की ओर बढ़ रही हैं, ध्यान स्टार-चेजिंग से हटकर टीम की मजबूती पर जा रहा है, एक ऐसा सबक जो 54 करोड़ की कीमत चुकाकर सीखा गया है।

द्वारा अनन्या अय्यर
वैश्विक मामले संवाददाता

अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।