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अलीगंज में दहशत: लखनऊ के कोचिंग सेंटर में भीषण आग, कई लोगों की मौत

लखनऊ के कोचिंग सेंटर में आग लगने से 13 लोगों की मौत, जान बचाने के लिए पहली मंजिल से कूदे छात्र

द्वारा प्रिया नायरप्रकाशित 22 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
अलीगंज में दहशत: लखनऊ के कोचिंग सेंटर में भीषण आग, कई लोगों की मौत
अलीगंज में दहशत: लखनऊ के कोचिंग सेंटर में भीषण आग, कई लोगों की मौत

भीड़भाड़ वाले कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने कई परिवारों को तबाह कर दिया है। दिल दहला देने वाले फुटेज में छात्रों को आग से बचने के लिए ऊपरी मंजिलों से कूदते हुए देखा जा सकता है।

आज अलीगंज की शांत गलियां उस समय दहल गईं जब एक स्थानीय कोचिंग सेंटर में भीषण आग लग गई, जिससे शिक्षा का यह केंद्र एक दर्दनाक त्रासदी का गवाह बन गया। इमारत से निकलते काले धुएं के बीच, चश्मदीदों ने देखा कि कैसे आग की लपटों से घिरे छात्र अपनी जान बचाने के लिए पहली मंजिल से कूदने को मजबूर हुए।

हालांकि अलग-अलग एजेंसियों की रिपोर्ट में मृतकों की संख्या 11 से 14 के बीच बताई जा रही है, लेकिन आपदा की भयावहता स्पष्ट है। बचाव अभियान अभी भी जारी है और आपातकालीन टीमें घटनास्थल को सुरक्षित करने और फंसे हुए लोगों को निकालने में जुटी हैं। घटना के विचलित कर देने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें छात्रों की बेबसी साफ देखी जा सकती है, जिन्हें पीछे धधकती आग और नीचे जमीन पर गिरने के जोखिम में से किसी एक को चुनना पड़ा।

बढ़ता संकट

इस घटना ने शहर में चल रहे निजी शिक्षण संस्थानों के सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बड़ी संख्या में छात्रों को बहुमंजिला इमारतों में बैठाया जाता है, जहां अक्सर बुनियादी अग्निशमन सुरक्षा या आपातकालीन निकास की कमी होती है। जैसे-जैसे प्रशासन बचाव कार्यों में लगा है, अब ध्यान इस बात पर केंद्रित हो रहा है कि क्या यह कोचिंग सेंटर अग्निशमन नियमों का पालन कर रहा था और इतने घनी आबादी वाले इलाके को अचानक लगी आग के प्रति इतना असुरक्षित कैसे छोड़ा जा सकता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

लखनऊ की यह त्रासदी कोई अकेली घटना नहीं है; यह भारत के तेजी से बढ़ते निजी शिक्षा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की विफलता के एक पुराने पैटर्न को दोहराती है। अलीगंज की तंग गलियों से लेकर देश भर के कोचिंग हब तक, परीक्षा की तैयारी का 'औद्योगीकरण' अक्सर शहरी नियमों से आगे निकल जाता है। जब सैकड़ों छात्रों वाली इमारत में आग से निपटने के जरूरी इंतजाम नहीं होते, तो यह महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक बड़ी प्रशासनिक चूक है। आने वाले दिनों में निरीक्षणों का दौर शुरू होगा और स्थानीय नगर निकायों व कोचिंग संचालकों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चलेगा। हालांकि, आज शोक में डूबे परिवारों के लिए, यह प्रशासनिक कार्रवाई उस नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती जिसे पूरी तरह से रोका जा सकता था।

बचाव अभियान पूरा होने के बाद अधिकारियों द्वारा आग के कारणों की औपचारिक जांच शुरू किए जाने की उम्मीद है। फिलहाल, शहर में तनाव का माहौल है और अस्पताल का स्टाफ घायलों के इलाज में जुटा है, जिनमें से कई लोग जान बचाने के लिए कूदने के कारण गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

द्वारा प्रिया नायर
राजनीतिक संवाददाता

प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।