IND vs AFG: प्रियांश आर्य की तूफानी फिफ्टी ने बटोरी सुर्खियां
IND A vs AFG A: वैभव सूर्यवंशी से तगड़ा स्ट्राइक रेट, इतनी गेंद में ठोकी फिफ्टी, प्रियांश आर्य छा गए
ओपनिंग करने उतरे प्रियांश आर्य ने अफगान गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ा दीं और इंडिया-ए को ट्राई-सीरीज में मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।
इंडिया-ए और अफगानिस्तान-ए (IND vs AFG) मुकाबले को लेकर चर्चा वैभव सूर्यवंशी की वापसी को लेकर थी, जो हाल ही में श्रीलंकाई खिलाड़ियों से जुड़े विवाद के कारण सुर्खियों में थे। हालांकि, जैसे ही पहली गेंद फेंकी गई, कहानी पूरी तरह बदल गई। जहां सूर्यवंशी ने 135 के स्ट्राइक रेट से 38 रन बनाकर एक सहयोगी की भूमिका निभाई, वहीं उनके साथी प्रियांश आर्य असली 'गेम चेंजर' बनकर उभरे और आक्रामक बल्लेबाजी का मुजाहिरा पेश करते हुए अफगान गेंदबाजों को बेअसर कर दिया।
आर्य, जिन्हें पिछले मैचों में नंबर तीन पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया था, उन्हें आखिरकार पारी की शुरुआत करने का मौका मिला। यह बदलाव एक मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ। उन्होंने अफगान गेंदबाजों की जमकर खबर ली और महज 34 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया। आउट होने से पहले उन्होंने 42 गेंदों में 58 रन बनाए, जिसमें नौ चौके और एक गगनचुंबी छक्का शामिल था।
मैच का टर्निंग पॉइंट
दोनों ओपनर्स के बीच की साझेदारी ने इंडिया-ए को एक बेहतरीन शुरुआत दी। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी इस जोड़ी ने पावरप्ले से ही टीम का रन रेट शानदार बनाए रखा। आर्य का विकेट 15वें ओवर में गिरा, जब उन्होंने फरमानुल्लाह सफी की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की। गेंद में अतिरिक्त उछाल के कारण वह चूक गए और बैकवर्ड पॉइंट पर शम्स उर रहमान ने आसान कैच लपक लिया। इस पारी के साथ ही आर्य ने पिछले मैचों के अपने 8 और 32 रनों के स्कोर के सिलसिले को भी तोड़ दिया।
यह प्रदर्शन ट्राई-सीरीज का मुख्य आकर्षण रहा है, जो यह दर्शाता है कि भारतीय प्रबंधन अपनी बेंच स्ट्रेंथ को परखने के लिए किस तरह के प्रयोग कर रहा है। जैसे-जैसे मैच 16वें ओवर तक पहुंचा और स्कोर 117 रन हुआ, सबकी नजरें इस बात पर टिकी थीं कि ये युवा खिलाड़ी दबाव में कैसा प्रदर्शन करते हैं। ऋतुराज गायकवाड़ और तिलक वर्मा के मिडिल ऑर्डर में होने से टीम प्रतियोगिता के अगले चरणों में जगह बनाने के लिए मजबूत स्थिति में है।
यह क्यों मायने रखता है: गहराई का कारक
प्रियांश आर्य जैसे खिलाड़ियों का उदय भारतीय क्रिकेट पाइपलाइन की गहराई का स्पष्ट संकेत है। हालांकि सीनियर खिलाड़ी अक्सर सुर्खियां बटोरते हैं, लेकिन एक युवा खिलाड़ी का अपनी पसंदीदा भूमिका में आकर मैच जिताऊ प्रदर्शन करना ही वह चीज है, जिसकी तलाश चयनकर्ताओं को इन दौरों में रहती है। मिडिल ऑर्डर से ओपनर के रूप में आर्य का सफल बदलाव यह साबित करता है कि घरेलू क्रिकेट की निरंतरता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काम आ रही है। यदि वह इसी आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी जारी रखते हैं, तो कोचिंग स्टाफ के लिए भविष्य को देखते हुए एक सुखद चयन दुविधा जरूर पैदा होगी।
अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।