IGI एयरपोर्ट पर तूफान का कहर: ग्राउंड इक्विपमेंट से टकराकर एयर इंडिया के तीन विमान क्षतिग्रस्त
दिल्ली एयरपोर्ट पर बारिश और तेज हवाओं के बीच ग्राउंड इक्विपमेंट से टकराए एयर इंडिया के 3 विमान
दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अचानक चली तेज हवाओं ने भारी ग्राउंड मशीनरी को अपनी जगह से हटा दिया, जिससे खड़े हुए एयर इंडिया के तीन विमानों को नुकसान पहुंचा।
दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGIA) पर कल उस समय अफरा-तफरी मच गई जब राजधानी में अचानक एक भीषण तूफान आया। हवा की गति बढ़ने के साथ ही ग्राउंड इक्विपमेंट—जिसमें इंडिगो की एक सीढ़ी (stepladder) भी शामिल थी—अपनी जगह से खिसक गई और खड़े हुए एयर इंडिया के तीन विमानों से जा टकराई। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे भारी मशीनें हवा के झोंकों के साथ एप्रन पर इधर-उधर लुढ़क रही हैं और अंततः खड़े विमानों से टकरा जाती हैं।
यह घटना उस समय हुई जब उत्तर भारत भीषण मौसम की मार झेल रहा है, जिसके कारण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में व्यापक व्यवधान पैदा हुआ है। एयरपोर्ट पर हुए नुकसान के अलावा, शहर के अन्य हिस्सों में भी तूफान जानलेवा साबित हुआ। पेड़ गिरने, ढांचे ढहने और बिजली के खंभे उखड़ने की घटनाओं में दो लोगों की मौत की खबर है और कम से कम 11 लोग घायल हुए हैं।
परिचालन में भारी गड़बड़ी
मौसम का असर केवल विमानों को हुए भौतिक नुकसान तक ही सीमित नहीं रहा। एयरपोर्ट पर लॉजिस्टिक्स पूरी तरह चरमरा गया, जिससे कम से कम 50 उड़ानें देरी से चलीं और 13 उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ा। टर्मिनल 3 पर मौजूद यात्रियों ने 'भगदड़ जैसी स्थिति' का वर्णन किया। कई यात्रियों का कहना था कि मौसम में अचानक आए बदलाव के कारण ग्राउंड क्रू तैयार नहीं था, जिसके चलते वे घंटों तक टरमैक पर फंसे रहे।
तूफान के दौरान बुनियादी ढांचे की स्थिति ने सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि मुख्य मुद्दा एयर इंडिया के विमानों का क्षतिग्रस्त होना है, लेकिन यात्रियों का फंसना और उड़ानों का डायवर्ट होना इस बात को दर्शाता है कि दिल्ली का एविएशन हब अप्रत्याशित और चरम मौसम के प्रति कितना संवेदनशील है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि भारी हवाई यातायात और उत्तर भारत के बदलते जलवायु के बीच संतुलन कितना नाजुक है। जब बारिश और तेज हवाओं के बीच ग्राउंड इक्विपमेंट के कारण दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान क्षतिग्रस्त होते हैं, तो यह केवल एयरलाइंस के लिए बीमा या रखरखाव का मुद्दा नहीं रह जाता, बल्कि यह एयरफील्ड की आपदा तैयारियों की विफलता को भी दर्शाता है।
जैसे-जैसे जलवायु पैटर्न अनिश्चित होते जा रहे हैं, एयरपोर्ट अधिकारियों पर यह दबाव बढ़ेगा कि वे अचानक आने वाले तूफानों के दौरान भारी उपकरणों को सुरक्षित रखने के तरीकों का ऑडिट करें। दिल्ली जैसे व्यस्त हब में विमानन सुरक्षा को लेकर केवल प्रतिक्रियावादी नहीं हुआ जा सकता। इस हफ्ते देखी गई 'तूफानी अराजकता' यह बताती है कि बेहतर टेदरिंग प्रोटोकॉल और त्वरित प्रतिक्रिया प्रबंधन की तत्काल आवश्यकता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि तेज हवाएं चलने पर गेट पर खड़े विमान किसी खिलौने की तरह इधर-उधर न टकराएं।
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