तेलंगाना में मतदाता सूची का कायाकल्प: चार दिनों में 1.73 करोड़ फॉर्म वितरित
तेलंगाना में SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद से 1.73 करोड़ फॉर्म बांटे गए
राज्य के चुनाव अधिकारी मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं, लेकिन फील्ड से आ रही असमान वितरण की खबरें इस बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती को दर्शाती हैं।
तेलंगाना की चुनावी मशीनरी फिलहाल बेहद तेज गति से काम कर रही है। 25 जून को जब मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) आधिकारिक तौर पर शुरू हुआ, तब से बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) ने 1.73 करोड़ एन्यूमरेशन फॉर्म वितरित कर दिए हैं। लगभग 36,000 BLOs के साथ चलाया जा रहा यह घर-घर जाकर सर्वे करने का अभियान, मतदाता सूची की खामियों को दूर करने का राज्य का एक बड़ा प्रयास है। 20 जून तक के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 90 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां पाई गई थीं।
जमीनी हकीकत
हालांकि राज्य चुनाव कार्यालय फॉर्म वितरण की भारी संख्या की रिपोर्ट दे रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति एक समान नहीं है। हैदराबाद के कुछ हिस्सों, जैसे अंबरपेट से ऐसी खबरें आ रही हैं कि कुछ निवासी अभी भी अपने दरवाजे पर इन फॉर्म्स के पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। वितरण में ये अंतराल BLOs पर दबाव बढ़ा रहे हैं, क्योंकि घर-घर जाकर सर्वे करने की 24 जुलाई की समय सीमा नजदीक आ रही है।
तेलंगाना के CEO सी. सुदर्शन रेड्डी ने कर्मचारियों के "शानदार प्रयासों" की सराहना करते हुए स्पष्ट किया है कि गलती की कोई गुंजाइश नहीं है। एक हालिया वीडियो कॉन्फ्रेंस में, रेड्डी ने जोर देकर कहा कि BLOs को स्थापित प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना होगा और चेतावनी दी कि किसी भी तरह की लापरवाही पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 3.38 करोड़ से अधिक मतदाताओं की जिम्मेदारी के साथ, इस डिजिटलीकरण अभियान की अहमियत बहुत ज्यादा है।
2026 की राह
वर्तमान चरण 31 जुलाई को प्रकाशित होने वाली मतदाता सूची के ड्राफ्ट के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। ड्राफ्ट जारी होने के बाद, 1 अक्टूबर को अंतिम सूची प्रकाशित होने से पहले यह प्रक्रिया आपत्तियों की सुनवाई और उनके समाधान के चरण में प्रवेश करेगी। CEO ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे BLOs के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण सत्र आयोजित करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इन फॉर्म्स का डिजिटलीकरण पूरी सटीकता के साथ हो।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
यह कवायद सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं है; यह तेलंगाना के चुनावी डेटाबेस में मौजूद अनियमितताओं को दूर करने का एक व्यवस्थित प्रयास है। लगभग 90 लाख रिकॉर्ड्स में विसंगतियों की पहचान करके, चुनाव आयोग यह स्वीकार कर रहा है कि भविष्य के चुनावों में सटीकता सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा सूची की गहन सफाई जरूरी है। राजनीतिक दलों के लिए यह पुनरीक्षण एक महत्वपूर्ण मोड़ है—मतदाता सूची चुनावी वैधता की नींव होती है, और अंतिम सूची में कोई भी विसंगति पार्टियों और चुनाव आयोग के बीच विवाद का कारण बन सकती है। इस अभियान की सफलता अंततः इस बात से नहीं मापी जाएगी कि कितने लाख फॉर्म छापे गए, बल्कि इस बात से मापी जाएगी कि अक्टूबर की समय सीमा से पहले कितने मतदाताओं को सही ढंग से मैप और प्रमाणित किया गया है।
प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।