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सहरसा के किसान अलर्ट: तूफान आने से पहले मक्के की फसल काट लें

IMD बोला- 14 जून तक गरज-चमक, आंधी और वज्रपात की संभावना: सहरसा में कृषि विभाग ने किसानों को दी सलाह

द्वारा रोहन गुप्ताप्रकाशित 11 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
सहरसा के किसान अलर्ट: तूफान आने से पहले मक्के की फसल काट लें
सहरसा के किसान अलर्ट: तूफान आने से पहले मक्के की फसल काट लें

IMD ने सहरसा में 14 जून तक खराब मौसम और आंधी-तूफान का पूर्वानुमान जताया है। इसे देखते हुए स्थानीय कृषि विभाग ने किसानों से मक्के की कटाई में तेजी लाने को कहा है ताकि फसल को भारी नुकसान से बचाया जा सके।

सहरसा, बिहार का मौसम अब करवट ले रहा है और किसानों के लिए अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। IMD ने क्षेत्र के लिए स्पष्ट चेतावनी जारी की है: 10 जून से 14 जून तक गरज-चमक, वज्रपात और रुक-रुक कर बारिश हो सकती है। तापमान 35°C से 37°C के बीच रहने की संभावना है, और तेज हवाओं के साथ यह गर्मी खड़ी फसलों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।

खरीफ और बागवानी के लिए जरूरी सलाह

सहरसा के अगवानपुर स्थित कृषि अनुसंधान संस्थान के मौसम विज्ञानी डॉ. डी.के. चौधरी ने विशेष रूप से मक्का उत्पादकों के लिए चेतावनी जारी की है। तेज हवाओं के कारण फसल के गिरने (lodging) का खतरा है, जिससे पैदावार को भारी नुकसान हो सकता है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे तैयार मक्के की कटाई को प्राथमिकता दें और उसे सुरक्षित व सूखे स्थानों पर रखें।

यह सलाह केवल अनाज तक सीमित नहीं है। बागवानी पर भी खतरा मंडरा रहा है; आम और लीची के बागवानों को चेतावनी दी गई है कि तेज हवाओं से फल समय से पहले गिर सकते हैं। विभाग ने सुझाव दिया है कि लीची की तुड़ाई सुबह के समय सावधानीपूर्वक करें, और मौसम साफ होने पर आम के बागों में फ्रूट फ्लाई से बचाव के लिए उचित कीटनाशकों का छिड़काव करें।

कीट प्रबंधन और जल संसाधन

तूफान के खतरे के अलावा, विभाग कृषि संबंधी अन्य चुनौतियों पर भी ध्यान दे रहा है। मूंग और उड़द की फसल में 'येलो मोजेक' रोग से प्रभावित पौधों को तुरंत उखाड़कर नष्ट करने और उसके बाद इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव करने का निर्देश दिया गया है। वहीं, मखाना उत्पादकों को सलाह दी गई है कि वे खेतों में जल स्तर लगभग 1.5 फीट बनाए रखें ताकि फसल को तापमान में बदलाव से बचाया जा सके।

आगामी खरीफ सीजन के लिए तैयारी पर जोर दिया जा रहा है। धान की खेती करने वाले किसानों को सलाह दी गई है कि वे प्रति हेक्टेयर रोपाई के लिए 800 से 1000 वर्ग मीटर भूमि में नर्सरी तैयार करें और केवल उपचारित व प्रमाणित बीजों का ही उपयोग करें। अधिकारी तकनीक अपनाने पर भी जोर दे रहे हैं, ताकि किसान रियल-टाइम मौसम अपडेट और बिजली गिरने की चेतावनी के लिए 'मेघदूत' और 'दामिनी' मोबाइल ऐप का उपयोग कर सकें।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

यह दिशा-निर्देश अनिश्चित जलवायु के प्रति ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बढ़ती संवेदनशीलता को दर्शाता है। सहरसा जैसे जिले में जहां आजीविका का प्राथमिक स्रोत पूरी तरह से मौसम पर निर्भर है, वहां पांच दिन का खराब मौसम भी मुनाफे और नुकसान के बीच का अंतर पैदा कर सकता है। ऐप-आधारित निगरानी की ओर झुकाव पारंपरिक खेती में तकनीक के एकीकरण की आवश्यकता को दर्शाता है। फसलों के अलावा, पशुधन की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। किसानों को याद दिलाया गया है कि वे पशुओं के शेड को साफ रखें, उन्हें पर्याप्त पानी दें और तूफान के दौरान उन्हें पेड़ों से दूर रखें, क्योंकि पेड़ बिजली गिरने का केंद्र बन सकते हैं।

द्वारा रोहन गुप्ता
बिज़नेस संवाददाता

रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।