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चेन्नई में राजनीतिक संकट: TVK के खिलाफ 'हॉर्स-ट्रेडिंग' के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

कुதிரை பேர புகார்... त.वे.क. (TVK) के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई

द्वारा अनन्या अय्यरप्रकाशित 19 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
चेन्नई में राजनीतिक संकट: TVK के खिलाफ हॉर्स-ट्रेडिंग के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
चेन्नई में राजनीतिक संकट: TVK के खिलाफ हॉर्स-ट्रेडिंग के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट अभिनेता विजय के नेतृत्व में बनी नई तमिलनाडु सरकार के गठन के दौरान लगे गंभीर रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच करने के लिए तैयार है।

चेन्नई का राजनीतिक माहौल आज एक कानूनी तूफान के लिए तैयार है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट वर्तमान प्रशासन की वैधता पर सवाल उठाने वाली एक याचिका पर सुनवाई करने वाला है। विवाद के केंद्र में अभिनेता से राजनेता बने विजय के नेतृत्व वाली தமிழக வெற்றிக் கழகம் (TVK) द्वारा बनाई गई तमिलनाडु सरकार है। मदुरै के के.के. रमेश द्वारा दायर याचिका में विधानसभा में बहुमत हासिल करने के लिए 'हॉर्स-ट्रेडिंग' यानी राजनीतिक निष्ठाओं की व्यवस्थित खरीद-फरोख्त के विस्फोटक आरोप लगाए गए हैं।

विवाद की जड़ हालिया विधानसभा चुनावों के गणित में है। हालांकि TVK ने 108 सीटें जीती थीं, लेकिन वह स्पष्ट बहुमत से पीछे रह गई थी। हालांकि, इस महीने की 13 तारीख को हुए ट्रस्ट वोट के दौरान, पार्टी के पक्ष में 144 वोट पड़े, जिससे उसकी सत्ता सुरक्षित हो गई। याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह संख्यात्मक उछाल AIADMK के कुछ बागी गुटों और अन्य छोटे समूहों के समर्थन से संभव हुआ, जिसे कथित तौर पर 1,000 करोड़ रुपये के भारी वित्तीय प्रलोभन के जरिए अंजाम दिया गया।

कानूनी चुनौती

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ आज इस रिट याचिका पर सुनवाई करेगी। इस याचिका में न केवल जांच की मांग की गई है, बल्कि ट्रस्ट वोट के दौरान हुए कथित वित्तीय लेनदेन की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से उच्च स्तरीय जांच की भी मांग की गई है। इसके अलावा, याचिका में अदालत से राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने का आग्रह किया गया है, जिसमें महत्वपूर्ण फ्लोर टेस्ट के दौरान DMK गठबंधन के वॉकआउट से पैदा हुए संवैधानिक संकट का हवाला दिया गया है।

हालांकि Maalaimalar जैसे आउटलेट्स की रिपोर्ट इन दावों की गंभीरता को उजागर करती हैं, लेकिन अब न्यायिक प्रक्रिया यह तय करेगी कि क्या इन गंभीर आरोपों का समर्थन करने के लिए कोई विश्वसनीय सबूत है। इस कार्यवाही पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह भारत के सबसे राजनीतिक रूप से सक्रिय राज्यों में से एक में नई बनी सरकार की स्थिरता से जुड़ा है।

बड़ी तस्वीर

यह घटनाक्रम गठबंधन-युग की राजनीति में निहित अस्थिरता की याद दिलाता है। चाहे 'हॉर्स-ट्रेडिंग' के आरोप सही साबित हों या केवल राजनीतिक बयानबाजी, यह मामला भारतीय राज्य राजनीति के उस आवर्ती पैटर्न को रेखांकित करता है जहां कम अंतर अक्सर गहन विधायी लड़ाइयों को जन्म देता है, जो अंततः न्यायपालिका तक पहुंच जाती हैं। जनता के लिए, यह देखने का समय है कि कानूनी प्रणाली सदन में भ्रष्टाचार के दावों के खिलाफ चुनावी जनादेश की पवित्रता को कैसे संतुलित करती है। इस मौलिक कानूनी जांच का परिणाम आने वाले महीनों में तमिलनाडु के शासन की दिशा तय करेगा।

द्वारा अनन्या अय्यर
वैश्विक मामले संवाददाता

अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।