पुणे मर्डर केस: केतन अग्रवाल हत्याकांड में नए फॉरेंसिक सबूत और कोडवर्ड में हुई चैटिंग का खुलासा
मंगेतर की हत्या की आरोपी सिया का दूसरा मोबाइल मिला: चेतन से कोडवर्ड में चैटिंग करती थी; दोनों 14 दिन येरवदा जेल में
लोहागढ़ किले में केतन अग्रवाल की मौत की जांच जैसे-जैसे तेज हो रही है, एक छिपा हुआ मोबाइल फोन मिलने और डिकोड की गई चैटिंग एक सोची-समझी साजिश की ओर इशारा कर रही है।
26 वर्षीय रियल एस्टेट व्यवसायी केतन अग्रवाल की हाई-प्रोफाइल हत्या ने एक चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। वडगांव कोर्ट द्वारा उनकी मंगेतर सिया गोयल और कथित साथी चेतन चौधरी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में येरवदा जेल भेजने के बाद, जांचकर्ताओं ने सिया के आवास से एक दूसरा मोबाइल फोन बरामद किया है। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) के पास मौजूद यह डिवाइस इस केस में 'स्मोकिंग गन' साबित हो सकता है। पुलिस ने आरोपियों के उपकरणों से बड़ी मात्रा में डिलीट किया गया डेटा रिकवर किया है, जिससे पता चला है कि दोनों ने उपनामों और इमोजी की एक जटिल प्रणाली का इस्तेमाल किया था—यह एक डिजिटल कोड था जिसे 18 जून को पुणे के किले में हुई उस घातक यात्रा की योजना को छिपाने के लिए बनाया गया था।
एक सोची-समझी साजिश
मामले की टाइमलाइन पूर्व-नियोजित साजिश की ओर इशारा करती है। सूत्रों के अनुसार, यह साजिश 31 मई को ही आकार लेने लगी थी, जब 5 जून को केतन को पहाड़ियों पर ले जाने का प्रयास विफल हो गया था। यह जोड़ा नवंबर में शादी करने वाला था, जिसकी तैयारियां जोरों पर थीं। इसमें जयपुर में एक महल की बुकिंग (अनुमानित ₹17 करोड़) और मेहमानों के लिए प्राइवेट जेट की व्यवस्था शामिल थी। हालांकि, अंदर ही अंदर पारिवारिक चिंताएं बढ़ रही थीं; बताया जा रहा है कि केतन ने सिया और चेतन की नजदीकियों पर गहरा संदेह जताया था, और यहां तक कि अपने परिवार से शादी पक्की करने से पहले बैकग्राउंड चेक करने की भी बात कही थी।
डिजिटल फुटप्रिंट और फॉरेंसिक चुनौतियां
कोडवर्ड वाली चैटिंग के अलावा, जांचकर्ता अपराध के समय के आसपास छोड़े गए डिजिटल फुटप्रिंट्स की बारीकी से जांच कर रहे हैं। यह पुष्टि हो गई है कि घटना के तुरंत बाद केतन का मोबाइल फोन सिया के पास था, जिसे बाद में उसने उसके रिश्तेदारों को सौंपा था। पुलिस अभी यह विश्लेषण कर रही है कि क्या इस दौरान सबूत मिटाने या कॉल लॉग्स के साथ छेड़छाड़ की गई थी। बचाव पक्ष के दावों—विशेष रूप से यह तर्क कि सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा व्यक्ति चेतन नहीं है—को खारिज करने के लिए, पुलिस 'गेट एनालिसिस' (चलने के तरीके का वैज्ञानिक अध्ययन) की तैयारी कर रही है, ताकि घटनास्थल पर आरोपी की मौजूदगी को साबित किया जा सके।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है: पूर्व-नियोजन का पैटर्न
यह मामला आधुनिक आपराधिक जांच में एक चिंताजनक बदलाव को उजागर करता है, जहां 'डिजिटल क्राइम सीन' भौतिक घटनास्थल जितना ही महत्वपूर्ण है। भव्य शादी की तैयारियों से लेकर ट्रेकिंग साइट पर हुई ठंडे दिमाग से की गई हत्या तक का सफर यह दिखाता है कि छिपे हुए उद्देश्यों के कारण व्यक्तिगत विवाद किस हद तक बढ़ सकते हैं। कानून प्रवर्तन के लिए चुनौती 'इरादे की भाषा' को डिकोड करने की है—वे इमोजी और उपनाम जो अब साझा आपराधिक मानसिकता के प्राथमिक सबूत के रूप में काम कर रहे हैं। आरोपियों द्वारा नार्को-एनालिसिस टेस्ट से इनकार करना इस बात पर जोर देता है कि अभियोजन पक्ष के लिए डिजिटल फॉरेंसिक और भौतिक साक्ष्य (जैसे डमी का उपयोग करके क्राइम सीन का पुनर्निर्माण) कितने महत्वपूर्ण हैं।
तीसरा व्यक्ति भी घेरे में
बीड के एक युवक की हिरासत के साथ जांच का दायरा बढ़ गया है, जो वर्तमान में बालेवाड़ी की एक कंपनी में कार्यरत है। प्रारंभिक रिपोर्टों से पता चलता है कि यह व्यक्ति हत्या की साजिश से वाकिफ हो सकता है, जो शायद पीड़ित या आरोपी का विश्वासपात्र रहा हो। जैसे-जैसे पुलिस इस तीसरे व्यक्ति को गवाह बनाने पर विचार कर रही है, दो लोगों के अपराध की कहानी अब जटिल होती जा रही है, जिससे जांचकर्ताओं को उस त्रासदी के टुकड़े जोड़ने पड़ रहे हैं, जिसकी पटकथा महीनों पहले लिखी गई थी।
अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।