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मलबे के बीच सेल्फी और सड़ती लाशें: वेनेज़ुएला में आपदा के नाम पर संवेदनहीनता का नंगा नाच

सड़ रही थीं लाशें, अधिकारी ले रहे थे सेल्फी... वेनेज़ुएला में भूकंप के बाद सरकारी संवेदनहीनता की हदें पार

द्वारा कबीर शर्माप्रकाशित 28 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
मलबे के बीच सेल्फी और सड़ती लाशें: वेनेज़ुएला में आपदा के नाम पर संवेदनहीनता का नंगा नाच
मलबे के बीच सेल्फी और सड़ती लाशें: वेनेज़ुएला में आपदा के नाम पर संवेदनहीनता का नंगा नाच

वेनेज़ुएला में आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप के बाद मलबे से उठती दुर्गंध और सरकारी अधिकारियों की शर्मनाक सेल्फीबाजी ने आपदा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तबाही का मंजर और खोया हुआ समय

वेनेज़ुएला में हाल ही में आए भूकंप ने जो जख्म दिए हैं, वे अब नासूर बन रहे हैं। आंकड़े भयावह हैं—1,430 मौतें, 3,200 से अधिक घायल, और लगभग 50,000 लोग अब भी लापता हैं। ला गुआइरा राज्य इस त्रासदी का केंद्र बना हुआ है, जहाँ स्थिति इतनी विकराल है कि अब जीवित लोगों को खोजने की उम्मीद पूरी तरह दम तोड़ चुकी है। आपदा विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती 72 घंटे जीवन बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, और वह खिड़की अब बंद हो चुकी है। अब वहां केवल मलबे के नीचे दबे शवों की दुर्गंध और भीषण गर्मी का कहर बचा है।

संवेदनहीनता की हदें

इस दुखद घड़ी में, जब आम लोग अपनों को मलबे से निकालने के लिए खुद फावड़े उठा रहे हैं, सरकारी अधिकारियों की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने पूरे देश को झकझोर दिया है। ला गुआइरा में, जहां लाशें सड़ रही हैं, कुछ सरकारी कर्मचारी और अधिकारी मलबे के सामने खड़े होकर मुस्कुराते हुए सेल्फी लेते दिखे। स्थानीय लोगों का गुस्सा तब और भड़क गया जब सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में आम लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया। अब मलबे के बीच अपनों को तलाशने के लिए स्थानीय स्वयंसेवकों को भी 'सुरक्षित प्रवेश पास' लेने की अनिवार्यता का सामना करना पड़ रहा है।

अपनों को खोने का दर्द

स्थानीय निवासियों की आपबीती सरकार के दावों की पोल खोल रही है। एएफपी (AFP) को मिली एक रिपोर्ट के अनुसार, एक मां को अपनी बेटी और दामाद के शवों को खुद मलबे से बाहर निकालना पड़ा, क्योंकि राहत दल वहां समय पर नहीं पहुंचे। शवों के तेजी से सड़ने के कारण अब अंतिम संस्कार भी बिना किसी औपचारिक शोक सभा के करने की मजबूरी है। यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि उस सरकारी तंत्र की विफलता का आईना है जो आपदा के वक्त लोगों के साथ खड़ा होने के बजाय अपनी छवि चमकाने में व्यस्त है।

Why it matters: आपदा और जवाबदेही का पतन

यह घटना दिखाती है कि कैसे किसी भी देश में आपदा प्रबंधन का राजनीतिकरण और नौकरशाही का अहंकार आम आदमी के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। जब एक सरकारी तंत्र बचाव कार्यों के बजाय 'फोटो-ऑप' (Photo-op) को प्राथमिकता देता है, तो वह न केवल आपदा के पीड़ितों का अपमान करता है, बल्कि नागरिकों का शासन पर से भरोसा भी पूरी तरह खत्म कर देता है। वेनेज़ुएला में जो हो रहा है, वह एक चेतावनी है कि आपदा के बाद केवल राहत सामग्री ही नहीं, बल्कि संवेदनशील नेतृत्व और पारदर्शी जवाबदेही की सबसे अधिक जरूरत होती है।

द्वारा कबीर शर्मा
फ़ीचर्स लेखक

कबीर शर्मा पॉलिटिकलपीडिया के लिए संस्कृति, तकनीक और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर लिखते हैं।