Politicalpedia
खेल

संजू सैमसन का नजरिया: धोनी क्रिकेट के फेडरर और कोहली अल्काराज़ जैसे क्यों हैं

धोनी क्रिकेट के फेडरर हैं, कोहली अल्काराज़ जैसे: संजू सैमसन

द्वारा प्रिया नायरप्रकाशित 23 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
संजू सैमसन का नजरिया: धोनी क्रिकेट के फेडरर और कोहली अल्काराज़ जैसे क्यों हैं
संजू सैमसन का नजरिया: धोनी क्रिकेट के फेडरर और कोहली अल्काराज़ जैसे क्यों हैं

विंबलडन 2026 से पहले, भारतीय स्टार ने टेनिस के दिग्गजों और भारतीय क्रिकेट के प्रतिष्ठित खिलाड़ियों के बीच समानताएं बताई हैं।

जैसे-जैसे विंबलडन के ग्रास कोर्ट एक और पखवाड़े के रोमांचक मुकाबलों के लिए तैयार हो रहे हैं, भारतीय खेल जगत में चर्चा एक दिलचस्प मोड़ पर आ गई है। संजू सैमसन, जिन्होंने हाल ही में टी20 विश्व कप में लगातार तीन अर्धशतक जड़कर दबदबा बनाया था, ने क्रिकेट के मैदान से बाहर निकलकर टेनिस की दुनिया को करीब से देखा है। जियोस्टार (JioStar) पर टेनिस दिग्गज रोहन बोपन्ना के साथ बातचीत करते हुए, सैमसन ने क्रिकेट की महानता को टेनिस के दिग्गजों के नजरिए से परिभाषित किया।

फेडरर और अल्काराज़ के साथ तुलना

जब सैमसन से पूछा गया कि क्रिकेट का रोजर फेडरर कौन है, तो उन्होंने बिना किसी देरी के एमएस धोनी का नाम लिया। उन्होंने पूर्व विकेटकीपर के शांत स्वभाव का जिक्र करते हुए कहा, "वे अपने काम को लेकर बहुत शांत और संयमित रहते हैं।" सैमसन ने बताया कि फेडरर की तरह ही धोनी का खेल भी अक्सर सहज दिखता है, लेकिन उसमें जबरदस्त और छिपी हुई ताकत होती है।

अगर धोनी संयम के प्रतीक हैं, तो विराट कोहली खेल के आधुनिक और उच्च-ऊर्जा वाले विकास का प्रतिनिधित्व करते हैं। सैमसन ने पूर्व भारतीय कप्तान की तुलना कार्लोस अल्काराज़ से की, जो अपनी आक्रामकता के लिए जाने जाते हैं। सैमसन के अनुसार, यह तुलना कोहली के करियर के शुरुआती दौर से जुड़ी है—एक आक्रामक और विस्फोटक क्रिकेट, जो अल्काराज़ के हर पॉइंट पर दिखने वाले जुनून को दर्शाता है। यह एक शानदार विरोधाभास है: एक संयमित उस्ताद और दूसरा निरंतर चुनौती देने वाला खिलाड़ी।

साझा सफलता पर बनी विरासत

खेल के इन दिग्गजों पर यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब भारतीय क्रिकेट एक साथ मिली दोहरी सफलता का जश्न मना रहा है। सैमसन ने केवल दिग्गजों की बात नहीं की, बल्कि 2025 में महिला टीम की पहली वनडे विश्व कप जीत से मिले प्रोत्साहन का भी जिक्र किया। पुरुष टीम के लिए, वह जीत केवल टीवी पर देखा गया एक नजारा नहीं, बल्कि एक बेंचमार्क थी।

सैमसन ने बताया, "उन्होंने विश्व कप जीता और हमें एक ऐसे मुकाम पर खड़ा कर दिया जहां हमें लगा कि हम भी भारत में ऐसा ही कर सकते हैं।" सामूहिक क्षमता का यह अहसास स्पष्ट रूप से काम आया, क्योंकि पुरुष टीम ने भी जल्द ही घरेलू सरजमीं पर टी20 ट्रॉफी जीतकर उस उपलब्धि को दोहराया। सैमसन जैसे खिलाड़ियों के लिए, जिन्होंने उस टूर्नामेंट के दौरान अपनी लय हासिल की, महिला टीम की सफलता एक बड़ी प्रेरणा साबित हुई।

बड़ी तस्वीर: यह क्यों मायने रखता है

खेलों के बीच का यह तालमेल—जहां क्रिकेटर टेनिस दिग्गजों के अनुशासन से प्रेरणा लेते हैं—भारतीय खेल संस्कृति की परिपक्वता को दर्शाता है। यह बताता है कि हमारे एथलीट अब केवल अपने खेल तक सीमित नहीं हैं; वे वैश्विक उत्कृष्टता के छात्र हैं, जो अन्य खेलों के दिग्गजों से रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक सीख ले रहे हैं। जब सैमसन फेडरर की शांति या अल्काराज़ के विस्फोट की बात करते हैं, तो वे एक शीर्ष एथलीट की उस आंतरिक शब्दावली को उजागर कर रहे होते हैं जो कौशल और आभा के बीच की बारीक रेखा को परिभाषित करने की कोशिश करती है। जैसे ही विंबलडन 2026 शुरू हो रहा है, ये तुलनाएं प्रशंसकों को खेल के शिखर पर बने रहने के लिए आवश्यक दृढ़ता को समझने का एक नया नजरिया देती हैं।

द्वारा प्रिया नायर
राजनीतिक संवाददाता

प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।