तेहरान की भयावह तैयारी: खामेनेई के अंतिम संस्कार में हजारों मौतों की आशंका से क्यों डरा है ईरान?
तेहरान में 3000 लोगों की मौत हो सकती है! क्या ईरान ने खोद ली हैं कब्रें? सामने आई रिपोर्ट
अयातुल्ला अली खामेनेई के लिए ईरान एक ऐतिहासिक शोक अवधि की तैयारी कर रहा है, लेकिन खुफिया आकलन चेतावनी दे रहे हैं कि यह आयोजन एक बड़ी त्रासदी में बदल सकता है, जिसके चलते अधिकारी 1,500 से अधिक कब्रें तैयार करने में जुटे हैं।
दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के लिए नियोजित अंतिम संस्कार का पैमाना राष्ट्रीय शोक के प्रदर्शन से कहीं अधिक ईरानी सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती बन गया है। जर्मन मीडिया में आई रिपोर्टों ने एक चिंताजनक आंतरिक आकलन को उजागर किया है: सरकार एक संभावित त्रासदी के लिए तैयारी कर रही है। खुफिया एजेंसियों का अनुमान है कि भीषण गर्मी, भगदड़ और तेहरान, कोम, नजफ और करबला की सड़कों पर उमड़ने वाली भारी भीड़ के कारण 1,500 से 3,000 लोगों की जान जा सकती है।
जहां अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें तेहरान में सत्ता के हस्तांतरण पर टिकी हैं, वहीं राज्य की आंतरिक तैयारियां एक डरावनी तस्वीर पेश कर रही हैं। ईरानी रेड क्रिसेंट और नेशनल क्राइसिस मैनेजमेंट ऑर्गनाइजेशन द्वारा उपराष्ट्रपति मोहम्मद रज़ा आरिफ को सौंपी गई एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार इस आयोजन को एक बड़े आपातकालीन अभ्यास के रूप में देख रही है। पहले से खोदी गई कब्रों के अलावा, सरकार ने लापता लोगों का पता लगाने के लिए विशेष समितियां बनाई हैं और 2 करोड़ शोक मनाने वालों के आने की उम्मीद में हजारों बसें, मेट्रो सेवाएं और अस्थायी रसोईघर जुटाए हैं।
जोखिम भरी विरासत
इन योजनाओं पर 2020 में IRGC कमांडर कासिम सुलेमानी के अंतिम संस्कार की छाया साफ दिख रही है। उस जुलूस के दौरान, भारी भीड़ के कारण मची भगदड़ में 56 लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों घायल हुए थे। यह छोटी त्रासदी अब एक भयावह उदाहरण बन गई है कि इस सप्ताह क्या हो सकता है। मौजूदा सुरक्षा तंत्र देश के इतिहास में सबसे व्यापक है, जिसके तहत प्रमुख शहरी केंद्रों में 24 घंटे सेवाएं सक्रिय कर दी गई हैं। स्कूलों और मस्जिदों को अपने दरवाजे खोलने का आदेश दिया गया है और तीन दिवसीय शोक अवधि की व्यवस्था पर लाखों डॉलर खर्च किए जा रहे हैं, जिसमें केवल तेहरान का बजट ही 150 करोड़ रुपये से अधिक है।
बड़ी तस्वीर
यह मामला इतना महत्वपूर्ण क्यों है? सुरक्षा और वित्तीय खर्च के मामले में इन तैयारियों की तीव्रता खामेनेई के बाद के ईरान के दांव को दर्शाती है। यह केवल एक अंतिम संस्कार नहीं है; यह शासन की मजबूती और जन लामबंदी का प्रदर्शन है। जब कोई राज्य इतनी सटीकता के साथ किसी जुलूस की मानवीय लागत की गणना करता है, तो यह राजनीतिक संक्रमण के दौरान व्यवस्था बनाए रखने को लेकर गहरी चिंता को रेखांकित करता है। भीड़ के आकार को 'प्रबंधित' करने पर ध्यान केंद्रित करना उस शासन को दर्शाता है जो स्थिरता दिखाने के लिए बेताब है, लेकिन साथ ही उसे इस तरह के विशाल जमावड़े से जुड़ी अस्थिरता का डर भी है।
क्षेत्र पर नजर रखने वाले पर्यवेक्षकों के लिए, राज्य की महंगी लॉजिस्टिक योजना और संभावित मानवीय आपदा की वास्तविकता के बीच का अंतर स्पष्ट है। हालांकि इन आंकड़ों का प्राथमिक स्रोत लीक हुई खुफिया रिपोर्टें हैं, लेकिन सरकार की प्रतिक्रिया—पहले से ही हजारों कब्रें तैयार करना—यह बताती है कि वे इन अनुमानों को काफी गंभीरता से ले रहे हैं। जैसे-जैसे जुलूस मशहद में अंतिम संस्कार की ओर बढ़ रहा है, दुनिया यह देखने के लिए उत्सुक है कि क्या राज्य का विस्तृत संकट प्रबंधन ढांचा उस त्रासदी को रोक पाएगा, जिसकी आशंका उसने पहले ही जता दी है।
अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।