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बंगाल में सियासी हलचल: बागी TMC सांसद सायनी घोष और प्रसून बनर्जी ने BJP के दिग्गज नेताओं से की मुलाकात

#Breaking: TMC में टूट! बागी सांसद सायनी घोष और प्रसून बनर्जी ने BJP नेता भूपेंद्र यादव से की मुलाकात | News18

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 14 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
बंगाल में सियासी हलचल: बागी TMC सांसद सायनी घोष और प्रसून बनर्जी ने BJP के दिग्गज नेताओं से की मुलाकात
बंगाल में सियासी हलचल: बागी TMC सांसद सायनी घोष और प्रसून बनर्जी ने BJP के दिग्गज नेताओं से की मुलाकात

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़े घटनाक्रम के तहत, तृणमूल कांग्रेस के दो प्रमुख सांसदों ने BJP के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ एक रणनीतिक बैठक की है, जिससे सत्ताधारी पार्टी में संभावित विभाजन की अटकलें तेज हो गई हैं।

रविवार को दिल्ली के सत्ता के गलियारों में उस समय हलचल मच गई, जब TMC के बागी सांसद सायनी घोष और प्रसून बनर्जी की BJP के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव के साथ उच्च-स्तरीय बैठक की खबर सामने आई। पश्चिम बंगाल के तनावपूर्ण राजनीतिक माहौल के बीच हुई इस मुलाकात ने तृणमूल कांग्रेस खेमे में खलबली मचा दी है और यह राज्य के संसदीय समीकरणों में संभावित बदलाव का संकेत है।

हालांकि न तो सांसदों और न ही BJP नेतृत्व ने इस चर्चा के एजेंडे पर कोई औपचारिक बयान दिया है, लेकिन इसका समय बेहद महत्वपूर्ण है। आंतरिक कलह से जूझ रही TMC के लिए, इस बैठक को पार्टी के भीतर बढ़ती दरारों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में, ऐसी मुलाकातें शायद ही कभी संयोग होती हैं और अक्सर ये किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआती आहट होती हैं।

बढ़ता आंतरिक संकट

इस बैठक ने TMC की संसदीय टीम की स्थिरता को लेकर लंबे समय से चले आ रहे सवालों को फिर से हवा दे दी है। सायनी घोष, जिनका नाम आज सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है, और अनुभवी नेता प्रसून बनर्जी, दोनों को ही पार्टी के भीतर प्रभावशाली चेहरों के तौर पर देखा जाता रहा है। भूपेंद्र यादव जैसे वरिष्ठ BJP रणनीतिकार के साथ उनकी यह मुलाकात बताती है कि TMC के भीतर का असंतोष अब उस मोड़ पर पहुंच गया है जहां से वापसी मुश्किल है।

बंगाल की राजनीति पर नजर रखने वालों के लिए, यह केवल निष्ठा बदलने से कहीं ज्यादा है; यह राजनीतिक पलायन के उस पुराने पैटर्न को दर्शाता है जिसने ऐतिहासिक रूप से राज्य की चुनावी गतिशीलता को परिभाषित किया है। अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए उत्सुक BJP, आगामी विधायी चुनौतियों से पहले सत्तारूढ़ दल के असंतुष्ट नेताओं को अपने पाले में करने की कोशिश करती दिख रही है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

यह घटनाक्रम दिल्ली और कोलकाता में आने वाले महीनों के लिए एक बड़ा संकेत है। यदि यह बैठक औपचारिक दलबदल में बदलती है, तो यह न केवल संसद में पार्टी की ताकत को प्रभावित करेगा, बल्कि TMC के 'एकजुटता' के नैरेटिव को भी बड़ा झटका देगा। इस तरह की टूट अक्सर डोमिनो इफेक्ट पैदा करती है, जिससे अन्य कार्यकर्ताओं के इस्तीफे या बगावत की संभावना बढ़ जाती है, जो खुद को मौजूदा नेतृत्व द्वारा दरकिनार महसूस कर रहे हैं।

तत्काल राजनीतिक असर से परे, यह कदम TMC के आंतरिक प्रबंधन पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर करता है। यह देखना बाकी है कि क्या यह बागी सांसदों की कोई सोची-समझी सौदेबाजी है या पार्टी छोड़ने की वास्तविक रणनीति। हालांकि, ऐसी मुलाकात की तस्वीरें पार्टी की पकड़ को कमजोर करती हैं और BJP को मौजूदा असंतोष का लाभ उठाने का एक ठोस अवसर प्रदान करती हैं। जैसे-जैसे यह खबर आगे बढ़ रही है, अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि TMC नेतृत्व अपनी सत्ता को मिली इस चुनौती का जवाब कैसे देता है।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।