बारिश में थमा हैदराबाद: 5 किमी का सफर तय करने में लगे 2.2 घंटे
हैदराबाद के एक निवासी ने बताया कि बारिश के कारण लगे जाम में उन्हें 5 किलोमीटर की दूरी तय करने में 2.2 घंटे लग गए। देखें वीडियो
अत्यधिक बारिश के आगे शहर का बुनियादी ढांचा चरमरा गया और यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
इस सप्ताह मानसून की भारी बारिश ने हैदराबाद को पूरी तरह बेहाल कर दिया, जिससे पांच किलोमीटर का सामान्य सफर 2.2 घंटे के संघर्ष में बदल गया। एक निवासी के लिए यह यात्रा शहर के अचानक और अत्यधिक बारिश से जूझने का प्रतीक बन गई। जैसे ही आसमान से आफत बरसी और एक घंटे के भीतर 9 से 15 सेमी बारिश हुई, स्थानीय जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह विफल हो गई। प्रमुख सड़कें जलमग्न हो गईं और वाहन जाम के समंदर में फंसकर रह गए।
थमा हुआ शहर
यह घटना, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, अनिश्चित जलवायु पैटर्न के सामने शहरी नियोजन की सीमाओं की एक सख्त याद दिलाती है। हालांकि यात्री ने व्यंग्य करते हुए कहा कि वह उम्मीद करता है कि यह "रिकॉर्ड" दोबारा न टूटे, लेकिन weather Hyderabad में जिस तरह का बदलाव दिख रहा है, उससे लगता है कि ऐसी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। बारिश के पानी को सोखने के लिए बने स्थानीय कैचमेंट एरिया पानी की भारी मात्रा के आगे बेअसर साबित हुए और सड़कें अस्थायी नहरों में तब्दील हो गईं।
यह क्यों मायने रखता है
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और यात्रियों की हताशा से परे, यह जाम भारत के टियर-1 शहरों की एक गंभीर कमजोरी को उजागर करता है। जैसे-जैसे शहरी घनत्व बढ़ रहा है, जल निकासी और सड़क नेटवर्क पर दबाव उनकी क्षमता से कहीं अधिक हो गया है। हालांकि मेट्रो रेल परियोजनाओं ने पेशेवरों के सफर को आसान बनाया है, लेकिन "लास्ट माइल" कनेक्टिविटी अभी भी मौसम की मार झेलने को मजबूर है। जब शहर की मुख्य सड़कें डूब जाती हैं, तो सबसे मजबूत सार्वजनिक परिवहन प्रणाली भी यातायात को पूरी तरह ठप होने से नहीं रोक पाती।
यह पैटर्न अब पूरे देश में आम होता जा रहा है। चाहे दिल्ली के प्रेस क्लब में जलभराव हो या बेंगलुरु और हैदराबाद का संकट, इसका मुख्य कारण वह बुनियादी ढांचा है जो अत्यधिक और केंद्रित बारिश को संभालने में असमर्थ है। नीति निर्माताओं के लिए सबक साफ है: ध्यान केवल यातायात प्रबंधन से हटाकर बड़े पैमाने पर जलवायु-अनुकूल सिविल इंजीनियरिंग पर केंद्रित करना होगा। जब तक जल निकासी प्रणालियों को इन भारी बारिशों के अनुकूल नहीं बनाया जाता, शहर अगली बड़ी बारिश के लिए असुरक्षित बना रहेगा।
अपडेट रहें
निवासियों के लिए, stay अपडेट रहने का सबसे अच्छा तरीका Moneycontrol जैसे विश्वसनीय पोर्टल्स के माध्यम से रियल-टाइम जानकारी प्राप्त करना है। हालांकि यह original रिपोर्ट एक यात्री पर पड़े तत्काल प्रभाव को दर्शाती है, लेकिन यह बदलती जलवायु के कारण शहरी बुनियादी ढांचे पर पड़ रहे दबाव का एक बड़ा हिस्सा है। Though यह घटना इतनी कम दूरी के लिए समय के लिहाज से एक "दुर्लभ उपलब्धि" थी, लेकिन यह एक primary संकेत है कि शहर की सहनशक्ति अपनी सीमा तक पहुंच चुकी है। नगर निगम के अधिकारियों द्वारा जलभराव वाले क्षेत्रों को साफ करने और स्थिति सामान्य करने के प्रयासों पर Watch रखें।
रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।