ओल्ड ट्रैफर्ड में फिसली जीत: कैसे एक ओवर ने टीम इंडिया की उम्मीदों पर फेरा पानी
IND vs ENG टर्निंग पॉइंट: टीम इंडिया की मुट्ठी में था मैच, एक ओवर में बदल गया सबकुछ, रवि बिश्नोई से कहां हुई चूक?
मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड में भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए दूसरे T20I मैच में जीत की दहलीज पर खड़ी टीम इंडिया एक खराब ओवर की वजह से हार गई, जिससे सीरीज का समीकरण पूरी तरह बदल गया है।
ओल्ड ट्रैफर्ड की शाम भारतीय खेमे के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रही। 191 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा करने के बाद, भारतीय गेंदबाज मैच पर पकड़ बनाए हुए थे। 16 ओवरों के बाद इंग्लैंड का स्कोर 5 विकेट पर 142 रन था और उन्हें जीत के लिए 24 गेंदों में 49 रनों की दरकार थी। मैच का रुख पूरी तरह भारत की तरफ झुका था, लेकिन 17वें ओवर में सब कुछ बदल गया।
जैकब बेथेल का प्रहार और रवि बिश्नोई की चूक
रवि बिश्नोई के लिए यह ओवर करियर का सबसे कठिन इम्तिहान साबित हुआ। ओवर की पहली ही गेंद पर अंपायर ने नो-बॉल का इशारा किया। हालांकि उनका आगे वाला पैर सही था, लेकिन पिछला पैर रिटर्न क्रीज से बाहर होने के कारण यह 'बैकफुट नो-बॉल' करार दी गई। जैकब बेथेल ने इस मौके को भुनाते हुए फ्री-हिट पर छक्का जड़ दिया। बिश्नोई की अगली गेंद पर भी वही गलती दोहराई गई और एक बार फिर फ्री-हिट पर बेथेल ने गेंद को बाउंड्री के पार भेज दिया।
उस एक ओवर में कुल 29 रन बने, जिसमें चार छक्के और एक चौका शामिल था। जैकब बेथेल ने धैर्य और आक्रामकता का बेहतरीन तालमेल दिखाते हुए 76 रनों की नाबाद पारी खेली और इंग्लैंड को 19वें ओवर में ही लक्ष्य तक पहुंचा दिया। इस 17वें ओवर के बाद इंग्लैंड को जीत के लिए केवल 20 रनों की जरूरत थी, जिसने मैच की दिशा पूरी तरह मोड़ दी।
यह हार क्यों मायने रखती है?
यह मुकाबला भारतीय स्पिन विभाग के लिए चिंता का विषय बन गया है। T20 इंटरनेशनल क्रिकेट के इतिहास में यह किसी भारतीय स्पिनर द्वारा फेंका गया अब तक का सबसे महंगा ओवर है। इससे पहले सुरेश रैना ने 2012 में न्यूजीलैंड के खिलाफ एक ओवर में 26 रन दिए थे, लेकिन बिश्नोई के 29 रनों ने उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। यह ओवर न केवल मैच का टर्निंग पॉइंट रहा, बल्कि सीरीज में भी इंग्लैंड को 1-0 की बढ़त दिला दी।
एक पैटर्न की आहट
हालिया दौर में भारत और इंग्लैंड के बीच हुए मुकाबलों पर गौर करें तो मैचों का परिणाम अक्सर छोटे-छोटे व्यक्तिगत फैसलों या तकनीकी चूकों पर टिका रहा है। चाहे वह लॉर्ड्स टेस्ट में ऋषभ पंत का रन-आउट हो या फिर बर्मिंघम में वाशिंगटन सुंदर का वह ओवर जिसने बाजी पलट दी थी, यह साफ है कि दबाव के क्षणों में मानसिक मजबूती ही अंतर पैदा करती है। मैनचेस्टर में बिश्नोई की नो-बॉल और उसके बाद बेथेल का आक्रामक रुख यह बताता है कि टी20 प्रारूप में एक ओवर की अनुशासनहीनता पूरे मैच का परिणाम बदलने के लिए काफी है। टीम इंडिया के लिए अब अगली चुनौती अपनी लय को दोबारा हासिल करने की होगी।
प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।