सुरक्षा में कटौती पर घमासान: राबड़ी देवी के आवास पर RJD कार्यकर्ताओं ने संभाला मोर्चा
लालू परिवार ने सरकारी सुरक्षा लेने से किया इनकार, राबड़ी आवास पर तैनात हुए RJD कार्यकर्ता

एक नाटकीय राजनीतिक कदम उठाते हुए, लालू परिवार ने सरकारी सुरक्षा लेने से इनकार कर दिया है, जिसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री के आवास पर राज्य के सुरक्षाकर्मियों की जगह पार्टी कार्यकर्ताओं ने ले ली है।
पटना में इस हफ्ते राजनीतिक सरगर्मी तब और बढ़ गई जब RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के परिवार ने उन्हें दी गई सरकारी सुरक्षा को वापस करने का फैसला किया। Z+ सुरक्षा श्रेणी में कटौती के बाद, परिवार ने बचे हुए सुरक्षाकर्मियों को भी वापस भेज दिया। इस कदम ने 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास पर एक नया दृश्य पैदा कर दिया है, जहाँ अब RJD कार्यकर्ता हाथों में लाठियां लिए और पारंपरिक वेशभूषा में आवास की सुरक्षा करते और पहरा देते देखे जा सकते हैं।
सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव
राज्य द्वारा दी गई सुरक्षा, जिसे कथित तौर पर घटाकर Y-श्रेणी कर दिया गया था, उसे ठुकराने का निर्णय संशोधित व्यवस्था के प्रति असंतोष का सीधा परिणाम माना जा रहा है। जैसे ही परिवार ने सुरक्षाकर्मियों को वापस भेजा, राबड़ी आवास के गेट पर खाली हुई जगह को पार्टी के वफादार कार्यकर्ताओं ने भर दिया। समर्थकों की बड़ी भीड़, जिनमें से कई सिर पर पारंपरिक गमछा बांधे हुए हैं, वहां लगातार मौजूद हैं, जो यह संदेश दे रहे हैं कि वे सरकारी संसाधनों के बिना भी अपने नेताओं की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया
इस तनाव पर टिप्पणी करते हुए, RJD के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने कहा कि हालांकि सुरक्षा कवर की समीक्षा आधिकारिक मानकों के आधार पर समय-समय पर होती है, लेकिन यह प्रक्रिया ऐसी नहीं होनी चाहिए जिससे वरिष्ठ विपक्षी नेताओं का अपमान हो। मंडल ने जोर देकर कहा कि पार्टी इस घटनाक्रम के व्यापक निहितार्थों पर विचार कर रही है। जब उनसे पूछा गया कि क्या अन्य RJD विधायक या सांसद भी अपनी सुरक्षा छोड़ने का फैसला ले सकते हैं, तो उन्होंने संकेत दिया कि इस मामले पर पार्टी का औपचारिक निर्णय आने वाले दिनों में लिया जाएगा।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
यह गतिरोध RJD और वर्तमान प्रशासन के बीच आधिकारिक संपत्तियों और सुरक्षा को लेकर चल रहे विवाद का एक नया अध्याय है। माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है, खासकर इसलिए क्योंकि सुरक्षा को लेकर यह विवाद सरकारी बंगलों के आवंटन को लेकर हालिया सार्वजनिक खींचतान के बाद सामने आया है। जहां सरकार का तर्क है कि ऐसे आवास पैतृक संपत्ति नहीं हैं, वहीं RJD नेतृत्व इन प्रतीकात्मक कार्यों के जरिए अपना विरोध दर्ज करा रहा है। अपने कार्यकर्ताओं को आवास की सुरक्षा में तैनात करके, पार्टी सुरक्षा में कटौती को अपने समर्थकों के लिए एक रैली पॉइंट में बदल रही है, जो बिहार की राजनीति में गहरे मतभेदों को उजागर करता है।
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