आसमान में छाई खामोशी: इजरायल और हिजबुल्ला ने आखिरकार युद्धविराम क्यों किया?
इजरायल-हिजबुल्ला में सीजफायर, लेबनान में लौटेगी शांति, क्या अमेरिकी दबाव काम कर गया?
हफ्तों की भीषण सीमा पार गोलाबारी के बाद, इजरायल और हिजबुल्ला के बीच एक नाजुक युद्धविराम लागू हो गया है, जिसे पर्दे के पीछे की जटिल कूटनीति के जरिए संभव बनाया गया है।
इजरायल और लेबनान के बीच सीमा पर तोपों की गड़गड़ाहट इस शुक्रवार दोपहर को असामान्य रूप से शांत हो गई। स्थानीय समयानुसार शाम 4:00 बजे, इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) और हिजबुल्ला के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित युद्धविराम औपचारिक रूप से शुरू हो गया। यह कदम पर्दे के पीछे हुई गहन बातचीत के बाद उठाया गया है, जिसमें कतर, अमेरिका और सबसे महत्वपूर्ण रूप से ईरान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई, ताकि क्षेत्र को एक बड़े युद्ध की कगार से वापस लाया जा सके।
यह कूटनीतिक सफलता बाधाओं से मुक्त नहीं थी। सूत्रों का कहना है कि ईरान और अमेरिकी अधिकारियों के बीच स्विट्जरलैंड में होने वाला एक नियोजित शिखर सम्मेलन हिंसा बढ़ने के कारण पटरी से उतर गया था, जिससे मध्यस्थों को शर्तों को अंतिम रूप देने के लिए अन्य माध्यमों पर निर्भर रहना पड़ा। हालांकि जमीन पर छाई यह खामोशी लेबनान और इजरायल के सीमावर्ती समुदायों के लिए उम्मीद की एक किरण लेकर आई है, लेकिन माहौल अभी भी काफी नाजुक बना हुआ है।
अमेरिकी प्रभाव और 'ट्रंप' फैक्टर
इस ठहराव में अमेरिका की भूमिका को कम करके नहीं आंका जा सकता। वाशिंगटन तनाव कम करने के लिए सभी पक्षों पर भारी दबाव बना रहा था। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी प्रशासन और आने वाले नेतृत्व की ओर से दी गई प्रतिक्रिया ने मौजूदा स्थिति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जेडी वेंस (JD Vance) ने इजरायल को यह याद दिलाने में मुखर रहे हैं कि उसकी रणनीतिक सुरक्षा अमेरिका के साथ उसके संबंधों से गहराई से जुड़ी है, और उन्होंने संयम बरतने व अमेरिकी कूटनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप चलने का आग्रह किया है।
इसी तरह, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अपनाए गए सख्त रुख का भी तेल अवीव पर असर पड़ता दिख रहा है, जिन्होंने बार-बार लेबनान में बल के अत्यधिक प्रयोग के खिलाफ चेतावनी दी थी। संघर्ष को इजरायल-अमेरिका गठबंधन की परीक्षा के रूप में पेश करके, वाशिंगटन ने प्रभावी ढंग से संकेत दिया कि एकतरफा और आक्रामक सैन्य कार्रवाइयों को अब बिना शर्त समर्थन नहीं मिलेगा।
एक नाजुक स्थिति
समझौते के बावजूद, IDF ने अपना सख्त रुख बरकरार रखा है। युद्धविराम से कुछ घंटे पहले आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, IDF के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि हालांकि सेना इस ठहराव का पालन करेगी, लेकिन वह हाई अलर्ट पर रहेगी। अधिकारी ने कहा कि IDF अगले हमले का इंतजार नहीं करेगी और युद्धविराम के किसी भी उल्लंघन का जवाब देने का अपना अधिकार सुरक्षित रखती है। यह israel hezbollah संघर्ष की वास्तविकता है: तनाव का मुख्य कारण इजरायली नागरिक घरों के करीब उग्रवादी बुनियादी ढांचे की मौजूदगी है, एक ऐसा कारक जो शांति को हमेशा खतरे में रखता है।
बड़ी तस्वीर
यह महत्वपूर्ण क्यों है? भारत और व्यापक वैश्विक समुदाय के लिए, यह ठहराव एक महत्वपूर्ण 'सर्किट ब्रेकर' है। मध्य पूर्व एक ऐसे क्षेत्रीय युद्ध के कगार पर था जो वैश्विक ऊर्जा बाजारों और व्यापार मार्गों को अस्थिर कर सकता था। हिजबुल्ला के मुख्य समर्थक ईरान को बातचीत में शामिल करके, अमेरिका और कतर ने साबित कर दिया है कि अत्यधिक शत्रुता के माहौल में भी, जब पूर्ण युद्ध की कीमत सभी पक्षों के लिए बहुत अधिक हो जाती है, तो व्यावहारिक रूप से तनाव कम करना संभव है।
हालांकि, युद्धविराम शायद ही कभी समाधान होता है; यह केवल सैन्य गतिविधियों का निलंबन है। अंतर्निहित मुद्दे—सीमा पार सुरक्षा दुविधाएं और गैर-राज्य अभिनेताओं की मौजूदगी—अभी भी अनसुलझे हैं। यह घटनाक्रम क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक 'प्राथमिक' जीत है, लेकिन जैसे-जैसे धूल जमेगी, असली परीक्षा यह होगी कि क्या ये पर्दे के पीछे की बातचीत एक अधिक टिकाऊ और दीर्घकालिक राजनीतिक व्यवस्था में बदल सकती है।
अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।