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RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट में कटौती से शेयर बाजार में उछाल, सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी

RBI ने रेपो रेट घटाने का किया ऐलान, शेयर बाजार में हलचल: सेंसेक्स 200 अंक ऊपर, निफ्टी 23,450 के पार

द्वारा पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्कप्रकाशित 5 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
RBI पॉलिसी में बदलाव: रेपो रेट में कटौती से सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी
RBI पॉलिसी में बदलाव: रेपो रेट में कटौती से सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में 50 आधार अंकों की कटौती कर बाजार को चौंका दिया है, जिससे घरेलू शेयर बाजार में जोरदार उछाल देखने को मिला है।

शुक्रवार, 6 जून 2025 को भारतीय शेयर बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब RBI ने मौद्रिक नीति में एक साहसिक कदम उठाया। दिन की शुरुआत शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के साथ हुई थी और निवेशक सतर्क थे, लेकिन 50 आधार अंकों की कटौती के ऐलान ने—जिससे रेपो रेट घटकर 5.5 प्रतिशत हो गया—बाजार में तेजी ला दी। सुबह के सत्र तक, Sensex 500 अंकों से अधिक चढ़ गया, जबकि Nifty 24,900 के स्तर को पार कर गया, जिससे शुरुआती सुस्ती खत्म हो गई।

ब्याज दरों पर एक निर्णायक कदम

पिछले कई हफ्तों से रेपो रेट के फैसले को लेकर चर्चाएं गर्म थीं और विश्लेषकों को 25 आधार अंकों की मामूली कटौती की उम्मीद थी। हालांकि, गवर्नर संजय मल्होत्रा की ओर से 50 आधार अंकों की कटौती की घोषणा बाजार के अनुमान से कहीं अधिक रही। इस कटौती के साथ ही, केंद्रीय बैंक ने अपनी आधिकारिक पॉलिसी को 'तटस्थ' (Neutral) कर दिया है, जो पहले के उदार रुख से एक बड़ा बदलाव है। इस कदम का उद्देश्य वैश्विक व्यापार तनाव और घरेलू खपत के बीच आर्थिक विकास को गति देना है।

बाजार का मिजाज और सेक्टर पर असर

शेयर बाजारों में तत्काल प्रतिक्रिया राहत और उत्साह के रूप में दिखी। ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील सेक्टर, विशेष रूप से बैंकिंग, रियल एस्टेट और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs), सबसे आगे रहे क्योंकि अब कर्ज सस्ता होने की उम्मीद है। जिन निवेशकों ने पहले आक्रामक रुख से परहेज किया था, उन्होंने इस खबर का फायदा उठाने के लिए तेजी से निवेश किया। विश्लेषकों ने कहा कि सूचकांकों में तेजी का सीधा कारण केंद्रीय बैंक का उम्मीद से बेहतर फैसला रहा, जिसने ट्रेडर्स को वह दिशा दी जिसकी उन्हें तलाश थी।

वैश्विक और घरेलू चुनौतियों का सामना

RBI की पॉलिसी का यह फैसला भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आया है। पूरे साल रुपये पर काफी दबाव रहा है और यह एशिया की कमजोर मुद्राओं में से एक रहा है, जबकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने महंगाई की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इन बाहरी जोखिमों के बावजूद, केंद्रीय बैंक का विकास को प्राथमिकता देने का निर्णय घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती में विश्वास को दर्शाता है। बाजार के प्रतिभागी अब लिक्विडिटी और लंबी अवधि की महंगाई दर पर गवर्नर की टिप्पणी का बारीकी से विश्लेषण कर रहे हैं।

निवेशकों के लिए आउटलुक

जैसे-जैसे Nifty 24,900 के स्तर पर टिका हुआ है, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अब ध्यान इस बात पर होगा कि ये कम ब्याज दरें कॉर्पोरेट मुनाफे और उपभोक्ता खर्च को कैसे प्रभावित करती हैं। हालांकि शुरुआती उछाल एक सकारात्मक मार्केट प्रतिक्रिया को दर्शाता है, लेकिन विश्लेषक सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। वैश्विक व्यापक आर्थिक बदलावों पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी की अस्थिरता और RBI की बदलती रणनीति ही आने वाले महीनों में ब्याज दर और इक्विटी प्रदर्शन को तय करेगी।

द्वारा पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्क
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