Politicalpedia
राष्ट्रीय

सोनीपत के किसान 23वीं किस्त के इंतजार में: डिजिटल बाधाओं और जमीनी हकीकत का सामना

पीएम किसान निधि: 83 हजार किसानों के खातों में कल आएगी 23वीं किस्त, तैयारी पूरी

द्वारा अनन्या अय्यरप्रकाशित 19 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
सोनीपत के किसान 23वीं किस्त के इंतजार में: डिजिटल बाधाओं और जमीनी हकीकत का सामना
सोनीपत के किसान 23वीं किस्त के इंतजार में: डिजिटल बाधाओं और जमीनी हकीकत का सामना

जैसे-जैसे सोनीपत पीएम-किसान की 23वीं किस्त के लिए तैयार हो रहा है, 20,000 किसान ई-केवाईसी और दस्तावेजों की कमी के कारण इस लाभ से वंचित रह गए हैं।

सोनीपत के किसानों के लिए यह शनिवार केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं है; यह प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त के आने का दिन है। खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच यह राशि उनके लिए एक महत्वपूर्ण सहारा है। कृषि विभाग ने 83,000 स्थानीय किसानों के लिए भुगतान को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उस समय नकदी का प्रवाह बढ़ाना है जब मिट्टी को इसकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है।

यह मूल लेख इस बात पर प्रकाश डालता है कि हालांकि फंड जारी होने के लिए तैयार है, लेकिन यह वितरण प्रक्रिया राज्य द्वारा कल्याणकारी योजनाओं के प्रबंधन में आए बड़े बदलाव को दर्शाती है। सरकार अब "एग्रीस्टैक" (AgriStack) डिजिटल पहचान पहल को पीएम-किसान पोर्टल के साथ तेजी से जोड़ रही है। केंद्रीकृत "फार्मर आईडी" की ओर यह कदम डेटा को सुव्यवस्थित करने के लिए है, लेकिन इसने एक फिल्टर के रूप में भी काम किया है, जिससे प्रशासनिक बैकलॉग की समस्याएं सामने आई हैं।

डिजिटल खाई

वितरण के आंकड़ों के पीछे एक कड़वी सच्चाई यह है कि जिले के लगभग 20,000 पंजीकृत किसान वर्तमान में इस योजना से बाहर हैं। उप कृषि निदेशक वीरेंद्र आर्य के अनुसार, इन खातों के निष्क्रिय होने का मुख्य कारण प्रक्रियात्मक है—जैसे लंबित ई-केवाईसी, आधार लिंक न होना, या कुछ मामलों में लाभार्थी की मृत्यु।

विभाग अपात्र दावों को बाहर करने के लिए भौतिक सत्यापन भी कर रहा है, विशेष रूप से उन मामलों में जहां पति-पत्नी दोनों एक ही परिवार के तहत पंजीकृत हैं। चूंकि नीति के अनुसार प्रति परिवार केवल एक व्यक्ति ही अनुदान के लिए पात्र है, इसलिए ये ऑडिट उन परिवारों के लिए परेशानी पैदा कर रहे हैं जो अनजाने में लाभ प्राप्त कर रहे थे।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

डिजिटल-फर्स्ट कृषि ढांचे की ओर वर्तमान बदलाव एक व्यापक राष्ट्रीय नीति को दर्शाता है। पीएम-किसान स्रोत डेटा को एक एकीकृत फार्मर आईडी से जोड़कर, सरकार केवल नकद हस्तांतरण से आगे बढ़कर एक अधिक तकनीकी-सक्षम कृषि नीति की ओर बढ़ने का प्रयास कर रही है। हालांकि, केवल सोनीपत में 20,000 निष्क्रिय खाते एक चेतावनी हैं। जब बुनियादी ढांचा डिजिटल साक्षरता और पहचान सत्यापन पर निर्भर करता है, तो अंतिम छोर पर मौजूद लोग—जो अक्सर सबसे कमजोर होते हैं—सबसे बड़ी बाधा का सामना करते हैं। यह इस बात को रेखांकित करता है कि एक विविध और अर्ध-साक्षर कृषि परिदृश्य में कल्याणकारी योजनाओं को लागू करना कितनी बड़ी चुनौती है, जहां तकनीकी खामियां अक्सर वास्तविक खाद्य असुरक्षा में बदल जाती हैं।

इस खाई को पाटने के लिए, स्थानीय प्रशासन इस शनिवार जगदीशपुर के कृषि विज्ञान केंद्र में एक आउटरीच कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इसका उद्देश्य दो गुना है: यह सुनिश्चित करना कि किसान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) की बारीकियों को समझें और उन्हें अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के बारे में शिक्षित करना। 83,000 लाभार्थियों के लिए, यह पैसा सीजन की एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन जो लोग डिजिटल दायरे से बाहर हैं, उनके लिए अपने भविष्य के अधिकारों को सुरक्षित करने का संघर्ष अभी शुरू ही हुआ है।

द्वारा अनन्या अय्यर
वैश्विक मामले संवाददाता

अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।