भारत की हार में सिर्फ रवि बिश्नोई ही नहीं, इस गेंदबाज का 'महंगा' स्पेल भी बना मुसीबत
रवि बिश्नोई ही नहीं, ये गेंदबाज भी है भारत की हार का गुनहगार; एक ओवर में खर्च किए 27 रन
इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी20 में मिली शिकस्त के बाद टीम इंडिया की गेंदबाजी लाइन-अप पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल, क्या टीम का संतुलन बिगड़ गया है?
इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मैच में मिली 4 विकेट की हार के बाद से हर तरफ रवि बिश्नोई के उस 17वें ओवर की चर्चा है, जिसमें उन्होंने 29 रन लुटा दिए थे। मैनचेस्टर की पिच पर 190 रनों का स्कोर डिफेंड करने उतरी भारतीय टीम के लिए जैकब बेथेल की तूफानी बल्लेबाजी और बिश्नोई की खराब लाइन-लेंथ मैच का निर्णायक मोड़ साबित हुई। हालांकि, अगर हार की पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखें, तो गुनाहगारों की फेहरिस्त में केवल बिश्नोई अकेले नहीं हैं। टीम इंडिया की इस हार में अर्शदीप सिंह का वह दूसरा ओवर भी उतना ही घातक साबित हुआ, जिसमें उन्होंने 27 रन खर्च कर दिए थे।
कहां से पलटा मैच का पासा?
आकाश चोपड़ा जैसे विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की हार की पटकथा काफी पहले लिखी जा चुकी थी। अर्शदीप सिंह ने अपने पहले ओवर में तो शानदार शुरुआत की थी, जहां उन्होंने मात्र 1 रन देकर दो विकेट चटकाए थे। लेकिन पारी के तीसरे ओवर में इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक ने उनके खिलाफ दो चौके और तीन छक्के जड़कर दबाव पूरी तरह से भारत पर डाल दिया। अर्शदीप का वह 27 रनों का ओवर और बाद में बिश्नोई का 29 रनों वाला 17वां ओवर—कुल मिलाकर दो ओवरों में 56 रन लुटाना किसी भी टी20I मुकाबले में हार का बड़ा कारण बनने के लिए काफी था।
क्यों गिर रही है टीम की परफॉर्मेंस?
टी20 वर्ल्ड कप 2026 जीतने के बाद से भारतीय टीम की लय अचानक से भटक गई है। श्रेयस अय्यर की कप्तानी में टीम पिछले चार मैचों में से तीन हार चुकी है, और एक मैच बारिश की भेंट चढ़ गया। यह 'जीत का सूखा' केवल गेंदबाजों की व्यक्तिगत गलती नहीं, बल्कि टीम की सामूहिक विफलता की ओर इशारा करता है। वर्ल्ड कप से पहले जो टीम अजेय दिख रही थी, आज उसी टीम को डेथ ओवरों में विकेट लेने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
विश्लेषण: बड़ी कहानी में छुपी छोटी चूक
क्यों यह हार चिंता का विषय है? भारत की मुख्य समस्या 16वें और 17वें ओवर में रही। एक तरफ जहां इंग्लैंड ने अपनी गेंदबाजी के दौरान इन ओवर्स में महज 9 रन खर्च किए, वहीं भारत ने इसी फेज में 39 रन लुटा दिए। बिश्नोई द्वारा फेंकी गई तीन नो-बॉल्स ने यह साफ कर दिया कि दबाव की स्थिति में टीम की अनुशासनहीनता बढ़ रही है। बिश्नोई, जो हाल ही में टी20I रैंकिंग में ऊपर आए थे, उन्हें अब अपनी लाइन-लेंथ पर फिर से काम करना होगा, क्योंकि अगले मैच में प्लेइंग इलेवन में उनकी जगह पर तलवार लटक रही है।
अर्शदीप और बिश्नोई जैसे गेंदबाजों का टॉप-10 रैंकिंग में होना यह बताता है कि प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन निरंतरता (consistency) अब टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। 7 जुलाई को नॉटिंघम के ट्रेंट ब्रिज में होने वाला तीसरा मैच न केवल सीरीज बचाने के लिए, बल्कि टीम के मनोबल को वापस पाने के लिए भी बेहद अहम होगा।
प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।