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प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर महाराष्ट्र विधानसभा में गरमाया माहौल, विपक्ष का बहिर्गमन

महाराष्ट्र विधानसभा में टीईटी प्रश्नपत्र लीक को लेकर विपक्षी विधायकों का जोरदार हंगामा, सदन से बहिर्गमन

द्वारा प्रिया नायरप्रकाशित 29 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर महाराष्ट्र विधानसभा में गरमाया माहौल, विपक्ष का बहिर्गमन
प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर महाराष्ट्र विधानसभा में गरमाया माहौल, विपक्ष का बहिर्गमन

शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) और नीट (NEET) में धांधली के आरोपों के बीच विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सदन से वॉकआउट किया।

विधान भवन की सीढ़ियों पर आज का नजारा सरकार के लिए असहज करने वाला था। महाराष्ट्र विधानसभा के भीतर और बाहर जिस तरह से शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) और नीट (NEET) के प्रश्नपत्र लीक होने का मुद्दा गूंजा, उसने राज्य में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के नेता एक सुर में सरकार को घेरते नजर आए।

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने प्रश्नपत्र लीक को एक 'संस्थागत विफलता' करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर है, जबकि सरकार केवल लीपापोती कर रही है। विपक्ष का आरोप है कि प्रश्नपत्र लीक मामले में शामिल गिरोहों के तार राजनीतिक संरक्षण से जुड़े हैं। वडेट्टीवार ने 2018 के टीईटी घोटाले का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस मामले के एक आरोपी का बाद में भाजपा में शामिल होना इस पूरे नेटवर्क की गहराई को दर्शाता है।

परीक्षा प्रणाली पर बढ़ता अविश्वास

विपक्ष का आक्रोश सिर्फ परीक्षा रद्द होने या लीक होने तक सीमित नहीं है। वे महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं को ऑनलाइन आयोजित करने के सरकार के हालिया फैसले का भी कड़ा विरोध कर रहे हैं। सतेज पाटिल, अंबादास दानवे और जितेंद्र आव्हाड जैसे वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी बदलाव और बाहरी एजेंसियों की संलिप्तता पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के बजाय और अधिक संदेहास्पद बना रही है।

स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने सदन में स्पष्ट किया कि सरकार इस मामले पर एक विस्तृत बयान जारी करेगी। हालांकि, विपक्ष इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुआ। उनका कहना था कि जब तक पूरी परीक्षा एजेंसी और उससे जुड़े कथित नेटवर्क की व्यापक जांच नहीं होती, तब तक कोई भी बयान केवल एक औपचारिकता मात्र है। चर्चा की अनुमति न मिलने और जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने अंततः सदन से बहिर्गमन करना ही बेहतर समझा।

क्या है इस हंगामे के पीछे की असल तस्वीर?

क्यों यह मामला महज एक सियासी शोर नहीं है? यह समझना जरूरी है कि प्रश्नपत्र लीक का मुद्दा बार-बार उभरना राज्य के प्रशासनिक तंत्र पर सवालिया निशान लगाता है। जब भी ऐसी घटनाएं होती हैं, तो इसका सीधा असर सरकारी भर्ती प्रक्रिया पर पड़ता है। बार-बार परीक्षाएं रद्द होने और जांच के अंतहीन चक्र में उलझने से राज्य के लाखों युवाओं के बीच निराशा बढ़ती है।

इस घटनाक्रम का महत्व यह है कि यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। आगामी चुनावों के मद्देनजर, युवाओं के बीच अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए सरकार के लिए यह जरूरी है कि वह सिर्फ जांच के आदेश न दे, बल्कि दोषियों के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई करे। यदि सरकार ने इस मुद्दे पर ठोस जवाबदेही तय नहीं की, तो आने वाले सत्रों में यह विवाद और अधिक गहरा सकता है।

द्वारा प्रिया नायर
राजनीतिक संवाददाता

प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।