Rajesh Exports की जांच: वित्तीय हेरफेर के आरोपों की परतें
Rajesh Exports का अजीबोगरीब मामला: भारी-भरकम रेवेन्यू, लेकिन मुनाफा बेहद मामूली

बाजार नियामक SEBI ने Rajesh Exports में अकाउंटिंग की गंभीर अनियमितताओं को चिह्नित किया है, जिससे कंपनी के भारी-भरकम रेवेन्यू आंकड़ों और परिचालन पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
Rajesh Exports से जुड़ी ताजा खबरों ने बाजार में हलचल मचा दी है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने गोल्ड रिफाइनिंग क्षेत्र की इस दिग्गज कंपनी के खिलाफ एक सख्त अंतरिम आदेश जारी किया है। मार्च 2024 में शुरू हुई जांच के बाद, नियामक ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने कई वर्षों में ₹15.15 लाख करोड़ के रेवेन्यू को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने की एक जटिल वित्तीय साजिश रची। अप्रैल 2020 से मार्च 2024 की अवधि की इस जांच से पता चलता है कि यह कंपनी अपने विशाल परिचालन स्तर और बेहद मामूली मुनाफे के बीच तालमेल बिठाने में संघर्ष कर रही है।
बैलेंस शीट में विसंगतियां
इस विवाद के केंद्र में कंपनी के रिपोर्ट किए गए रेवेन्यू और मुनाफे के बीच का बड़ा अंतर है। वित्त वर्ष 2025 में, Rajesh Exports ने ₹4.23 लाख करोड़ का समेकित रेवेन्यू दर्ज किया, जबकि टैक्स के बाद मुनाफा मात्र ₹95 करोड़ रहा, जिससे नेट मार्जिन केवल 0.02% रह गया। स्थिति पर नजर रखने वाले उद्योग विशेषज्ञों ने इसे 'पास-थ्रू अकाउंटिंग' करार दिया है, जिसका सुझाव है कि रिपोर्ट किया गया रेवेन्यू वास्तविक वैल्यू क्रिएशन के बजाय केवल सोने की आवाजाही को दर्शाता है। नियामक ने नोट किया कि इस भारी रेवेन्यू का 97% से 99% हिस्सा विदेशी सहायक कंपनियों, विशेष रूप से स्विस रिफाइनर Valcambi SA से आता है।
निगरानी में बाधा डालने के आरोप
SEBI की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति को जानबूझकर सहयोग न करके छिपाया गया। जांचकर्ताओं का दावा है कि कंपनी और उसके ऑडिटर्स ने लेजर विवरण, देनदार/लेनदार की जानकारी और सहायक कंपनियों के रिकॉर्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज साझा नहीं किए। नियामक के अनुसार, यह निवेशकों को गुमराह करने और परिचालन स्तर को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का एक सोची-समझी कोशिश लगती है। इसके अलावा, चेयरमैन राजेश मेहता को अगली सूचना तक कंपनी के शेयरों में कारोबार करने से रोक दिया गया है और इन संदिग्ध लेन-देन की गहराई से जांच के लिए एक फॉरेंसिक ऑडिटर नियुक्त किया गया है, जिसमें कथित तौर पर फंड का डायवर्जन और फर्जी गोल्ड माइन निवेश शामिल हैं।
कंपनी की प्रतिक्रिया
गुरुवार को जारी एक सार्वजनिक बयान में, Rajesh Exports ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। कंपनी का कहना है कि उसके वित्तीय विवरणों में प्रस्तुत आंकड़े सटीक हैं और नियामक की उलझन उसकी सहायक कंपनी Valcambi में EBITDA और रेवेन्यू रिपोर्टिंग के बीच गलतफहमी के कारण है। कंपनी ने जोर देकर कहा कि SEBI ने उसकी वास्तविक कमाई पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की है और यह जांच केवल एक तकनीकी चूक का परिणाम है। इन दावों के बावजूद, नियामक का ध्यान कंपनी के खुलासों की पारदर्शिता और उन करोड़-रुपये के आंकड़ों की वैधता पर बना हुआ है, जिन्होंने इसकी बाजार उपस्थिति को परिभाषित किया है।
निवेशकों पर असर और बाजार की प्रतिक्रिया
जांच के बाद बाजार की प्रतिक्रिया काफी तेज रही है और निवेशकों ने इस एक्सपोर्ट्स दिग्गज के आसपास अनिश्चितता को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। इस मामले ने खुदरा निवेशकों और प्रमुख संस्थानों के कंपनी के शेयरों में निवेश को भी उजागर किया है, जिस पर इस खबर के बाद भारी दबाव देखा गया। जैसे-जैसे फॉरेंसिक ऑडिट आगे बढ़ेगा, उद्योग जगत बारीकी से देख रहा है कि कंपनी पारदर्शी खुलासे की मांग को कैसे पूरा करती है और क्या वह अपने भारी-भरकम रेवेन्यू दावों को नियामक द्वारा पहचानी गई परिचालन वास्तविकताओं के साथ मेल बिठा पाती है या नहीं।
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