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मुश्किल में 'स्पाई यूनिवर्स': क्या 'अल्फा' की सुस्त शुरुआत फ्रैंचाइज़ी के लिए खतरे की घंटी है?

अल्फा की बॉक्स ऑफिस पर कमजोर शुरुआत और मिली-जुली प्रतिक्रिया

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 4 जुलाई 2026· 2 मिनट पढ़ें
मुश्किल में 'स्पाई यूनिवर्स': क्या 'अल्फा' की सुस्त शुरुआत फ्रैंचाइज़ी के लिए खतरे की घंटी है?
मुश्किल में 'स्पाई यूनिवर्स': क्या 'अल्फा' की सुस्त शुरुआत फ्रैंचाइज़ी के लिए खतरे की घंटी है?

आलिया भट्ट की लेटेस्ट स्पाई थ्रिलर को बॉक्स ऑफिस पर ठंडी प्रतिक्रिया मिली है, जिससे एक समय के अजेय रहे इस सिनेमैटिक ब्रांड के भविष्य पर सवालिया निशान लग गए हैं।

यश राज फिल्म्स (YRF) का स्पाई यूनिवर्स, जो कभी बंपर ओपनिंग की गारंटी माना जाता था, अब एक रुकावट का सामना कर रहा है। आलिया भट्ट और शरवरी अभिनीत महत्वाकांक्षी फीमेल-लेड स्पाई थ्रिलर 'अल्फा' 3 जुलाई को भारी उम्मीदों और इंडस्ट्री की बढ़ती चिंता के बीच सिनेमाघरों में रिलीज हुई। हालांकि फिल्म ने अपने पहले दिन लगभग ₹9.25 करोड़ का घरेलू नेट कलेक्शन किया, लेकिन ये आंकड़े बताते हैं कि फ्रैंचाइज़ी की मास ऑडियंस पर पकड़ ढीली पड़ रही है।

बॉक्स ऑफिस पर सुस्त शुरुआत

इतने बड़े पैमाने पर बनी फिल्म—जो स्पाई यूनिवर्स की सातवीं कड़ी है—के लिए दस करोड़ से कम की ओपनिंग एक बड़ा झटका है। तकनीकी रूप से फिल्म ने आलिया की पिछली रिलीज 'राजी' और 'जिगरा' से बेहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन 'पठान' या 'टाइगर 3' जैसी फिल्मों की शानदार और रिकॉर्ड-तोड़ शुरुआत के सामने यह काफी फीकी है। ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है कि दिल्ली-एनसीआर और मुंबई जैसे मेट्रो शहरों में फिल्म को ठीक-ठाक दर्शक मिले, लेकिन छोटे बाजारों में इसकी रफ्तार काफी धीमी रही।

फिल्म 'अल्फा' पर एक भारी जिम्मेदारी थी: यह फ्रैंचाइज़ी का पहला ऐसा प्रयोग था जिसमें स्थापित मेल-लेड एक्शन फॉर्मूले से हटकर कुछ करने की कोशिश की गई। समीक्षकों ने रिस्पॉन्स में एक बड़ा अंतर देखा है। जहां कई लोगों ने शरवरी की स्क्रीन प्रेजेंस और हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट सीक्वेंस की तकनीकी कोरियोग्राफी की तारीफ की है, वहीं फिल्म को इसकी कमजोर पटकथा और पेसिंग के लिए काफी आलोचना झेलनी पड़ी है। कुछ दर्शकों ने सोशल मीडिया पर फिल्म के 'दिखावटी' सौंदर्य पर निराशा जताई है, तो कुछ ने उदय चोपड़ा को दिए गए क्रिएटिव क्रेडिट्स पर सवाल उठाए हैं।

यह क्यों मायने रखता है: एक दोराहे पर खड़ी फ्रैंचाइज़ी

यह प्रदर्शन सिर्फ बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों से कहीं बढ़कर है; यह हिंदी सिनेमा में स्पाई जॉनर को लेकर बढ़ती थकान को दर्शाता है। दर्शकों की 'स्पेक्टेकल-लेड' स्पाई कहानियों के लिए भूख कम होती दिख रही है। जब हाई-बजट फिल्में लगातार औसत रिटर्न देती हैं, तो प्रोडक्शन हाउस को फॉर्मूला-आधारित 'यूनिवर्स' बनाने पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

बड़ी तस्वीर साफ है: 'अल्फा' की रिलीज यह बताती है कि स्टार पावर और ब्रांड का नाम अब सफलता की गारंटी नहीं है। यदि YRF स्पाई यूनिवर्स को टिके रहना है, तो उसे अपनी पुरानी सफलताओं वाले अति-स्टाइलिश एक्शन से हटकर बेहतर और ठोस कहानी पर ध्यान देना होगा। जैसे-जैसे फिल्म अपने पहले वीकेंड में प्रवेश कर रही है, शुरुआती आंकड़ों को बनाए रखने की इसकी क्षमता ही यह तय करेगी कि क्या दर्शक इस फ्रैंचाइज़ी की नई दिशा को अपनाने के लिए तैयार हैं, या फिर 'स्पाईवर्स' का दौर अब खत्म हो चुका है।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।