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टारमैक पर धुआं: जोरहाट एयरबेस पर भारतीय वायुसेना का AN-32 विमान दुर्घटनाग्रस्त

असम के जोरहाट में भारतीय वायुसेना का AN-32 ट्रांसपोर्ट विमान क्रैश

द्वारा रोहन गुप्ताप्रकाशित 13 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
टारमैक पर धुआं: जोरहाट एयरबेस पर भारतीय वायुसेना का AN-32 विमान दुर्घटनाग्रस्त
टारमैक पर धुआं: जोरहाट एयरबेस पर भारतीय वायुसेना का AN-32 विमान दुर्घटनाग्रस्त

असम के जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन पर लैंडिंग के दौरान भारतीय वायुसेना के एक AN-32 ट्रांसपोर्ट विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद आपातकालीन टीमें मौके पर पहुंच गई हैं।

भारतीय वायुसेना का 'वर्कहॉर्स' कहे जाने वाले AN-32 विमान की गूंज आज असम के जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन पर अचानक थम गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रांसपोर्ट विमान बेस पर लैंडिंग की कोशिश के दौरान एक गंभीर दुर्घटना का शिकार हो गया। घटनास्थल से सामने आई तस्वीरों में विमान आग की लपटों में घिरा हुआ दिखाई दे रहा है।

हालांकि दुर्घटना के सटीक कारणों की जांच की जा रही है, लेकिन घटना के तुरंत बाद ग्राउंड क्रू ने मोर्चा संभाल लिया है। आपातकालीन टीमें फिलहाल आग बुझाने में जुटी हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में चालक दल की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई है, लेकिन रक्षा मंत्रालय की ओर से पायलटों और कर्मियों की स्थिति के बारे में आधिकारिक पुष्टि का अभी भी इंतजार है।

जांच के घेरे में 'वर्कहॉर्स'

AN-32 दशकों से भारतीय बेड़े का मुख्य हिस्सा रहा है। इसका मुख्य काम लॉजिस्टिकल सपोर्ट देना और दुर्गम इलाकों, विशेषकर पूर्वोत्तर में सैनिकों और उपकरणों को पहुंचाना है। अपनी मजबूत बनावट के कारण यह ऊंचे पहाड़ी इलाकों में संचालन के लिए पहली पसंद रहा है। हालांकि, इस पुराने बेड़े में तकनीकी खराबी और दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाओं ने रक्षा हलकों में बेड़े के आधुनिकीकरण की जरूरत पर बहस छेड़ दी है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

यह दुर्घटना केवल एक स्थानीय घटना नहीं है, बल्कि इसने रक्षा खरीद की व्यापक बहस को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। भारतीय वायुसेना के लिए चुनौती यह है कि वह विशाल और भौगोलिक रूप से विविध सीमाओं की परिचालन आवश्यकताओं और अपने पुराने होते ट्रांसपोर्ट बेड़े की सीमाओं के बीच संतुलन कैसे बनाए। जैसे-जैसे वायुसेना पुराने प्लेटफॉर्म्स को हटाने की दिशा में बढ़ रही है, जोरहाट जैसी घटनाएं यह रेखांकित करती हैं कि पुराने सिस्टम को उनकी निर्धारित आयु से अधिक समय तक सेवा में रखने के क्या जोखिम हो सकते हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि क्या यह यांत्रिक विफलता थी, मानवीय भूल थी, या जोरहाट एयरफील्ड पर संचालन की चुनौतियां थीं।

उम्मीद है कि खोज और बचाव अभियान पूरा होने के बाद अधिकारी औपचारिक बयान जारी करेंगे। फिलहाल, पूरा ध्यान दुर्घटनास्थल पर स्थिति को नियंत्रित करने और प्रभावित सैन्य कर्मियों की सुरक्षा पर केंद्रित है।

द्वारा रोहन गुप्ता
बिज़नेस संवाददाता

रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।