मणिका बत्रा के एशियन गेम्स से बाहर होने पर शरत कमल की प्रतिक्रिया: नियम और वास्तविकता के बीच संतुलन
मणिका के चयन विवाद पर शरत ने साधी चुप्पी, कहा- देश का प्रतिनिधित्व सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को ही करना चाहिए
राष्ट्रीय टेबल टेनिस टीम के चयन को लेकर मचे घमासान के बीच, अनुभवी पैडलर अचंता शरत कमल ने कठोर क्वालीफाइंग नियमों और महाद्वीपीय स्तर पर भारत की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा को उतारने की आवश्यकता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है।
भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के गलियारों में इस शुक्रवार काफी गहमागहमी रही, लेकिन यह चर्चा केवल रणनीति और प्रशिक्षण तक सीमित नहीं थी। इस ताज़ा खेल विवाद के केंद्र में आगामी आइची-नागोया एशियन गेम्स के लिए मुख्य टीम से मणिका बत्रा का बाहर होना है। जहां टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया (TTFI) एक निश्चित चयन नीति का हवाला दे रहा है, वहीं स्टार एथलीट ने प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए हैं। इसने आंकड़ों की कठोरता और लंबे समय के प्रदर्शन की बारीकियों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।
आंकड़ों का खेल
विवाद की जड़ TTFI का चयन ढांचा है, जो एक विशिष्ट वेटेज तय करता है: 50% राष्ट्रीय रैंकिंग पर, 40% अंतरराष्ट्रीय विश्व रैंकिंग पर और 10% समिति के विवेक पर। चूंकि मणिका बत्रा ने घरेलू टूर्नामेंटों में भाग नहीं लिया था, इसलिए राष्ट्रीय रैंकिंग में उनकी अनुपस्थिति सबसे बड़ी बाधा बन गई। 10 जनवरी की कट-ऑफ तारीख तक, वह विश्व रैंकिंग में 51वें स्थान पर थीं—जो कि शीर्ष-50 की उस सीमा से ठीक बाहर है, जो उन्हें स्वतः प्रवेश दिला सकती थी।
IOA के एथलीट फोरम के दौरान अचंता शरत कमल ने प्रशासनिक निर्णय से एक सधी हुई दूरी बनाए रखी। उन्होंने कहा, "मैं इस पर ज्यादा कुछ नहीं कह सकता क्योंकि मैं चयन समिति का हिस्सा नहीं हूं," साथ ही उन्होंने प्रक्रिया को लेकर उपजी निराशा को भी स्वीकार किया। उन्होंने पुष्टि की कि महासंघ ने IOA से संपर्क किया था ताकि प्रवेश की समय सीमा को आगे बढ़ाने की संभावना तलाशी जा सके, जिससे रैंकिंग को प्रभावित करने वाले और इवेंट्स के लिए समय मिल सके, लेकिन टीम को अंतिम रूप देने की कठोर समय-सीमा के कारण गुंजाइश बहुत कम थी।
निरंतरता का सवाल
बत्रा के लिए, मुद्दा केवल नियमों का नहीं, बल्कि उनके कार्यान्वयन का है। अपने एक औपचारिक बयान में, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह पहली बार नहीं है जब वह शीर्ष स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पिछले चक्रों में भी, जो खिलाड़ी इसी तरह की रैंकिंग सीमा से बाहर थे, उन्हें विशेष परिस्थितियों में शामिल किया गया था। खेल मंत्रालय और IOA को संबोधित उनकी अपील इन मानदंडों के "पारदर्शी, समान और स्पष्ट रूप से दर्ज" अनुप्रयोग के लिए है, उनका तर्क है कि वर्तमान रैंकिंग के साथ-साथ पिछले प्रदर्शन को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
यह गतिरोध भारतीय खेल प्रशासन में बार-बार होने वाले घर्षण को उजागर करता है: डेटा-संचालित कठोर चयन मानदंडों और किसी एथलीट की साख की व्यक्तिपरक वास्तविकता के बीच संतुलन बनाने का संघर्ष। जब महासंघ टीम संरचना तय करने के लिए घरेलू भागीदारी पर बहुत अधिक निर्भर होते हैं, तो वे उन कुलीन खिलाड़ियों को दरकिनार करने का जोखिम उठाते हैं जो भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सर्किट पर ध्यान केंद्रित कर रहे होते हैं।
यदि पारदर्शिता सर्वोपरि नहीं है, तो ऐसे निष्कासन अनिवार्य रूप से पक्षपात के आरोपों को आमंत्रित करते हैं, भले ही नियम किताब के अनुसार ही लागू किए गए हों। यह मामला नीतिगत समीक्षा की ओर ले जाएगा या नहीं, यह देखना बाकी है, लेकिन यह एथलीटों की ओर से उस जवाबदेही की बढ़ती मांग को रेखांकित करता है जो उनके पेशेवर भविष्य को तय करती है। फिलहाल, शरत आशावादी बने हुए हैं और उनका सुझाव है कि अभी भी मौका पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, और गतिरोध को हल करने तथा सबसे मजबूत टीम को जापान भेजने का रास्ता निकाला जा सकता है।
अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।