‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ के आरोपों से गरमाई तमिलनाडु की राजनीति, फिर बढ़ा सियासी पारा
मु.क. स्टालिन को पार्टी छोड़ देनी चाहिए, तभी डीएमके बच पाएगी: निर्मल कुमार!
मंत्री आर. निर्मल कुमार ने डीएमके नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है, जबकि टीवीके (TVK) विधायकों को तोड़ने के कथित प्रयासों की जांच ने जोर पकड़ लिया है।
चेन्नई में इस सप्ताह राजनीतिक माहौल तब गरमा गया जब 'हॉर्स-ट्रेडिंग'—यानी वित्तीय लाभ के लिए विधायकों को खरीदने की प्रथा—के आरोप केंद्र बिंदु बन गए। डॉ. अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी में शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री आर. निर्मल कुमार ने बिना किसी लाग-लपेट के अपनी बात रखी। उन्होंने मु. क. स्टालिन पर सीधा हमला करते हुए दावा किया कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में बने रहने के लिए डीएमके और एआईएडीएमके, दोनों को ही नेतृत्व परिवर्तन की सख्त जरूरत है।
यह विवाद उस जांच से उपजा है जिसमें आरोप लगाया गया है कि पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक कुमार ने नवगठित तमिझागा वेत्री कड़गम (TVK) के विधायकों को रिश्वत देने की कोशिश की थी। पुलिस ने इस मामले में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया है और अशोक कुमार सहित चार मुख्य संदिग्धों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।
आरोप और पलटवार
मंत्री निर्मल कुमार ने उन दावों पर विशेष रूप से तीखी प्रतिक्रिया दी, जिनमें कहा गया था कि राज्य सरकार गिरने वाली है। उन्होंने डीएमके नेतृत्व द्वारा पहले दिए गए उन बयानों पर सवाल उठाया, जिनमें 30 दिनों के भीतर सत्ता परिवर्तन की भविष्यवाणी की गई थी। मंत्री ने पूछा, "किस आधार पर उन्होंने यह भविष्यवाणी की कि सरकार 30 दिनों में गिर जाएगी?" उन्होंने इन दावों को राज्य को अस्थिर करने की हताश कोशिश करार दिया और कहा कि मौजूदा प्रशासन केवल जनता के प्रति जवाबदेह है, न कि राजनीतिक बिचौलियों की चालों के प्रति।
मंत्री ने आरोप लगाया कि विधायकों को पाला बदलने के लिए 30 करोड़ रुपये से 40 करोड़ रुपये तक की भारी रकम का लालच दिया जा रहा है। उन्होंने इसे राजनीतिक संस्कृति में एक खतरनाक गिरावट बताया, जहां 'धन बल' ने लोकतांत्रिक जनादेश की जगह ले ली है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन वित्तीय प्रलोभनों की राज्य सरकार द्वारा की जा रही जांच ठोस सबूतों पर आधारित है, और उन्होंने आलोचकों को चुनौती दी कि वे सार्वजनिक अटकलें लगाने के बजाय राज्यपाल के पास अपनी शिकायतें लेकर जाएं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: बदलता राजनीतिक परिदृश्य
यह जुबानी जंग केवल शब्दों का खेल नहीं है; यह तमिलनाडु के राजनीतिक गलियारों में उस गहरी बेचैनी को दर्शाता है जो टीवीके (TVK) जैसे नए खिलाड़ियों के मैदान में उतरने से पैदा हुई है। जब स्थापित पार्टियां एक-दूसरे पर वफादारी 'खरीदने' का आरोप लगाती हैं, तो यह एक ऐसे संक्रमण काल का संकेत है जहां पारंपरिक वोट-बैंक की राजनीति बदलती जनता के दबाव को महसूस कर रही है।
आपसी आरोपों का यह सिलसिला—जिसमें एआईएडीएमके के एडप्पादी पलानीस्वामी और डीएमके नेतृत्व अपनी-अपनी विरासत को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं—प्रासंगिकता के लिए चल रहे संघर्ष को उजागर करता है। यह सुझाव देकर कि दोनों पार्टियों के नेताओं को अपनी संस्थाओं को बचाने के लिए पद छोड़ देना चाहिए, मंत्री निर्मल कुमार नैरेटिव को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। वे मौजूदा प्रशासन को उस 'भ्रष्ट' तरीके के विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं जिसे वे पुरानी व्यवस्था का हिस्सा बताते हैं। क्या यह जनता के बीच असर करेगा या इसे केवल राजनीतिक दिखावा माना जाएगा, यह देखना बाकी है, लेकिन चल रही पुलिस जांच यह संकेत देती है कि यह लड़ाई मीडिया के साथ-साथ अदालतों में भी लड़ी जाएगी।
अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।