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शिशिर खनाल का संतुलन: भारत यात्रा के बाद अब चीन के दौरे पर नेपाल के विदेश मंत्री

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल जून के मध्य में चीन का दौरा करेंगे

द्वारा फ़ीचर्स डेस्कप्रकाशित 8 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
शिशिर खनाल का संतुलन: भारत यात्रा के बाद अब चीन के दौरे पर नेपाल के विदेश मंत्री
शिशिर खनाल का संतुलन: भारत यात्रा के बाद अब चीन के दौरे पर नेपाल के विदेश मंत्री

नई दिल्ली की कूटनीतिक यात्रा से लौटने के तुरंत बाद, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल अपने उत्तरी पड़ोसी देश के साथ संबंधों को फिर से साधने के लिए बीजिंग की दो दिवसीय महत्वपूर्ण यात्रा की तैयारी कर रहे हैं।

काठमांडू में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारत के अपने तीन दिवसीय 'सफल' दौरे से लौटने के बमुश्किल एक हफ्ते बाद, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल एक बार फिर विदेश यात्रा पर निकल रहे हैं। उनके सचिवालय के सूत्रों ने पुष्टि की है कि खनाल 15 और 16 जून को चीन की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा करेंगे। यह कदम उस नाजुक संतुलन को दर्शाता है जिसे नेपाल अपने दो विशाल पड़ोसियों के बीच बनाए रखने की कोशिश करता है।

हालांकि काठमांडू में विदेश मंत्रालय ने अभी तक यात्रा कार्यक्रम के बारे में कोई औपचारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं की है, लेकिन संकेत स्पष्ट हैं। बीजिंग में खनाल का एजेंडा काफी व्यस्त रहने की उम्मीद है। वह अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ द्विपक्षीय चर्चा करेंगे और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के अंतरराष्ट्रीय विभाग के प्रमुख लियू हैक्सिंग के साथ भी बैठक करेंगे। उच्च-स्तरीय बातचीत के अलावा, मंत्री 16 जून को राजधानी लौटने से पहले चीन में रहने वाले नेपाली प्रवासियों के साथ बातचीत के लिए भी समय निकालेंगे।

क्षेत्रीय कूटनीति की नब्ज

यह सक्रियता खनाल की हालिया भारत यात्रा के बाद आई है, जो 7 जून को संपन्न हुई थी। इतनी जल्दी नई दिल्ली और बीजिंग दोनों के साथ जुड़कर, मंत्री स्पष्ट रूप से यह संकेत दे रहे हैं कि नेपाल सक्रिय और संतुलित जुड़ाव को प्राथमिकता दे रहा है। जहां उनकी दिल्ली यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने के ठोस कदमों पर केंद्रित थी, वहीं जून में होने वाली चीन यात्रा एक महत्वपूर्ण संतुलन बनाने का काम करेगी।

यह समय काठमांडू के आंतरिक राजनीतिक माहौल को देखते हुए विशेष रूप से उल्लेखनीय है। खबरों के अनुसार, प्रधानमंत्री बालेन शाह के अपने कार्यकाल के पहले 100 दिनों के दौरान अंतरराष्ट्रीय यात्राओं से दूरी बनाए रखने के कारण, विदेश नीति के मोर्चे पर भारी जिम्मेदारी पूरी तरह से खनाल के कंधों पर आ गई है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

यह कूटनीतिक दौड़ केवल औपचारिक शिष्टाचार का आदान-प्रदान नहीं है; यह हिमालय की गोद में बसे एक राष्ट्र के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता है। बुनियादी ढांचे में निवेश, व्यापारिक रियायतें और विकास सहायता हासिल करने की नेपाल की क्षमता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि वह भारत और चीन दोनों को बातचीत की मेज पर कैसे बनाए रखता है।

एक ही महीने में दोनों राजधानियों का दौरा करके, विदेश मंत्री खनाल नेपाल को उस 'जीरो-सम गेम' (एक की जीत, दूसरे की हार) की धारणा से दूर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं, जो अक्सर क्षेत्रीय संबंधों को प्रभावित करती है। हालांकि, असली परीक्षा यह होगी कि क्या ये आधिकारिक दौरे काठमांडू के लिए ठोस आर्थिक परिणाम ला पाते हैं। फिलहाल, दुनिया और पड़ोसी देश यह देख रहे हैं कि क्या यह दोहरी कूटनीति नेपाल को उसकी जटिल भू-राजनीतिक वास्तविकता को प्रबंधित करने के लिए आवश्यक स्थिरता प्रदान कर सकती है।

द्वारा फ़ीचर्स डेस्क
संस्कृति, तकनीक और जीवन

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