पहली खिताबी जीत की तलाश: क्या हरमनप्रीत की टीम इंडिया तोड़ पाएगी टी20 वर्ल्ड कप का तिलिस्म?
टीम इंडिया का महिला टी20 विश्व कप में कैसा रहा है सफर? हर बार टूटा है दिल
जैसे ही भारतीय महिला क्रिकेट टीम 2026 टी20 वर्ल्ड कप के लिए इंग्लैंड पहुंची है, पूरी टीम पर इस फॉर्मेट में अपना पहला वैश्विक खिताब जीतने का एक दशक पुराना दबाव है।
भारतीय खेमे में इस समय शांत दृढ़ संकल्प का माहौल है। वनडे फॉर्मेट में शिखर पर पहुंचने के बाद, 'वुमन इन ब्लू' अब एक ऐतिहासिक 'डबल' पूरा करने की कोशिश में है। इंग्लैंड में होने वाले 2026 ICC महिला टी20 वर्ल्ड कप के लिए टीम तैयार है, लेकिन चर्चा का मुख्य विषय वही पुरानी कमी है: ट्रॉफी कैबिनेट में टी20 खिताब का न होना। कार्डिफ में वेस्टइंडीज पर 26 रन की निर्णायक जीत समेत वॉर्म-अप मैचों में टीम का प्रदर्शन काफी प्रभावशाली रहा है, जिससे लगता है कि हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में टीम सही समय पर लय हासिल कर रही है।
करीबी हार का इतिहास
अगर पिछले सभी संस्करणों में टीम इंडिया के रिकॉर्ड्स पर नजर डालें, तो कहानी उतार-चढ़ाव भरी रही है। टूर्नामेंट की शुरुआत से ही भारत ने हर संस्करण में हिस्सा लिया है, जिसमें 41 मैचों में से 22 में जीत और 18 में हार मिली है। 2020 में ऑस्ट्रेलिया में हुए फाइनल की हार, जहां टीम खिताब के बेहद करीब पहुंचकर चूक गई थी, आज भी प्रशंसकों के लिए सबसे बड़ा दर्द है। हालांकि टीम चार बार (2009, 2010, 2018 और 2023) सेमीफाइनल तक पहुंची है, लेकिन 2012, 2014, 2016 और 2024 में ग्रुप स्टेज से बाहर होना उस निरंतरता की कमी को दर्शाता है जिसे कोच और कप्तान सुधारने के लिए बेताब हैं।
आगे की राह: ग्रुप A की चुनौतियां
2026 टूर्नामेंट के स्ट्रक्चर के अनुसार भारत को चुनौतीपूर्ण ग्रुप A में रखा गया है। छह बार की चैंपियन और वर्ल्ड क्रिकेट पर राज करने वाली ऑस्ट्रेलिया के अलावा, भारत को दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश, पाकिस्तान और नीदरलैंड का सामना करना होगा। अभियान की शुरुआत 14 जून को एजबेस्टन में पाकिस्तान के खिलाफ होगी, जो हमेशा की तरह एक हाई-वोल्टेज मुकाबला होगा। शेड्यूल काफी व्यस्त है और इसका समापन 28 जून को लॉर्ड्स में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले बड़े मुकाबले के साथ होगा।
बड़ी तस्वीर: यह क्यों मायने रखता है
भारतीय महिला क्रिकेट के लिए, यह टूर्नामेंट सिर्फ एक ट्रॉफी जीतने के बारे में नहीं है; यह एक नई विरासत बनाने के बारे में है। एक प्रतिस्पर्धी टीम से एक दबदबे वाली ताकत बनने के लिए उस मानसिक बाधा को तोड़ना जरूरी है जो अक्सर नॉकआउट मैचों में सामने आती है। स्मृति मंधाना और हरमनप्रीत कौर जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के साथ-साथ श्रेयंका पाटिल और ऋचा घोष जैसी होनहार प्रतिभाओं के मिश्रण से टीम काफी संतुलित नजर आती है। भारत का क्रिकेट इकोसिस्टम इस बार पोडियम फिनिश से कम कुछ भी स्वीकार करने को तैयार नहीं है।
स्क्वाड की गहराई और तैयारी
चयनकर्ताओं ने युवा और अनुभव का अच्छा मिश्रण चुना है और पहली बार नंदिनी शर्मा को टीम में शामिल किया गया है। टीम की तैयारी पूरी है और वॉर्म-अप मैचों का इस्तेमाल मिडिल ऑर्डर की कमजोरियों को दूर करने के लिए किया गया है। जैसे-जैसे प्रशंसक espncricinfo समेत विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर लाइव अपडेट्स देखेंगे, सबकी नजरें इस पर होंगी कि क्या स्पिन गेंदबाजी विभाग इंग्लिश पिचों पर कार्डिफ जैसा प्रदर्शन दोहरा पाएगा। चाहे वह रणनीतिक बदलाव हों या ओपनर्स की व्यक्तिगत चमक, हर छोटी बारीकी पर नजर होगी क्योंकि भारत सबसे बड़े मंच पर अपने रिकॉर्ड्स को फिर से लिखने के लिए तैयार है।
रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।